मप्र चुनाव में माल बचाने कमाल का खर्च दिखा रहे नेताजी, भटे के भाव मिली फार्च्यूनर, 300 लोगों ने 3 हजार में कर लिया चाय-नाश्ता
Jitendra Shrivastava | Nov 16, 2023, 24:00 IST
मप्र चुनाव में माल बचाने कमाल का खर्च दिखा रहे नेताजी, भटे के भाव मिली फार्च्यूनर, 300 लोगों ने 3 हजार में कर लिया चाय-नाश्ता
उम्मीदवारों ने नहले पर दहला मारते हुए आयोग को अपनी कमाई इतनी कम दिखा दी कि जिसको देखकर किसी को भी हैरानी हो सकती है।
नील कमल तिवारी, JABALPUR/BHOPAL. चुनाव आयोग ने चुनाव में कालेधन का उपयोग और बेहिसाब खर्च पर रोक लगाने के लिए एक उम्मीदवार के लिए खर्च की सीमा 40 लाख रुपए की है। उम्मीदवारों ने नहले पर दहला मारते हुए अपनी कमाई इतनी कम दिखा दी कि जिसको देखकर किसी को भी हैरानी हो सकती है। किसी ने 9 लाख में तो किसी ने 13 लाख में पूरा चुनाव लड़ लिया। इस खर्च में डेढ़ महीने का पूरा प्रचार,खाना-पीना और वाहनों का उपयोग शामिल है। उम्मीदवारों को महज एक हजार रुपए दिन में प्रचार के लिए फार्च्यूनर गाड़ी मिल गई तो महज तीन हजार में तीन सौ लोगों को टेंट लगाकर कुर्सी पर बैठा दिया और चाय-नाश्ता भी करा दिया। ये आंकड़े इसलिए मुंह चिढ़ा रहे हैं क्योंकि चुनाव आयोग ने 300 करोड़ से ज्यादा की तो शराब,कैश और साड़ी, कंबल जब्त किए हैं।
जबलपुर के 31 उम्मीदवारों ने दिया चुनावी खर्च का ब्यौरा
इस चुनाव में उम्मीदवारों ने इतनी कमाल की मितव्ययिता अपनाई है कि कोई भी दांतों तले उंगली दबा लेगा। उदाहरण के लिए हम आपको जबलपुर के उम्मीदवारों के खर्च का ब्यौरा बता रहे हैं। जबलपुर के 31 उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग में अपने चुनावी खर्च का ब्यौरा जमा किया है। 'द सूत्र' को मिले इस ब्यौरे के अनुसार उम्मीदवारों ने खर्च की तय सीमा 40 लाख की आधी राशि से कम में पूरा चुनाव लड़ लिया। कुछ आंकड़े ऐसे भी सामने आए हैं जिन्हे देखकर लगा कि महंगाई गायब हो चुकी है और खाने-पीने से लेकर किराए पर लग्जरी गाड़ियां भी भटे के भाव मिल रही हैं।
उम्मीदवारों ने तय सीमा से आधे में ही लड़ लिया चुनाव
एक प्रत्याशी ऐसा भी है जिसे फॉर्च्यूनर, क्रेटा जैसी कारें मात्र 1 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मिल गईं। आमतौर पर इन गाड़ियों का प्रतिदिन का किराया छह से सात हजार होता है। पनागर से प्रत्याशी राजेश पटेल के दिए ब्योरे के अनुसार उन्होंने फॉर्च्यूनर और क्रेटा कार का किराया 1 हजार रुपए प्रतिदिन दिया है तो बोलेरो कार का मात्र 800 रुपए प्रतिदिन। जबलपुर पश्चिम से बीजेपी प्रत्याशी अभिलाष पांडे ने 1790 प्रतिदिन के किराए से ई-रिक्शा खर्च दिखाया है।
अन्य विधानसभाओं में किसने कितना किया खर्च...
