बाबा रामदेव की पतंजलि का पीथमपुर में निवेश का पूरा सच, सरकार से भी जारी पत्र
साल 2016 में इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिटमें बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने 500 करोड़ रुपए निवेश करने का ऐलान किया था। इसके लिए पीथमपुर के सेक्टर-3 बगदून में उन्हें तुरंत 40 एकड़ जमीन रियायती दर (25 फीसदी कीमत पर) पर दे दी गई।
यह जमीन उन्हें सिर्फ 10 करोड़ रुपए में मिली, जबकि इसकी कीमत ज्यादा थी। हालांकि, रामदेव इस जमीन से भी संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने कहा था कि इतनी जमीन में तो हम कबड्डी खेलते हैं। इसके बाद कंपनी ने यहां सिर्फ बाउंड्री वॉल बनाई और करीब 10 साल में कोई बड़ा निवेश नहीं किया।
यह जमीन दी गई बाबा को
मप्र औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) इंदौर ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को पीथमपुर में प्लॉट नंबर 804, 805, 806 और 807 की कुल 40 एकड़ जमीन दी थी। यह जमीन करीब 1.68 लाख वर्ग मीटर (40 एकड़) थी, जिसकी कीमत 10 करोड़ रुपए तय की गई थी।
जमीन 99 साल की लीज पर दी गई थी और इसके लिए हर साल करीब 12.50 लाख रुपए लीज रेंट देना था। कंपनी ने यहां 500 करोड़ रुपए निवेश करने का वादा किया था। योजना थी कि यहां फ्रूट और वेजिटेबल जूस समेत अन्य उत्पादों का बड़ा प्लांट लगाया जाएगा, जिसकी क्षमता करीब 6 लाख मीट्रिक टन होगी।
दो बार जमीन वापस लेने का प्रस्ताव गया
बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की कंपनी ने यहां करीब 10 साल तक कोई काम शुरू नहीं किया। इसके बाद सरकार ने जमीन वापस लेने का प्रस्ताव भेजा। कंपनी ने कोविड का हवाला देते हुए 8 महीने का अतिरिक्त समय मांग लिया। लेकिन इसके बाद भी कोई निवेश या काम शुरू नहीं हुआ। फिर से जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन यह प्रस्ताव भोपाल स्तर पर जाकर अटक गया। जबकि लीज की शर्तों के मुताबिक कंपनी को तीन साल के अंदर यहां काम शुरू करना था।
अब बाबा की दूसरी कंपनी पतंजलि फूड आई पिक्चर में
जमीन वापस लेने का दबाव बढ़ने के बाद बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की दूसरी कंपनी पतंजलि फूड लिमिटेड मैदान में आई। यह वही कंपनी है, जो रुचि सोया इंडस्ट्रीज के अधिग्रहण के बाद बनी थी। पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने एमपीआईडीसी भोपाल को एक पत्र भेजकर कहा कि पीथमपुर में मिली 40 एकड़ जमीन को अब ग्रुप की दूसरी कंपनी पतंजलि फूड लिमिटेड के नाम ट्रांसफर कर दिया जाए।
एमपीआईडीसी से जारी हुआ यह पत्र
इस पत्र पर विचार करने के बाद एमपीआईडीसी के एमडी चंद्रमौली शुक्ला ने 14 जुलाई को पत्र क्रमांक 8979 जारी किया। इसमें बताया गया कि पतंजलि आयुर्वेद और पतंजलि फूड लिमिटेड दोनों ही एक ही ग्रुप की कंपनियां हैं।
नए प्रस्ताव के मुताबिक पतंजलि फूड लिमिटेड पीथमपुर में 450 करोड़ रुपए का निवेश करेगी और इससे करीब 1600 लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया गया है। कंपनी यहां बिस्किट और सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना बना रही है।
लेकिन शर्त 19-बी का क्या होगा?
