कागजों में हर घर जल पूरा, फिर पानी के लिए सड़कों पर क्यों उतरी जनता?
मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी ने तापमान और जल संकट दोनों बढ़ा दिए हैं। इंदौर और रतलाम में पानी के लिए प्रदर्शन हो रहे हैं। सरकार ने अचानक पेयजल अमले की छुट्टियां रद्द कर दीं। सवाल यह है कि हालात नियंत्रण में हैं तो आपातकाल जैसी तैयारी क्यों? नौ जिलों को तकनीकी रूप से हर घर जल के लिए तैयार बताया गया था। वे पिछले पांच महीने से अंतिम मुहर का इंतजार कर रहे हैं। फाइलें आगे नहीं बढ़ रहीं। मैदान में पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि फील्ड सत्यापन और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी इन जिलों को हर घर जल प्रमाणित क्यों नहीं किया गया। क्या सरकार जमीनी हकीकत से बच रही है या सिस्टम अपने दावों पर भरोसा नहीं कर पा रहा है।
घरों तक नल कनेक्शन पहुंचे!
उज्जैन संभाग के सात जिले और इंदौर व अशोकनगर तकनीकी रूप से तैयार माने गए हैं। दावा है कि यहां शत-प्रतिशत घरों तक नल कनेक्शन पहुंच चुके हैं। इन जिलों में जल संकट की शिकायतें लगातार आ रही हैं। यही विरोधाभास सबसे बड़ा सवाल बन गया है। अगर हर घर तक पानी पहुंच चुका है तो लोग टैंकर और सप्लाई टाइमिंग पर क्यों निर्भर हैं। पानी नियमित नहीं पहुंच रहा तो हर घर जल मॉडल जमीन पर कितना सफल है।
दिलचस्प बात यह है कि जल जीवन मिशन को शुरू हुए लगभग सात साल होने वाले हैं। लेकिन मध्यप्रदेश अब तक सिर्फ दो जिलों बुरहानपुर और निवाड़ी को ही पूरी तरह हर घर जल प्रमाणित घोषित कर पाया है। मोहन सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में एक भी नया जिला इस सूची में नहीं जुड़ सका।
एकल नल-जल योजनाएं लगभग पूरी
इधर सरकार दावा कर रही है कि प्रदेश में 28 हजार से ज्यादा एकल नल-जल योजनाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं। वहीं 147 समूह नल-जल योजनाओं में करीब 70 प्रतिशत काम पूरा होने की बात कही जा रही है। लेकिन सवाल वही अगर योजनाएं पूरी हैं, तो पानी का संकट क्यों गहराता जा रहा है?
नल-जल योजनाओं का जिम्मा ग्राम पंचायतों को
सरकार ने अब गांवों में नल-जल योजनाओं का जिम्मा ग्राम पंचायतों को सौंप दिया है। यानी पाइपलाइन से लेकर सप्लाई और शुल्क वसूली तक सब कुछ पंचायतें संभालेंगी। लेकिन कई पंचायतों के पास न तकनीकी स्टाफ है और न ही स्थायी संसाधन। ऐसे में डर यह है कि करोड़ों की योजनाएं कहीं रखरखाव के अभाव में दम न तोड़ दें।
सरकार पर दबाव यह है कि वह आंकड़ों के बजाय जमीन पर हर घर जल साबित करे। फाइलों में प्रमाणित जिले और सड़कों पर पानी मांगते लोग दोनों तस्वीरें एक साथ ज्यादा दिन तक नहीं रह सकतीं। प्रमुख सचिव पीएचई आईएएस मनीष सिंह से हर घर जल प्रमाणित घोषणा में देरी पर सवाल किया गया। उन्होंने जवाब देने से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि इस विषय पर स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि विभाग में नल-जल योजना की हजारों स्कीमें संचालित हो रही हैं। हर योजना की स्थिति अलग है।
क्या बोले प्रमुख सचिव?
प्रमुख सचिव ने कहा कि फील्ड में जाकर खुद पता कर लीजिए। पीएचई में करीब 28 हजार योजनाएं चल रही हैं। मैं हर एक योजना पर कुछ नहीं कह सकता। उज्जैन संभाग, इंदौर और अशोकनगर में सत्यापन और टेस्टिंग पूरी होने के बावजूद हर घर जल प्रमाणित घोषणा नहीं हुई। प्रमुख सचिव का यह जवाब विभागीय तैयारियों और दावों पर सवाल खड़ा कर रहा है।
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