विजय शाह मामले की SC में सुनवाई, कोर्ट ने SIT को जांच के लिए दिया वक्त, नहीं होगी मंत्री की गिरफ्तारी
Manya Jain | May 28, 2025, 13:46 IST
Vijay Shah-Colonel Sophia case
सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ विवादित बयान मामले की जांच के लिए SIT को समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ दिए गए विवादित बयान मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) को समय दिया है।
इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी। मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया के सामने पाकिस्तान पर भारतीय सेना की कार्रवाई की जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद यह मामला गंभीर हो गया।
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका मिला था। कोर्ट ने विजय शाह के माफीनामे को खारिज करते हुए मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने के आदेश दिए थे।
हालांकि मंत्री विजय शाह को गिरफ्तारी से राहत दी गई थी। कोर्ट की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी भी गौर करने वाली थी। पहले हाईकोर्ट की फटकार और सुप्रीम कोर्ट के अविश्वास से मध्य प्रदेश के अफसरों की जांच पर सवालिया निशान लग गया था।
मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया के सामने पाकिस्तान पर भारतीय सेना की कार्रवाई की जानकारी देने वाली सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान दिया था।
इस बयान के बाद विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी थी। मामले में हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने के बाद FIR दर्ज हई।
सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह के माफीनामे को खारिज करते हुए कहा था कि "इस मामले में झूठे आंसू दिखाकर मंत्री को माफी नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने SIT बनाने के आदेश दिए हैं ,इस SIT में तीन IPS अधिकारी, जिनमें एक IG और बाकी दो SP लेवल के अफसरों को शामिल किया गया था। इनमें एक अधिकारी महिला को अनिवार्य रूप से शामिल करने के आदेश दिए गए थे। साथ ही यह भी साफ किया गया था कि सभी अफसर मध्य प्रदेश कैडर के हो सकते हैं, लेकिन राज्य के मूल निवासी नहीं होने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच के लिए बनी SIT इस मामले पर बारीकी से जांच करेगी। इस एसआईटी में मध्य प्रदेश कैडर का अधिकारी हो सकता है लेकिन वह एमपी का मूल निवासी न हो। कोर्ट की यह टिप्पणी कई मामलों में महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस पूरे मामले के दौरान एमपी पुलिस ने कई लूप छोड़े।
हाईकोर्ट के आदेश पर जब पुलिस ने FIR दर्ज की तो इसके अगले ही दिन सुनवाई में एमपी हाईकोर्ट ने कहा था कि FIR में धाराओं के अनुसार "एक्शन ऑफ सस्पेक्ट" की क्लिएरिटी नहीं है।
एफआईआर को ऐसा बनाया गया ताकि आसानी से रद्द की जा सके। कोर्ट ने FIR की भाषा पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा था कि मंत्री के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 के तहत अपराध बनता है, जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों को अपराध घोषित करता है।
कोर्ट ने ये भी कहा था कि MP पुलिस ने मंत्री विजय शाह के सम्मान का भी पूरा ख्याल रखा है। पुलिस ने अपनी एफआईआर में दो-दो बार 'श्री' लिखा है। ऐसे में कांग्रेस पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है। साथ ही कहा है था कि 24 घंटे से अधिक वक्त एफआईआर के बीत गए लेकिन उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है।
पुलिस ने मंत्री विजय शाह के बयान के मामले में जांच को तेज़ नहीं किया था। बयान का वीडियो 6 दिन बाद जब्त किया गया था, लेकिन उसे फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया था।
इसके अलावा, मंच पर मौजूद जिम्मेदार व्यक्तियों से पूछताछ भी शुरू नहीं हुई थी। पुलिस ने केवल छापरिया के सरपंच और सचिव को बयान के लिए तलब किया था। पुलिस ने कहा कि मामला कोर्ट से जुड़ा हुआ था, इसलिए जांच की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
एसआईटी ने इस मामले की जांच की और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की। कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच हुई और दोषी को सजा दिलाने की कोशिश की गई।
5 प्रमुख बिंदुओं में खबर समझिए
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इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी। मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया के सामने पाकिस्तान पर भारतीय सेना की कार्रवाई की जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद यह मामला गंभीर हो गया।
SIT गठन को मिले थे आदेश
हालांकि मंत्री विजय शाह को गिरफ्तारी से राहत दी गई थी। कोर्ट की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी भी गौर करने वाली थी। पहले हाईकोर्ट की फटकार और सुप्रीम कोर्ट के अविश्वास से मध्य प्रदेश के अफसरों की जांच पर सवालिया निशान लग गया था।
क्या है मामला?
इस बयान के बाद विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी थी। मामले में हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने के बाद FIR दर्ज हई।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
MP पुलिस पर भरोसा कम होने के ये हो सकते हैं कारण
मामले की कमजोर FIR
एफआईआर को ऐसा बनाया गया ताकि आसानी से रद्द की जा सके। कोर्ट ने FIR की भाषा पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा था कि मंत्री के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 के तहत अपराध बनता है, जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों को अपराध घोषित करता है।
FIR में श्री शब्द का उपयोग
जांच में देरी हुई और जानकारी देने से इनकार किया गया
इसके अलावा, मंच पर मौजूद जिम्मेदार व्यक्तियों से पूछताछ भी शुरू नहीं हुई थी। पुलिस ने केवल छापरिया के सरपंच और सचिव को बयान के लिए तलब किया था। पुलिस ने कहा कि मामला कोर्ट से जुड़ा हुआ था, इसलिए जांच की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
अब क्या हुआ?
5 प्रमुख बिंदुओं में खबर समझिए
- सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह के माफीनामे को खारिज कर दिया था।
- कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाने के आदेश दिए थे।
- एसआईटी में तीन आईपीएस अधिकारी थे, जिनमें एक आईजी और दो एसपी स्तर के अधिकारी शामिल थे।
- सभी अधिकारी मध्य प्रदेश कैडर के थे, लेकिन राज्य के मूल निवासी नहीं थे।
- एमपी के अधिकारियों पर भरोसा कम होने के कई कारण थे।
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