पूरे मध्यप्रदेश में धूमधाम से मनाया गया विजयादशमी का पर्व, बदनावर की ब्रह्मोस मिसाइल ने खींचा सबका ध्यान
Vijayadashami, Ravan Dahan: देश के साथ-साथ पूरे मध्यप्रदेश में कल ( 2 अक्टूबर, 2025) विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। राजधानी भोपाल से लेकर इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर और नर्मदापुरम समेत प्रदेश के गांव-गांव और शहर-शहर में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया।
राजधानी भोपाल में दिखा सबसे ऊंचा रावण
भोपाल इस वर्ष विजयादशमी के जश्न का प्रमुख केंद्र रहा, जहां कोलार के बंजारी दशहरा मैदान में प्रदेश का सबसे ऊंचा, 105 फीट का रावण का पुतला बनाया गया था।
कोलार में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग रावण दहन देखने पहुंचे। पुतले के दहन से पहले जमकर रंगारंग आतिशबाजी भी की गई, जिसने आसमान को जगमग कर दिया।
इसके अलावा, भोपाल में ही टीटी नगर और छोला दशहरा मैदान में भी रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का पारंपरिक तरीके से दहन किया गया।
खरगोन, खंडवा और नर्मदापुरम समेत कई अन्य शहरों में भी शानदार आतिशबाजी के बीच रावण दहन हुआ और भगवान श्रीराम की शोभायात्रा भी निकाली गई।
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उज्जैन में तेज हवाओं से गिरा पुतला
उज्जैन में रावण दहन का कार्यक्रम तेज हवाओं के चलते प्रभावित हुआ। रावण का पुतला दहन से पहले ही तेज आंधी से नीचे गिर गया। इस घटना में एक कर्मचारी भी घायल हो गया।
हालांकि, आयोजकों ने हार नहीं मानी और गिरे हुए पुतले का ही दहन किया गया। यह घटना आयोजन की चुनौतियों और विपरीत परिस्थितियों में भी परंपरा को बनाए रखने के संकल्प को दर्शाती है।
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रतलाम में जला अधूरा रावण का पुतला
वहीं, रतलाम में रावण दहन का अनुभव लोगों के लिए निराशाजनक रहा, जहां रावण का पुतला अधूरा जला। पुतले का नीचे का हिस्सा तो जल गया लेकिन उसका धड़ खड़ा रह गया।
बाद में क्रेन की मदद से पुतले पर पेट्रोल डालकर उसे जलाने का प्रयास किया गया, लेकिन केवल चेहरा ही जल सका और बाकी हिस्सा नहीं जला।
बदनावर 71 फीट ऊंचा पुतला, जिसे ब्रह्मोस मिसाइल से दहन किया गया। इस बार का रावण पाकिस्तान के खिलाफ बनाया गया था। पुतले पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेनाध्यक्ष असीम मुनीर का फोटो भी लगाया गया था। ये रावण पूरे मालवा में चर्चा का विषय बना रहा।
विजयादशमी पर सुरक्षा व्यवस्था
बता दें कि, पूरे प्रदेश में रावण दहन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। लाखों लोगों ने इस पर्व में हिस्सा लिया।
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