जबलपुर केंटः
खर्च के ब्यौरे पर हैरानी होना या सवाल उठना लाजमी
ये तो था उम्मीदवारों का दिखाया चुनाव खर्च, लेकिन इस खर्च के ब्यौरे पर हैरानी होना या सवाल उठना लाजमी है। क्योंकि इस चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव आयोग ने तीन सौ करोड़ से ज्यादा की शराब,नकदी और अन्य सामग्री जब्त की है। जानकार कहते हैं कि चुनाव आयोग के हत्थे चढ़ी ये सामग्री तो महज कुछ फीसदी होती है, जबकि हकीकत में खर्च होने वाला आंकड़ा तो इससे कई गुना ज्यादा होता है।
चुनाव आयोग ने जब्त की ये सामग्री...
जानकार कहते हैं कि चुनाव में एक उम्मीदवार कम से कम दो से तीन करोड़ खर्च करता है। चुनाव आयोग की कार्यवाही से बचने के लिए तय लिमिट 40 लाख से कम का खर्च नेता दिखाते हैं। वे चुनाव खर्च बताने में पूरी बाजीगरी करते हैं। क्योंकि आज के दौर में इतने कम में चुनाव लड़ना संभव नहीं है। वहीं यदि ये उम्मीवार तय लिमिट से ज्यादा खर्च दिखाते हैं तो उन पर अयोग्य घोषित होने का खतरा रहेगा। यही कारण है कि उम्मीदवार ऐसे कई तरीके अपनाते हैं जिससे चुनाव खर्च कम दिखाया जा सके।
जबलपुर के 31 उम्मीदवारों ने दिया चुनावी खर्च का ब्यौरा
इस चुनाव में उम्मीदवारों ने इतनी कमाल की मितव्ययिता अपनाई है कि कोई भी दांतों तले उंगली दबा लेगा। उदाहरण के लिए हम आपको जबलपुर के उम्मीदवारों के खर्च का ब्यौरा बता रहे हैं। जबलपुर के 31 उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग में अपने चुनावी खर्च का ब्यौरा जमा किया है। 'द सूत्र' को मिले इस ब्यौरे के अनुसार उम्मीदवारों ने खर्च की तय सीमा 40 लाख की आधी राशि से कम में पूरा चुनाव लड़ लिया। कुछ आंकड़े ऐसे भी सामने आए हैं जिन्हे देखकर लगा कि महंगाई गायब हो चुकी है और खाने-पीने से लेकर किराए पर लग्जरी गाड़ियां भी भटे के भाव मिल रही हैं।
उम्मीदवारों ने तय सीमा से आधे में ही लड़ लिया चुनाव
- कांग्रेस उम्मीदवार लखन घनघोरिया ने पूरे चुनाव में 13 लाख 86 हजार 520 रुपए ही खर्च किए। चुनावी कार्यालय के उद्घाटन में टेंट लगाया, 300 लोग मौजूद रहे जिनको चाय-नाश्ता कराया गया, लेकिन इस पर महज 3 हजार रुपए खर्च हुए।
- बीजेपी उम्मीदवार अंचल सोनकर ने 9 लाख 84 हजार 550 रुपए का चुनाव खर्च दिखाया। वाहनों का ब्यौरा नहीं दिया, लेकिन उन पर सिर्फ दस हजार रुपए का डीजल ही डलवाया गया।
- एआईएमआईएम पार्टी के गजेन्द्र सोनकर ‘‘गज्जूस’’ ने पूरे चुनाव में सिर्फ 83 हजार 546 रुपए खर्च किए।
- उम्मीदवार विष्णुव मलिक ने 21 हजार 115 रुपए में पूरा चुनाव लड़ लिया।
- बीजेपी इंदु तिवारी ने अपने बेटे और पत्नी की कारों का भी 3 हजार रु खर्च और 300 रु ड्राइवर का खर्च दिखाया है।
एक प्रत्याशी ऐसा भी है जिसे फॉर्च्यूनर, क्रेटा जैसी कारें मात्र 1 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मिल गईं। आमतौर पर इन गाड़ियों का प्रतिदिन का किराया छह से सात हजार होता है। पनागर से प्रत्याशी राजेश पटेल के दिए ब्योरे के अनुसार उन्होंने फॉर्च्यूनर और क्रेटा कार का किराया 1 हजार रुपए प्रतिदिन दिया है तो बोलेरो कार का मात्र 800 रुपए प्रतिदिन। जबलपुर पश्चिम से बीजेपी प्रत्याशी अभिलाष पांडे ने 1790 प्रतिदिन के किराए से ई-रिक्शा खर्च दिखाया है।
अन्य विधानसभाओं में किसने कितना किया खर्च...
