एमपी में रोज 3 हजार लोग सर्दी-जुकाम और बुखार से परेशान, मन मर्जी से खा रहे पेनकिलर, हो रही ये समस्या...
Aman Vaishnav | Oct 21, 2026, 11:39 IST
एमपी में वायरल फीवर का प्रकोप: दर्द-बुखार में खुद से पेनकिलर और एंटीबायोटिक लेना पड़ रहा भारी, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
मध्य प्रदेश के अस्पतालों में रोजाना लगभग 3 हजार मरीज सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। जल्दी आराम पाने के लिए कई लोग डॉक्टर को दिखाए बिना ही पेनकिलर और एंटीबायोटिक दवाएं लेने लगते हैं। बिना जांच के बार-बार दर्द की दवा खाने से किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है। साथ ही क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ सकता है। आइए इसे विस्तार से जानते हैं...
एमपी के प्रमुख शहरों में ओपीडी का हाल
भोपाल के जेपी अस्पताल , हमीदिया अस्पताल , जिला अस्पतालों और निजी क्लिनिकों में रोजाना सर्दी-जुकाम और बुखार के करीब 600 मरीज पहुंच रहे हैं। इंदौर और जबलपुर में भी रोजाना करीब 500-500 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं।
वहीं ग्वालियर में करीब 200 और उज्जैन में 150 मरीज रोजाना सामने आ रहे हैं। इस तरह पूरे मध्य प्रदेश में हर दिन करीब 3 हजार लोग सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
दर्द और बुखार में खुद से दवा लेना खतरनाक?
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने भी एक बात साफ कही है। पेनकिलर और एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल पूरी समझदारी और नियमों के साथ ही होना चाहिए।
- किडनी पर सीधा वार: पेनकिलर की कुछ दवाएं किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।
- दवाइयों का बेअसर होना: बिना वजह एंटीबायोटिक खाने से शरीर में मौजूद बैक्टीरिया उनके आदी हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि भविष्य में जब वाकई कोई गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है, तब ये दवाएं शरीर पर काम करना बंद कर देती हैं।
डॉक्टर के पास आने से पहले खुद लेते हैं दवा
समन ताहिर के मुताबिक दवाओं से कुछ समय के लिए लक्षण दब जाते हैं। गलत दवा या गलत डोज लेने से शरीर को नुकसान पहुंच सकता है। डॉ. ताहिर के क्लिनिकल अनुभव के मुताबिक, ऐसे मरीजों में से 60 से 70% लोगों में दवाओं से जुड़ी कोई न कोई गड़बड़ी या परेशानी देखने को मिली है।
वहीं ऑर्थो स्पाइन एंड स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञेश सक्सेना का भी यही कहना है। पहले उनकी ओपीडी में सिर्फ 10% मरीज खुद दवा खाकर आते थे। अब यह संख्या बढ़कर 80% तक पहुंच चुकी है। लोग दर्द की मूल वजह जाने बिना हफ्तों और महीनों तक पेनकिलर खाते रहते हैं।
लापरवाही से बिगड़ी सेहत
साथ ही उसकी किडनी की रिपोर्ट भी बिगड़ी हुई थी। अब डॉक्टरों को बीमारी का इलाज करने के साथ-साथ उसकी किडनी को ठीक करने पर भी ध्यान देना पड़ रहा है।
सिरदर्द समझा, गर्दन की नस की दिक्कत निकली
लगातार दवाएं खाने की वजह से उस मरीज का भी क्रिएटिनिन बढ़ गया। साथ ही किडनी की समस्या सामने आ गई। इसके बाद डॉक्टर ने गर्दन की नस का सही उपचार किया। मांसपेशियों को मजबूत करने की एक्सरसाइज पर जोर दिया।
गूगल और सोशल मीडिया रील देखकर दवा खाना कितना सही?
- हर मरीज की शारीरिक स्थिति, उसकी पुरानी बीमारियां और किडनी की सेहत अलग होती है।
- जो दवा या एक्सरसाइज किसी एक व्यक्ति को फायदा पहुंचा रही है, जरूरी नहीं कि वह आपके लिए भी सुरक्षित हो।
- पुरानी पर्ची देखकर दोबारा वही दवा शुरू करना या घर के किसी दूसरे सदस्य की दवा खाना नुकसानदेह हो सकता है।
- दर्द को सिर्फ दबाने के बजाय उसकी जड़ तक पहुंचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर टहलना, हल्की एक्सरसाइज, मांसपेशियों की मजबूती और सही खानपान से भी राहत मिलती है। यह सब डॉक्टर की सलाह से ही होना चाहिए।
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