VIT भोपाल पर NHRC का शिकंजा: छात्रों से भ्रामक खेल के आरोप, 2 हफ्ते में जवाब तलब
VIT भोपाल यूनिवर्सिटी का मामला अब सीधा मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। NHRC ने शिकायत को गंभीर मानते हुए UGC चेयरमैन और मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा प्रमुख सचिव को नोटिस थमा दिया है। आयोग ने साफ कहा है 2 हफ्ते में Action Taken Report (ATR) दो, वरना आगे कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहो।
क्या है पूरा मामला?
सीहोर में स्थित VIT यूनिवर्सिटी (vit university ) पर आरोप है कि वह भोपाल नाम का इस्तेमाल कर छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित कर रही है। शिकायत में कहा गया कि असली लोकेशन करीब 60 किमी दूर होने के बावजूद भोपाल नाम से एडमिशन के दौरान गलत धारणा बनाई जाती है। NHRC ने इसे मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए संज्ञान लिया है।
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क्या है मामला ?
भोपाल नाम से लोकेशन को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप।
एडमिशन प्रक्रिया में भ्रामक जानकारी देने की शिकायत।
कैंपस में बेसिक सुविधाओं की कमी।
प्रशासनिक लापरवाही और पुराने विवाद।
कथित अवैध क्लीनिक संचालन के आरोप।
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NHRC ने क्या कहा?
आयोग ने 30 मार्च 2026 को शिकायत का संज्ञान लिया। मामला मानवाधिकार अधिनियम 1993 के तहत दर्ज किया गया। UGC और मप्र सरकार से जांच रिपोर्ट मांगी गई। 2 हफ्ते के भीतर ATR पेश करना अनिवार्य है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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NSUI का आरोप
NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने शिकायत में कहा कि यूनिवर्सिटी का पूरा मॉडल ही “मिसलीडिंग” है। उनका आरोप है कि नाम से लेकर सुविधाओं तक, कई स्तर पर छात्रों के साथ पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। परमार ने आयोग से नाम बदलने, उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग भी की है।
यूनिवर्सिटी के जनसंपर्क अधिकारी संदीप रघुवंशी ने आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से मिले नोटिसों का जवाब दिया गया है। उनके मुताबिक, यूनिवर्सिटी का नाम वैधानिक प्रक्रिया से रखा गया है और इसमें कोई भ्रम या धोखाधड़ी नहीं है।
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कैंपस में पहले भी भड़का था गुस्सा
यह मामला अचानक नहीं उठा है। पहले भी छात्रों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें हालात बेकाबू तक हो गए थे। आगजनी और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। छात्रों का कहना था कि लगातार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।
अब आगे क्या?
अब नजर NHRC की अगली कार्रवाई पर है। अगर 2 हफ्ते में जवाब कमजोर या अधूरा रहा, तो मामला और सख्त हो सकता है। इस केस ने न सिर्फ VITभोपाल बल्कि प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
क्या यह कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित रहेगी, या फिर छात्रों के आरोपों पर असली एक्शन भी दिखेगा? फिलहाल, गेंद UGC और राज्य सरकार के पाले में है।