जबलपुर केंटः
- अभिषेक चिंटू चौकसे- 5 लाख 61 हजार 782 रुपए
- अशोक ईश्वरदास रोहाणी- 7 लाख 86 हजार 662 रुपए
- राजेश कुमार वर्मा- 3 लाख 74 हजार 353 रुपए
- इंजीनियर राजेश कुमार सिंह- 1 लाख 45 हजार 140 रुपए
- एडवोकेट अनिल रैदास- 58 हजार 107 रुपए
- देवेन्द्रन कुमार यादव- 41 हजार 100 रुपए
- धर्मेन्द्र कुमार तिवारी- 52 हजार 760 रुपए
- इंजीनियर राजीव कुमार गुप्ताा- 15 हजार 400 रुपए
- अजय कुमार मिश्रा- 54 हजार 705 रुपए
- अरूण गायकवाड़- 6 लाख 95 हजार 552 रुपए
- उमेश सिंह- 96 हजार 917 रुपए
- नितेश कुमार पांडे- 17 हजार 700 रुपए
- राजकुमार- 13 हजार 370 रुपए
- कांग्रेस के तरूण भनोत ने 12 लाख 65 हजार 514 रुपए में ही पूरा चुनाव लड़ लिया।
- बीजेपी के राकेश सिंह ने के भी महज 12 लाख 80 हजार 232 रुपए ही चुनाव में खर्च हुए।
- एड. दिनेश कुमार कुशवाहा- 25 हजार 50 रुपए
- पीयूष वर्मा- 11 हजार 440 रुपए
- ब्रम्हानंद बैरागी- 10 हजार 500 रुपए
- रमेश धार्वे- 16 हजार 820 रुपए
- राम प्रसाद कुशवाहा- 10 हजार 650 रुपए
- विष्णु कुमार जारोलिया- 10 हजार 450 रुपए
- कांग्रेस की एकता ठाकुर- 13 लाख 48 हजार 934 रुपए
- सुभाष सिंह मरकाम- 9 लाख 71 हजार 722 रुपए
- संतोष वरकड़े- 11 लाख 144 रुपए
- शिव प्रसाद धुर्वे- 1 लाख 87 हजार 590 रुपए
- मोहन सौंधिया- 21 हजार 100 रुपए
- डॉ. संजीव वरकड़े- 4 लाख 46 हजार 302 रुपए
खर्च के ब्यौरे पर हैरानी होना या सवाल उठना लाजमी
ये तो था उम्मीदवारों का दिखाया चुनाव खर्च, लेकिन इस खर्च के ब्यौरे पर हैरानी होना या सवाल उठना लाजमी है। क्योंकि इस चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव आयोग ने तीन सौ करोड़ से ज्यादा की शराब,नकदी और अन्य सामग्री जब्त की है। जानकार कहते हैं कि चुनाव आयोग के हत्थे चढ़ी ये सामग्री तो महज कुछ फीसदी होती है, जबकि हकीकत में खर्च होने वाला आंकड़ा तो इससे कई गुना ज्यादा होता है।
चुनाव आयोग ने जब्त की ये सामग्री...
- अवैध नगदी- 40 करोड़
- अवैध शराब- 64 करोड़
- अवैध सोना-चांदी- 93 करोड़
- अवैध मादक पदार्थ- 17 करोड़
- अन्य सामग्री- 122 करोड़
- कुल जब्ती- 336 करोड़
जानकार कहते हैं कि चुनाव में एक उम्मीदवार कम से कम दो से तीन करोड़ खर्च करता है। चुनाव आयोग की कार्यवाही से बचने के लिए तय लिमिट 40 लाख से कम का खर्च नेता दिखाते हैं। वे चुनाव खर्च बताने में पूरी बाजीगरी करते हैं। क्योंकि आज के दौर में इतने कम में चुनाव लड़ना संभव नहीं है। वहीं यदि ये उम्मीवार तय लिमिट से ज्यादा खर्च दिखाते हैं तो उन पर अयोग्य घोषित होने का खतरा रहेगा। यही कारण है कि उम्मीदवार ऐसे कई तरीके अपनाते हैं जिससे चुनाव खर्च कम दिखाया जा सके।
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