MP के दो जिलों में नौकरी कर रहा था घूसखोर डॉक्टर, दोनों जगह से ले रहा था सैलरी
समझें क्या है पूरा मामला...
- शहडोल में NHM से जुड़ा नया फर्जीवाड़ा सामने आया है।
- डॉ. महेशचंद्र शर्मा श्योपुर की नौकरी छोड़े बिना शहडोल में नियुक्त हो गए।
- रीवा लोकायुक्त ने उन्हें 5000 रुपए घूस लेते पकड़ा।
- जांच में पता चला वे दो जिलों में एक साथ सेवा दे रहे थे।
- स्वास्थ्य विभाग अब पूरे मामले की जांच में जुटा है।
क्या है पूरा फर्जीवाड़ा
शहडोल में ज्यादा दिन नहीं बीते जब NHM (National Health Mission) मध्य प्रदेश में फर्जी डिग्री रजिस्ट्रेशन के सहारे नौकरी पाने वाले संविदा डॉक्टरों का मामला सामने आया था। दमोह से शुरू हुए इस मामले में कई जिलों से करीब 12 फर्जी डॉक्टर पकड़े गए थे। कुछ अन्य आरोपी भी फरार बताए जा रहे हैं। अब इसी तरह का एक और बड़ा फर्जीवाड़ा शहडोल में सामने आया है। बीते शुक्रवार को 5000 रुपए घूस लेते हुए संविदा मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेशचंद्र शर्मा को पकड़ा गया था। जांच में सामने आया कि वे दो जिलों में एक साथ सरकारी नौकरी कर रहे थे।
कहां-कहां थी नियुक्ति
डॉ. शर्मा की नियुक्ति शहडोल जिले के जयसिंहनगर ब्लॉक में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उफरी में थी। इसके अलावा वे श्योपुर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहसराम में भी दर्ज थे। यानी दोनों जिलों के रिकॉर्ड में उनका नाम अफसर के तौर पर मौजूद था। इससे उपस्थिति, वेतन भुगतान और सेवा अभिलेखों में भी गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई। स्वास्थ्य विभाग अब इन सभी बिंदुओं की जांच में जुट गया है।
कैसे खुला मामला
पता चला कि डॉ. शर्मा ने 2020-21 में सहसराम में पदभार ग्रहण किया था। आरोप है कि वहां की सेवा समाप्त किए बिना ही उन्होंने 2024 में उफरी में भी नियुक्ति ले ली। यह पूरा मामला तभी सामने आया जब रीवा लोकायुक्त ने उन्हें रिश्वत लेते पकड़ा। घूस लेते पकड़े जाने के बाद उनकी फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। इसकी जानकारी श्योपुर तक भी पहुंच गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की जांच में डॉ. शर्मा के सहसराम में पदस्थ होने का खुलासा हुआ। जांच अधिकारियों ने शहडोल सीएमएचओ (Chief Medical and Health Officer) से भी इस मामले में बातचीत की।
डॉक्टर का बयान
पकड़े जाने के बाद डॉ. महेशचंद्र शर्मा का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि रिश्वत नहीं लेता तो पता नहीं चलता। उनके इस बयान से मामला और सुर्खियों में आ गया है। इस बयान को लेकर स्वास्थ्य विभाग में भी चर्चा तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है।
नियमों के अनुसार होगी कार्रवाई
शहडोल के सीएमएचओ डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा कि मामले की जानकारी मिल गई है। अब श्योपुर के सीएमएचओ से पूरी रिपोर्ट और सेवा से जुड़े रिकॉर्ड मांगे जाएंगे। रिपोर्ट आने के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब उठ रहे यह सवाल
पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। पहला सवाल है कि दोनों जिलों में नियुक्ति के लिए एक जैसे दस्तावेजों का उपयोग हुआ या अलग-अलग। दूसरा सवाल है कि दोनों जगह वेतन स्वीकृति और सेवा रिकॉर्ड कैसे संचालित हुए।
तीसरा सवाल यह है कि डॉ. शर्मा कई महीने से ऑनलाइन नियमित हाजिरी दर्ज नहीं कर रहे थे, तो इसकी वजह क्या रही। चौथा सवाल है कि पांच महीने से वेतन रुकने के बाद भी उनकी सेवा स्थिति और दूसरे जिले में तैनाती का पता क्यों नहीं चला। इन सभी सवालों के जवाब अब विभागीय जांच में तलाशे जा रहे हैं।
आगे क्या होगा असर
स्वास्थ्य विभाग की डिजिटल निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यदि समय पर हाजिरी और वेतन रिकॉर्ड की जांच होती तो यह मामला पहले पकड़ में आ सकता था। विभाग अब दोनों जिलों के रिकॉर्ड की गहराई से पड़ताल कर रहा है। इस मामले का असर NHM की भर्ती प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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