पहले कंपनी की कोशिश थी कि जमीन का ट्रांसफर मप्र औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2019 के नियम 19(ए) के तहत हो जाए। इस नियम के मुताबिक अगर दोनों कंपनियों का मालिकाना हक और हिस्सेदारी एक जैसी हो तो सिर्फ 25 हजार रुपए शुल्क देकर जमीन ट्रांसफर की जा सकती है।
लेकिन यहां दिक्कत यह थी कि पतंजलि आयुर्वेद और पतंजलि फूड लिमिटेड दो अलग-अलग कंपनियां हैं। इसलिए 19(ए) के तहत जमीन ट्रांसफर का प्रस्ताव मंजूर नहीं हो सका। इसके बाद एमपीआईडीसी के एमडी के पत्र में नियम 19(बी) की शर्त लगाई गई।
इस शर्त के मुताबिक-
- जिस कंपनी के नाम जमीन पहले दी गई थी, यानी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, उसे अपनी मंजूर योजना (500 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव) का कम से कम 25 फीसदी स्थायी पूंजी निवेश करना होगा या फिर कम से कम 50 करोड़ रुपए का निवेश होना चाहिए। यानी कंपनी को 125 करोड़ रुपए या कम से कम 50 करोड़ रुपए का निवेश करना जरूरी होगा।
- अगर यह शर्त पूरी होती है तो जमीन का ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके लिए लीज प्रीमियम का 10 फीसदी और विकास शुल्क का 15 फीसदी देना होगा। मौजूदा दरों के हिसाब से पतंजलि फूड लिमिटेड को करीब 5.50 करोड़ रुपए लीज प्रीमियम और अन्य शुल्क के रूप में देने होंगे। इसके अलावा रजिस्ट्री शुल्क भी अलग से लगेगा।
लेकिन 19-बी की पहली शर्त तो अधूरी है
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच यही है कि अभी मौके पर 19-बी की पहली शर्त ही पूरी नहीं हो रही है। इस शर्त के मुताबिक कंपनी को कम से कम 25 फीसदी यानी 125 करोड़ रुपए या फिर कम से कम 50 करोड़ रुपए का निवेश करना जरूरी है। लेकिन अभी तक इतना निवेश नहीं हुआ है। अब इस शर्त को पूरा कराने और आगे की प्रक्रिया की जिम्मेदारी एमपीआईडीसी इंदौर को दी गई है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि एमपीआईडीसी इंदौर इस मामले में आगे कैसे कार्रवाई करता है।
रुचि सोया के पुराने प्लांट की शिफ्टिंग
वहीं दूसरी तरफ एक और तैयारी चल रही है। मांगलिया में रुचि सोया की एक बड़ी यूनिट है, जो अब अधिग्रहण के बाद पतंजलि फूड के नाम से चल रही है। इस प्लांट को पीथमपुर में शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है।
ऐसे में आशंका है कि इसी पुराने प्लांट को पीथमपुर की जमीन पर नए निवेश के तौर पर दिखाया जा सकता है। हालांकि, इसकी जांच और पुष्टि करने की जिम्मेदारी एमपीआईडीसी इंदौर की ही होगी।
बड़ा सवाल, जमीन की नीलामी क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कंपनी ने 10 साल तक जमीन पर कोई काम नहीं किया, तो अब उसके नए प्रस्ताव को मंजूरी कैसे दी जा रही है। अगर मप्र सरकार इस जमीन की खुली नीलामी कराती तो इससे करीब 80 करोड़ रुपए मिल सकते थे। पहले ही पतंजलि आयुर्वेद को यह जमीन 25 फीसदी रियायती दर पर सिर्फ 10 करोड़ रुपए में दी गई थी, जबकि उस समय इसकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपए थी। अब 10 साल बाद जमीन की कीमत दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ चुकी है।
पतंजलि आयुर्वेद और पतंजलि फूड में कौन प्रमुख
