News Strike | शिवराज के गुस्से का असली निशाना कौन? अफसर या CM मोहन यादव, बुधनी से उठे कई सियासी सवाल
कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना- क्या शिवराज सिंह चौहान के ताजा बयान कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रहे हैं या..
बुधनी को बचाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। वही सीट जिससे वो बरसों-बरस तक रिकॉर्ड मतों से जीते और विधानसभा तक पहुंचे। सीएम रहते हुए भी शिवराज ने बुधनी को कभी पराया नहीं किया।
अब उसी बुधनी के अधिकारियों को शिवराज नरपिशाच कह रहे हैं। गुस्सा जता रहे हैं। ये हाल उस नेता का है जो लगातार 18 साल सूबे के सिंहासन पर राज कर चुका है। और अब उसी राज्य के अफसरों पर ऐसे गुस्सा उतारने पर मजबूर है जैसे तीन ही साल में अफसरों ने उन्हें बिसरा दिया हो।
शिवराज ने जमकर ऐसे अफसरों पर गुस्सा उतारा। लेकिन क्या ये नाराजगी वाकई अफसरशाही पर है या इशारा कुछ और, निशाना कहीं और है।
नमस्कार।
कभी पांव-पांव वाले भैया तो कभी लाड़ली बहनों के भाई
साल 2023 से पहले तक मध्यप्रदेश ने शिवराज सिंह चौहान के तमाम रंग देखे हैं। पांव-पांव वाले भैया तो जबरदस्त फेमस हुए। कभी वो गांव की किसी बुजुर्ग महिला से सिर पर हाथ रखवाकर आशीर्वाद लेते दिखे। तो कभी आम लोगों की तरह शॉपिंग की। कभी लाड़ली बहनों के भाई बने दिखे। कभी कन्याओं के पांव पखारकर उन्हें भोजन परोसते हुए नजर आए।
शिवराज ने मुख्यमंत्री रहते हुए अपनी छवि ऐसे मुखिया की बनाए रखने की कोशिश की जो मॉडेस्ट है। आम लोगों की चिंता करता है। खासतौर से महिलाओं और बच्चियों की। सीएम रहते हुए वो इस छवि को निभाने में भी काफी हद तक सफल हुए।
लेकिन अब जब से वो बुधनी और विदिशा के लिए एक सांसद भर रह गए हैं, तब से उनके कुछ नए रंग दिखाई देने लगे हैं। कभी वो गुस्से से भरे दिख रहे हैं तो कभी रोते हुए दर्द बांटने पर मजबूर हैं।
कुसमी गांव में बुलडोजर कार्रवाई से भड़के शिवराज
बुधनी के कुसमी गांव में जो कुछ हुआ, उससे शिवराज की एक अलग ही तस्वीर उभरकर आई है। इस गांव में कुछ आदिवासी घरों पर वन विभाग ने बुलडोजर चलाया।
अब ये मामला राजनीतिक तूल पकड़ रहा है। और फ्रंट पर आकर खेल रहे हैं शिवराज सिंह चौहान। जो अपनी प्रजा के हर सुख-दुख में शामिल होने की शपथ ले चुके हैं।
इस घटना के बाद वो खुद गांव पहुंचे और पीड़ितों का दुख-दर्द जाना। गांव में तबाही का जो मंजर दिखाई दिया, बताया जा रहा है कि उसे देखने के बाद खुद शिवराज सिंह चौहान अपना गुस्सा नहीं रोक सके। उन्होंने अफसरों को जमकर फटकार लगाई।
अफसरों को नरपिशाच कहा, सख्त कार्रवाई की मांग
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उनके क्षेत्र में अधिकारियों ने जुल्म और अन्याय की इंतहा कर दी। शिवराज ने बहुत ही जज्बाती अल्फाजों के साथ कहा कि सवेरे तक जो घर आबाद थे, जहां बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब बच्चों की चीखें गूंज रही हैं।
महिलाएं छाती पीट-पीटकर रो रही हैं। उनके घर गिरा दिए गए, फसलें दबा दी गईं। उन्होंने ये कार्रवाई करने वाले अफसरों को बेदिल और संवेदनाशून्य भी बताया।
गुस्से में शिवराज ने ऐसे अफसरों को नरपिशाच तक कहा। और ताकीद किया कि वो सारी स्थिति खुद सीएम मोहन यादव के सामने रखेंगे। ऐसे अफसरों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि कोई और नरपिशाच ऐसी घटना को अंजाम न दे सके।
इस नाराजगी के बाद उन्होंने खुद सीएम और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को फोन किया और सारी जानकारी दी।
क्या शिवराज को याद आ रहा है मुख्यमंत्री वाला दौर?
