आचार्य सुनील सागर महाराज-Gen-Z के साथ गलत व्यवहार हुआ, कलश बोली में दिखावा ज्यादा

Sanjay Gupta | Aug 02, 2026, 15:20 IST
muni sunil sagar ji on delhi genz protest
चतुर्थ पट्टाधीश आचार्यश्री 108 सुनील सागर जी महाराज ने इंदौर में जेन-जी के आंदोलन पर अपनी बात रखी। साथ ही इंदौर कलश स्थापना में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के चार्तुमास आयोजन में आई 53 करोड़ की बोली पर कहा कि आजकल बोली के नाम पर दिखावा ज्यादा हो रहा है।

दिल्ली जंतर-मंतर पर हुए जेन-जी आंदोलन को लेकर अब चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज के विचार सामने आए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें सुना जाना चाहिए था। कठोरता से उन्हें नहीं बदला जा सकता है। उनके साथ गलत व्यवहार किया गया। वहीं 53 करोड़ की कलश बोली पर भी अपने विचार रखे।



जेन जी को मोबइल के भरोसे नहीं छोड़ सकते

आचार्यजी ने कहा कि जेन-जी को मार्गदर्शन की बहुत जरूर है। खासकर 13 से 19 साल की उम्र में। इस दौरान खासा ध्यान देना चाहिए। यह गर्म लोहे की तरह का है जैसे ढालो वैसे ढल जाएंगे। उन्हें कठोरता से नहीं बदला जा सकता है, अपनेपन और प्रेम की जरूरत है। उन्हें मोबाइल और उन्हीं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है।



सरकार को उन्हें सुनना चाहिए

आचार्यजी ने दिल्ली के आंदोलन पर कहा कि बच्चे क्या कर सकते थे, वह बार-बार ठोकर खा रहे थे, उन्होंने कोई हथियार तो नहीं उठाया, किसी को मारा नहीं। वह तो संसद तक पहुंचना चाहते थे अपनी बात रखना चाहते थे। आंदोलन करना और अपनी बात रखना अधिकार है। बात सुन लेते तो वह आंदोलित नहीं होते। उनके साथ जो व्यवहार हुआ वह अच्छा नहीं हुआ।



उनकी बात को सुना जाना चाहिए। सरकार को टीम बनाकर उनकी बात को गंभीरता से सुनना चाहिए। इससे प्रतिभाएं संकुचित नहीं होगी। अच्छा है सरकार ने कदम उठाएं और इससे अविश्वास का मामला नहीं होगा और बच्चे बहुत आंदोलित नहीं होंगे।



कलश स्थापना में बोली पर क्या बोले आचार्य

मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के चातुर्मास कार्यक्रम में कलश स्थापना को लेकर सामने आई 53 करोड़ की बोली वाले मामले पर भी आचार्य ने विचार रखे।



उन्होंने कहा कि कलश स्थापना की पहले कभी बात नहीं थी लेकिन सालों पहले लोगों ने विचार किया कि तपस्वी आते हैं तो बड़ा आयोजन होना चाहिए, फिर इसका खर्चा कैसे आएगा तो मंगल कलश स्थापना का विचार आया। यह मंगल का प्रतीक है। बोली लगाकर कलश लेने का काम काफी बाद में शुरु हुआ और फिर इतना बड़ा हो गया कि अब इसे संभालना मुश्किल हो गया है।



आई राशि का सदुपयोग हो

आचार्य जी ने कहा कि मंगल कलश स्थापना होती है और धन निकालते हैं। यह राशि आयोजन के भोजन के साथ ही शिक्षण आदि काम में खर्च होती है। जो रूप अब बनता जा रहा है वह उचित नहीं लग रहा दिखावा ज्यादा लग रहा है।



आचार्य ने 53 करोड़ की बोली पर कहा कि संभव है कि उनके लक्ष्य बड़े हो, मेडिकल कॉलेज आदि बनाना हो। इसलिए लोगों ने हिम्मत की हो। मुझे इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है। लेकिन यदि सदुपयोग हो रहा है तो अच्छी बात है।



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