पतंजलि आयुर्वेद कंपनी (Patanjali Ayurved Limited) की मुख्य कंपनी है, जिसकी शुरुआत योगगुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने की थी। इसमें आचार्य बालकृष्ण एमडी हैं, जबकि बाबा रामदेव मुख्य प्रणेता और मार्गदर्शक की भूमिका में हैं। कंपनी के डायरेक्टरों में राम भरत, आर. मित्तल, रजनीश मिश्रा समेत अन्य लोग शामिल हैं।
वहीं पतंजलि फूड लिमिटेड कंपनी (Patanjali Business) रुचि सोया इंडस्ट्रीज के अधिग्रहण के बाद बनी है। इसमें राम भरत एमडी हैं। आचार्य बालकृष्ण कंपनी के चेयरमैन और नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं, जबकि Baba Ramdevनॉन-इंडिपेंडेंट और नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की भूमिका में हैं।
एमपीआईडीसी एमडी शुक्ला यह बोले
पतंजलि ग्रुप को मैसेज, फोन, ईमेल पर जवाब नहीं
इस मामले में द सूत्र ने आचार्य बालकृष्ण से संपर्क करने की कोशिश की। उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद उनके पीए गोपाल से लगातार बातचीत हुई। उन्होंने सवाल भेजने के लिए कहा। द सूत्र ने सवाल भेज दिए, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। इसके अलावा ईमेल के जरिए भी संपर्क किया गया।
क्या बोल रहे हैं जानकार
जब बाबा रामदेव को यह जमीन रियायती दर पर दी गई थी, तब भी साल 2017 में इंदौर हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की गई थी। हालांकि, कैबिनेट कमेटी ऑन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन के फैसले को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था।
अधिवक्ता अभिनव धनोतकर का कहना है कि जिस कंपनी ने सस्ती दर पर जमीन लेने के बाद 10 साल तक कोई काम नहीं किया, उसने लीज की शर्तों का उल्लंघन किया है। उनके मुताबिक, सरकार को यह जमीन वापस लेकर खुले तौर पर नीलामी करनी चाहिए थी। इसके बाद अगर वही कंपनी नीलामी में जमीन खरीदती तो भी सरकार को ज्यादा राजस्व मिलता। उनका कहना है कि मौजूदा प्रक्रिया पूरी तरह गलत है।
FAQ
- Q1. पतंजलि को पीथमपुर में कितनी जमीन और कितनी कीमत पर मिली थी?
A. पतंजलि आयुर्वेद को पीथमपुर में 40 एकड़ जमीन करीब 10 करोड़ रुपए में 25 फीसदी रियायती दर पर दी गई थी। - Q2. एमपी में पतंजलि फूड को जमीन ट्रांसफर करने का मामला क्यों उठा?
A. 10 साल तक निवेश नहीं होने के बाद जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद पतंजलि आयुर्वेद ने जमीन को ग्रुप की दूसरी कंपनी पतंजलि फूड लिमिटेड के नाम ट्रांसफर करने का प्रस्ताव दिया। - Q3. एमपी में पतंजलि मामले में जमीन ट्रांसफर में सबसे बड़ा पेंच क्या है?
A. नियम 19-बी के तहत निवेश की शर्त पूरी होना जरूरी है। कंपनी को कम से कम 50 करोड़ रुपए या 25 फीसदी स्थायी पूंजी निवेश करना होगा, जिस पर सवाल उठ रहे हैं। - Q4. पतंजलि आयुर्वेद के प्रमुख कौन हैं?
A. पतंजलि आयुर्वेद में आचार्य बालकृष्ण एमडी हैं, जबकि बाबा रामदेव मुख्य प्रणेता और मार्गदर्शक की भूमिका में हैं। - Q5. पतंजलि फूड लिमिटेड में कौन प्रमुख हैं?
A. पतंजलि फूड लिमिटेड में राम भरत एमडी हैं। आचार्य बालकृष्ण चेयरमैन और नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। - Q6. पतंजलि फूड लिमिटेड कैसे बनी?
A. पतंजलि फूड लिमिटेड रुचि सोया इंडस्ट्रीज के अधिग्रहण के बाद बनी कंपनी है।
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