शिवराज बार-बार पीड़ितों का दर्द बांटते रहे और गले लगाते रहे। लेकिन जिस तरह शिवराज का दर्द फूटा, वो क्या वाकई सिर्फ आदिवासियों का हाल देखकर हो रहा था या शिवराज की कसक भी खुद-ब-खुद बाहर निकलकर आ रही थी।
खुद शिवराज सिंह चौहान ने ये बताया कि उन्होंने अधिकारियों को ताकीद किया था कि वो आदिवासियों को तंग न करें। लेकिन किसी अफसर ने उनकी बात नहीं सुनी।
इसमें कोई शक नहीं है कि जब अधिकारी उनकी बात अनसुनी कर रहे होंगे, तब जरूर शिवराज को अपना बीता दौर याद आया होगा। जब उनकी एक आवाज पर अफसरशाही एक कतार में खड़ी हो जाती थी।
अब वही अफसरशाही फोन पर फोन करने के बाद भी उनकी बात नहीं सुन रही है। वो भी उनकी अपनी कॉन्स्टिट्यूएंसी में। अफसोस होना तो लाजमी है।
अफसरों पर गुस्सा या मोहन सरकार की तरफ इशारा?
ऐसे में क्या शिवराज का गुस्सा मौजूदा सरकार पर नहीं फूटा होगा। पर मंझे हुए नेता हैं, इसलिए ये समझ ही गए होंगे कि डायरेक्ट कुछ कहा तो विपक्ष को मौका मिल जाएगा।
इसलिए अफसरों पर निशाना साधा कि उनकी हरकत की वजह से सीएम मोहन यादव बदनाम हो रहे हैं। क्या ये सीएम की तरफ शिवराज का कोई इशारा था।
ये पहला मौका नहीं है जब शिवराज का दर्द छलका हो या कोई पुरानी टीस नजर आई हो।
इससे पहले शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहनों को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनें गुस्सा हो गईं तो खैर नहीं है। ये बयान भी सीएम की तरफ ही निशाना माना गया।
कोर कमेटी में भी उन्होंने ये नाराजगी जाहिर की थी कि कलेक्टर-एसपी प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते हैं।
क्या तीन साल में कमजोर पड़ गया शिवराज का सियासी किला?
शिवराज को बार-बार नाराजगी जाहिर क्यों करनी पड़ रही है। क्या महज तीन साल में वो किला ध्वस्त हो चुका है जो प्रदेश में पूरे 18 साल में उन्होंने तैयार किया था।
प्रदेश में शिवराज के किले को कमजोर करने के बाद क्या उनकी अपनी सीट पर भी उनकी जड़ें कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
शिवराज इन दिनों विपक्ष पर जितना मुखर हैं, उतना ही अपनी सीट पर एक्टिव हैं और फिक्रमंद भी।
इसकी क्या वजह है। सीएम और पूर्व सीएम के बीच क्या वाकई सब कुछ ठीक नहीं है।
वजह जो भी हो, शिवराज के ये बयान, गुस्सा और फिक्र सब कुछ विपक्ष को बड़ा मौका दे रहे हैं।
कांग्रेस ने बताया सीएम और पूर्व सीएम के बीच अदावत का नतीजा
शिवराज के ताजा बयान के बाद कांग्रेस ने अपने ट्वीट में कहा कि ये सीएम और पूर्व सीएम के बीच की अदावत का नतीजा है।
फिलहाल सत्ता और संगठन शिवराज के गुस्से और खीझ पर खामोश हैं।
वैसे तो शिवराज जैसे नेता पार्टी लाइन से कभी छिटकते नहीं हैं। पर अभी तेवर कुछ और ही नजर आते हैं।
क्या उनके बयानों से वाकई मौजूदा सरकार की छवि पर गलत असर पड़ रहा है। और अगर ऐसा है तो क्या आलाकमान शिवराज की लगाम खींचेंगे।
सही-गलत का सवाल आया तो आप किसका साथ देंगे। कमेंट सेक्शन में जरूर बताइए।