16 फरवरी से परमिट जांच अभियान, लेकिन क्या बदलेगी जमीनी हकीकत?

Ramanand Tiwari | Feb 15, 2026, 23:21 IST
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मध्य प्रदेश में 16 फरवरी से बिना परमिट और रूट उल्लंघन करने वाली बसों के खिलाफ विशेष जांच अभियान शुरू हो रहा है। सवाल यह है कि क्या यह अभियान जमीनी हकीकत में बदलाव लाएगा?

BHOPAL. मध्यप्रदेश में परिवहन विभाग 16 फरवरी से बिना परमिट और रूट उल्लंघन करने वाली बसों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करेगा। नए परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के पदभार संभालने के बाद यह फैसला लिया गया है। दावा किया जा रहा है कि बड़े शहरों से लेकर जिलों तक सख्त जांच की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई स्थायी होगी या फिर चार दिन की खानापूर्ति बनकर रह जाएगी?



हादसों के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम?

प्रदेश में अक्सर किसी बड़े हादसे के बाद ही परिवहन विभाग और आरटीओ अमला अलर्ट मोड में नजर आता है। गुना, ग्वालियर अंचल, भिंड, भोपाल और इंदौर कई जगहों पर बस हादसों ने सवाल खड़े किए हैं। इसके बावजूद खटारा और नियम तोड़ती बसें अब भी सड़कों पर दौड़ती दिख जाती हैं।



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16 फरवरी से विशेष जांच अभियान शुरू

बिना परमिट और ऑफ-रूट बसों पर कार्रवाई इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में ज्यादा शिकायतें आई हैं। 899 खटारा बसें पहले ही चिन्हित की जा चुकी हैं। 15 साल पुरानी बसें अब भी संचालन में होने की आशंका जताई जा रही है। मुख्यमंत्री ने इन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।



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क्या है नए आयुक्त का प्लान?

अपर परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने पद संभालते ही सख्ती के संकेत दिए हैं। परमिट जारी करने से लेकर उसकी वैधता खत्म होने के बाद नवीनीकरण न कराने वाली बसों की सूची तैयार की गई है। जिलों में आरटीओ और संभागीय उड़नदस्ते की मदद से जांच अभियान चलाया जाएगा।



यात्री बसों की मनमानी को लेकर शिकायतें बढ़ रही हैं। शिकायतें क्षेत्रीय कार्यालयों से मुख्यालय तक पहुंच रही हैं। नवंबर 2025 में परिवहन सचिव मनीष सिंह ने सख्ती के लिए पत्र लिखा था। इसके बाद 899 पुरानी और संदिग्ध बसें चिन्हित की गईं। सवाल यह है कि क्या ये बसें अब भी सड़कों पर हैं?



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स्कूल बसों की हालत भी चिंता का कारण

प्रदेश के कई स्कूलों में आज भी खटारा बसें बच्चों को ढो रही हैं। परमिट और फिटनेस को लेकर पहले भी आरोप-प्रत्यारोप लगे, लेकिन अक्सर कार्रवाई कागजों तक सीमित रह गई। हर हादसे के बाद जांच और फिर सब कुछ सामान्य यही पैटर्न रहा है।



स्टाफ की कमी, रणनीति अधूरी?

जमीनी स्तर पर एमपी परिवहन विभाग में स्टाफ की कमी की बात सामने आती रही है। जब अमला सीमित है तो व्यापक जांच कैसे होगी? क्या सिर्फ आदेश जारी कर देने से व्यवस्था सुधर जाएगी, या मजबूत निगरानी तंत्र भी तैयार होगा?



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सीएम के निर्देश, लेकिन अमल कितना?

मुख्यमंत्री पहले ही ऑफ-रूट बसों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं। फिर भी जिलों में बिना परमिट और शर्तों के उल्लंघन पर ठोस कार्रवाई कम ही दिखती है। यही वजह है कि आम जनता में भरोसे की कमी बनी हुई है।



बड़ा सवाल: क्या यह अभियान टिकेगा?

क्या यह भी कुछ दिनों की औपचारिकता बन जाएगा? या नए आयुक्त की सख्ती सड़क सुरक्षा में बदलाव लाएगी? यात्री सुरक्षा, खासकर बच्चों की सुरक्षा, कोई प्रयोग नहीं हो सकती। अब 16 फरवरी के बाद की कार्रवाई पर नजर है। असली परीक्षा जमीन पर होगी।



परिवहन विभाग की उपायुक्त किरण शर्मा ने बताया कि 16 फरवरी से विशेष अभियान चलेगा। यह अभियान परमिट सत्यापन, शर्तों के उल्लंघन और फिटनेस जांच पर केंद्रित होगा। यह कार्रवाई यात्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की जाएगी।



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