परिवहन विभाग में अहम कुर्सी खाली: अपर आयुक्त प्रवर्तन के लिए अफसर तैयार नहीं

मध्यप्रदेश परिवहन विभाग में अपर आयुक्त प्रवर्तन की कुर्सी चार महीने से खाली है, जिससे विभाग में निर्णयों में देरी हो रही है। अफसर इस पद पर आने से कतराते हैं, खासकर सौरभ शर्मा कांड के बाद।

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Ramanand Tiwari
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Important chair vacant in Transport Department Additional Commissioner officers not ready for enforcement

Photograph: (the sootr)

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NEWS IN SHORT

  • परिवहन विभाग में अपर आयुक्त प्रवर्तन का पद चार महीने से खाली है।
  • सौरभ शर्मा कांड के बाद अधिकारी इस पद को लेने से कतराते हैं।
  • विभागीय फैसलों में देरी हो रही है, कार्यभार बढ़ने से आयुक्त पर दबाव है।
  • पहले इस पद के लिए अफसरों में होड़ थी, अब कोई तैनाती के लिए तैयार नहीं।
  • उमेश जोगा के लौटने के बाद इस पद की तैनाती की उम्मीद जताई जा रही है।

NEWS IN DETAIL

BHOPAL. प्रदेश के परिवहन विभाग में एक अजीब हालात बने हुए हैं। जिस अपर आयुक्त परिवहन (प्रवर्तन) के पद से आईपीएस अधिकारी उमेश जोगा का तबादला हुआ था, वह कुर्सी आज भी खाली है। 15 महीने बाद जोगा आयुक्त बनकर वापस तो आ गए, लेकिन उस अहम पद पर अब तक किसी की तैनाती नहीं हो सकी है। हालात ऐसे हैं कि अफसर इस जिम्मेदारी को लेने से कतराते नजर आ रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

अक्टूबर 2024 में उमेश जोगा का तबादला हुआ था। इसके बाद परिवहन विभाग में अपर आयुक्त प्रवर्तन का पद खाली हो गया। दिसंबर 2024 में सौरभ शर्मा कांड सामने आया, जिसने विभाग की छवि को और ज्यादा नुकसान पहुंचाया। इसके बाद से हालात ऐसे बन गए कि कोई भी अधिकारी इस पद पर आने को तैयार नहीं है।

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क्यों खास है अपर आयुक्त प्रवर्तन का पद?

यह पद परिवहन विभाग के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों में से एक माना जाता है। यह प्रवर्तन यानी जांच, कार्रवाई और नियंत्रण से जुड़ा पद है। चेक पोस्ट, वाहनों की निगरानी और नियमों का पालन इसी के दायरे में आता है
विभाग की साख और नियंत्रण इसी पद पर काफी हद तक निर्भर करता है

चार महीने से खाली, चार्ज पर चल रहा काम

जानकारी के अनुसार, अपर आयुक्त प्रवर्तन का पद पिछले चार महीने से खाली है। फिलहाल यह जिम्मेदारी केवल चार्ज के भरोसे चल रही है। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि परिवहन आयुक्त पर काम का बोझ बढ़ गया है और विभागीय फैसलों में देरी हो रही है।

चेक पोस्ट विवाद और सौरभ कांड का असर

परिवहन विभाग की सबसे ज्यादा बदनामी चेक पोस्ट को लेकर हुई थी। सरकार ने जैसे-तैसे चेक पोस्ट बंद किए ही थे कि सौरभ शर्मा कांड सामने आ गया। चेक पोस्ट बंद होने से पहले ही अधिकारी पोस्टिंग से बच रहे थे। सौरभ कांड के बाद स्थिति और बिगड़ गई। अब अपर आयुक्त प्रवर्तन बनना अफसरों के लिए “जोखिम भरा” माना जा रहा है

पहले इसी पद के लिए लगती थी लाइन

कभी यही पद इतना ताकतवर माना जाता था कि अधिकारी इसके लिए सिफारिशें लगाते थे। अब हालात उलट हैं-जहां पहले पोस्टिंग के लिए होड़ थी, अब वहां कोई जाने को तैयार नहीं।

विभाग खुद सवालों के घेरे में

इतने अहम पद को लंबे समय तक खाली रखना खुद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब जब उमेश जोगा आयुक्त बनकर लौट आए हैं, तो उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस पद पर नियुक्ति हो सकती है।

  • अपर आयुक्त प्रवर्तन का पद चार महीने से खाली
  • उमेश जोगा 15 महीने बाद आयुक्त बनकर लौटे
  • सौरभ शर्मा कांड के बाद अफसर पोस्टिंग से बच रहे
  • पद फिलहाल चार्ज पर चल रहा है 
  • आयुक्त पर काम का दबाव बढ़ा 

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विभाग की साख और नियंत्रण पर असर

परिवहन विभाग का यह अहम पद खाली रहना सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरी को भी उजागर करता है। अब देखना होगा कि आयुक्त उमेश जोगा इस “हॉट सीट” पर किसी को बैठा पाते हैं या नहीं।

अपर परिवहन आयुक्त उमेश जोगा

मध्यप्रदेश परिवहन विभाग अपर परिवहन आयुक्त उमेश जोगा आईपीएस अधिकारी सौरभ शर्मा
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