IAS पति-पत्नी ने कोयले से की 1 करोड़ की कमाई, भाई ने संभाला इन्वेस्टमेंट मॉडल, EOW की चार्जशीट
Arun Tiwari | Oct 06, 2026, 16:18 IST
कोयला घोटाले में EOW की चार्जशीट
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी मामले में EOW के पूरक चालान ने एक ही परिवार से जुड़े तीन चेहरों की भूमिका को फिर चर्चा में ला दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, निलंबित IAS रानू साहू, उनके पति IAS जयप्रकाश मौर्य और रानू साहू के भाई पीयूष कुमार साहू से जुड़े मामले में लेवी वसूली, नकद लेन-देन और संपत्तियों में निवेश की अलग-अलग कड़ियां सामने आई हैं।
खास बात यह है कि EOW ने पीयूष साहू की भूमिका को कोयला लेवी से प्राप्त रकम को अपने और परिजनों के नाम संपत्तियों में निवेश कराने से जोड़ा है।
ईओडब्ल्यू के मुताबिक पीयूष कुमार साहू ने अपनी बहन रानू साहू से जुड़ी कोयला लेवी की रकम को परिवार के सदस्यों के नाम संपत्तियों में लगाने में भूमिका निभाई। जांच एजेंसी ने परिवार से संबंधित 13 संपत्तियों की खरीद का उल्लेख किया है। चार्जशीट के अनुसार इन संपत्तियों की खरीद में केवल बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल नहीं हुआ, बल्कि रजिस्ट्री मूल्य से अधिक नकद भुगतान किए जाने का भी दावा किया गया है।
ईओडब्ल्यू ने लेन-देन में पीयूष और परिवार के सदस्यों के बैंक खातों के इस्तेमाल की बात भी कही है। यानी जांच का एक महत्वपूर्ण एंगल यह है कि कथित तौर पर हासिल रकम को सीधे अपने पास रखने के बजाय परिवार और रिश्तेदारों के नाम संपत्तियों में लगाने का रास्ता अपनाया गया। इसी वजह से पीयूष साहू की भूमिका जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण मानी गई।
रानू साहू के भाई पीयूष साहू से ईओडब्ल्यू पहले भी पूछताछ कर चुकी है। मई 2024 में जांच एजेंसी ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। उस समय भी जांच का एक प्रमुख बिंदु परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई जमीन और संपत्तियां थीं। ईडी की पूर्व जांच में भी रानू साहू और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई कई संपत्तियों का जिक्र हुआ था। उस जांच में आरोप लगाया गया था कि अवैध आय का इस्तेमाल परिवार के सदस्यों के नाम संपत्तियां खरीदने में किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय होना बाकी है।
इसी मामले में रानू साहू के पति IAS जयप्रकाश मौर्य की भूमिका को ईओडब्ल्यू ने कोयला लेवी से आगे आयरन पैलेट परिवहन से जुड़ी वसूली के मामले से भी जोड़ा है।
ताजा चालान के मुताबिक मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल करीब एक करोड़ रुपए दर्ज होने का दावा किया गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार जांच में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग से जुड़े मामलों में संपर्क रखने और अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग की भूमिका सामने आई।
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि पैलेट उद्योग से जुड़े कारोबारियों को 100 रुपए प्रति टन की राशि सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई। यह दावा भी जांच एजेंसी की चार्जशीट का हिस्सा है।
पूरे मामले को देखें तो EOW की जांच में इस परिवार से जुड़े आरोपों की तीन अलग कड़ियां दिखाई देती हैं। रानू साहू पर कोयला लेवी से रकम हासिल करने और उसे संपत्तियों में लगाने से जुड़े आरोप पहले से जांच का हिस्सा रहे हैं। जयप्रकाश मौर्य के खिलाफ ताजा चालान में नकद लेन-देन और खनिज विभाग से जुड़े मामलों में भूमिका का उल्लेख है। वहीं पीयूष साहू पर लेवी की रकम को परिवार के सदस्यों के नाम संपत्तियों में निवेश कराने का आरोप लगाया गया है।
इस तरह जांच एजेंसी की कहानी में कमाई से लेकर निवेश तक की कड़ी सामने आती है जहां एक तरफ लेवी और नकद लेन-देन हैं, तो दूसरी तरफ जमीन और अन्य संपत्तियों में निवेश का विवरण है।हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ईओडब्ल्यू की चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। आरोपों पर अदालत में सुनवाई होगी और संबंधित आरोपियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है। अंतिम दोषसिद्धि या निर्दोषता का फैसला न्यायालय ही करेगा।
FAQs
एक तरफ लेवी, दूसरी तरफ संपत्तियों में निवेश:
ईओडब्ल्यू ने लेन-देन में पीयूष और परिवार के सदस्यों के बैंक खातों के इस्तेमाल की बात भी कही है। यानी जांच का एक महत्वपूर्ण एंगल यह है कि कथित तौर पर हासिल रकम को सीधे अपने पास रखने के बजाय परिवार और रिश्तेदारों के नाम संपत्तियों में लगाने का रास्ता अपनाया गया। इसी वजह से पीयूष साहू की भूमिका जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण मानी गई।
पीयूष पहले भी जांच के दायरे में :
जयप्रकाश मौर्य की भूमिका अलग कड़ी में:
ताजा चालान के मुताबिक मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल करीब एक करोड़ रुपए दर्ज होने का दावा किया गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार जांच में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग से जुड़े मामलों में संपर्क रखने और अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग की भूमिका सामने आई।
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि पैलेट उद्योग से जुड़े कारोबारियों को 100 रुपए प्रति टन की राशि सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई। यह दावा भी जांच एजेंसी की चार्जशीट का हिस्सा है।
पति-पत्नी और भाई की अलग-अलग भूमिका:
कमाई से निवेश तक :
FAQs
- छत्तीसगढ़ कोल लेवी मामला क्या है?
छत्तीसगढ़ का कोल लेवी मामला कथित अवैध वसूली, नकद लेन-देन और इस रकम के निवेश से जुड़ी जांच का मामला है, जिसमें EOW और अन्य जांच एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं। - कोल लेवी मामले में रानू साहू कौन हैं?
रानू साहू छत्तीसगढ़ कैडर की निलंबित IAS अधिकारी हैं। कोल लेवी मामले में उनकी भूमिका को लेकर EOW और ED की जांच चल चुकी है। - क्या कोल लेवी घोटाले में आरोप साबित हो चुके हैं?
नहीं। EOW की चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं। आरोप साबित या खारिज करने का अंतिम फैसला अदालत करेगी।
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