NEET पेपर लीक: CM हाउस घेराव के दौरान NSUI कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज, राजनीति से गरमाई बहस
NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच राजधानी भोपाल में छात्र राजनीति सड़क पर उतर आई। मुख्यमंत्री निवास के घेराव के लिए निकले NSUI कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और लाठीचार्ज का सहारा लिया।
इस कार्रवाई में NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को पुलिस ने हिरासत में लिया। घटना के बाद सरकार की कार्यशैली, परीक्षा प्रणाली और विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके पर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया
NEET पेपर लीक के विरोध में NSUI ने सीएम हाउस घेराव किया। भोपाल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। हालात बिगड़ने पर लाठीचार्ज किया गया।
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार गंभीर रूप से घायल हुए। उन्हें सिद्धांत अस्पताल में भर्ती कराया गया। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को पुलिस ने हिरासत में लिया। कांग्रेस ने सरकार पर छात्र आवाज दबाने का आरोप लगाया। घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया।
CM हाउस तक पहुंचने की कोशिश
नीट पेपर लीक को लेकर विरोध दर्ज कराने के लिए NSUI कार्यकर्ता मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच कर रहे थे। प्रशासन ने पहले से बैरिकेडिंग कर रखी थी और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।
लाठीचार्ज के बाद मची अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पहले पानी की तेज बौछारें छोड़ी गईं। इसके बावजूद जब भीड़ आगे बढ़ती रही तो पुलिस ने बल प्रयोग किया। लाठीचार्ज के दौरान कई कार्यकर्ता घायल हुए।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी पहुंचे
आंदोलन को समर्थन देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी मौके पर पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। दिग्विजय सिंह की हिरासत के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बताया, जबकि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता का हवाला दिया।
आंदोलन दबाने से नहीं थमेगा आक्रोश
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार का रवैया कई सवाल खड़े करता है। उनके मुताबिक छात्र और युवाओं की मांगों को बल प्रयोग से दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर युवाओं में पहले से नाराजगी है। यदि सरकार संवाद के बजाय सख्ती का रास्ता अपनाएगी तो असंतोष और बढ़ सकता है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश में परीक्षा संबंधी विवाद, युवाओं की समस्याएं और विभिन्न जनहित के मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इन मुद्दों पर प्रभावी जवाब देने के बजाय विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में अधिक सक्रिय दिखाई दे रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सवाल सिर्फ एक प्रदर्शन का नहीं
भोपाल में हुई यह घटना केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। NEET पेपर लीक जैसे मामलों ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
ऐसे में भोपाल का यह घटनाक्रम इस बहस को और तेज कर रहा है कि युवाओं की नाराजगी को राजनीतिक मुद्दा मानकर टाला जाएगा या फिर परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।
क्या संदेश जाएगा नए मतदाताओं तक?
मध्य प्रदेश की राजनीति में युवा मतदाता एक बड़ा वर्ग बन चुके हैं। ऐसे समय में छात्र आंदोलनों, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक टकराव की तस्वीरें सीधे युवाओं तक पहुंच रही हैं।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष दोनों इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और क्या इससे युवाओं के बीच बनने वाली राजनीतिक धारणा पर असर पड़ता है।
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