पॉकेट गवाह पर TI इंद्रमणि पटेल केस में CP संतोष सिंह दे चुके हैं सुप्रीम कोर्ट में शपथ-पत्र
इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी दिनेश वर्मा को एसआई पद पर डिमोशन के सीपी संतोष सिंह के ताजा फैसले ने पुलिस विभाग में हलचल मचा दी है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के मामले में नहीं बल्कि पॉकेट गवाह पेश करने के आरोप और फिर विभागीय जांच के आधार पर हुई है।
पॉकेट गवाह का यह पहला मामला नहीं है। यदि हर थाने की जांच कराई जाए तो हर थाने में ऐसे चर्चित नाम हैं, जो कई केस में पुलिस के लिए गवाह बनने का काम करते हैं।
सीपी संतोष सिंह ने दिया था शपथ-पत्र
इस मामले में सबसे बड़ा मामला चंदननगर थाने का था, जिसमें मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया। वहां बेंच ने इतनी नाराजगी जाहिर की कि इंद्रमणि पटेल को टीआई की कुर्सी छोड़ने का आदेश ही लिखित में कर दिया।
इस मामले में संतोष सिंह ने शपथ-पत्र दिया था। हालांकि इसमें निचले स्तर के जांच अधिकारियों को तो नोटिस हुए, लेकिन टीआई पर विभागीय जांच नहीं की गई।
शपथ-पत्र में यह कहा गया था
सीपी संतोष सिंह के शपथ-पत्र में था कि इस केस में दस्तावेजों से यह स्पष्ट है कि स्टॉक गवाहों का बार-बार उपयोग किया गया है, जिसमें संबंधित जांच अधिकारियों द्वारा ऐसे 37 गवाहों का कई बार उपयोग किया गया है।
डीसीपी, जोन IV, इंदौर, मध्य प्रदेश ने आवेदक द्वारा भेजे गए चार्ट में दर्शाए गए सभी जांच अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें उनसे यह स्पष्टीकरण देने को कहा गया है कि किन परिस्थितियों में उक्त गवाहों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, जांच की निष्पक्षता बनाए रखने तथा प्रक्रिया में आम जनता के विश्वास को ठेस न पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। सभी हितधारकों के साथ चर्चा करके वैकल्पिक उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
सिंह ने सभी पुलिस अधिकारियों को पत्र भी लिखा
इस मामले में सिंह ने सात दिसंबर 2025 को सभी डीसीपी को पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि निष्पक्ष न्याय के लिए स्वतंत्र गवाह जरूरी हैं। हर आपराधिक प्रकरण में गवाह स्वतंत्र और विश्वसनीय होना चाहिए।
यदि स्थानीय स्वतंत्र साक्षी उपलब्ध नहीं हो या सहयोग नहीं कर रहा हो तो इसका विवरण केस डायरी में लिखते हुए अन्य व्यक्ति को साक्षी बना सकते हैं जो पूर्व में भी लिया गया हो, लेकिन जरूरी है कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष हो।
हर थाने में मौजूद हैं ऐसे पॉकेट गवाह
पॉकेट गवाह मामले में कई थाने चर्चित हैं। विजयनगर थाने पर मुकेश चायवाला, हरीश, शुभम के नाम चलते हैं। एमआईजी में दीपक, अरुण, परदेशीपुरा में संदीप, एंटोनी, सुनील, चंदननगर में गफ्फार, सलमान, आमिर रंगरेज, अन्नपूर्णा थाने पर विक्की, पिंटू, उत्कर्ष, द्वारकापुरी थाने में मुकेश श्रीवास्तव, मोहन हटकर तो भंवरकुआं थाने पर संदीप, जूनी इंदौर थाने पर अय्यूब जैसे नाम चर्चित हैं।
क्या पॉकेट गवाह में कार्रवाई बनेगी गले की फांस
इस मामले में सीपी सिंह की विभागीय जांच के बाद कार्रवाई ने पूरे विभाग में हलचल मचा दी है। जानकारों का कहना है कि टीआई मौके पर नहीं रहता है, इस मामले में जांच अधिकारी ही गवाह बनाता है और उन्हीं के हस्ताक्षर होते हैं, ऐसे में टीआई पर कार्रवाई आगे संकट पैदा करेगी। यह कई थानों में और कई सालों से चल रहा है।
यदि कोई विधानसभा में सवाल लगा या जांच बैठी तो कई थाने के अधिकारी नप जाएंगे। वहीं यह मामला इंद्रमणि पटेल टीआई मामले में खुद सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में है और इसमें गाइडलाइन बनाने के लिए कमेटी भी गठित की है, जिस पर अभी फैसला आना बाकी है। ऐसे में कहीं यह कार्रवाई विभाग और सरकार के लिए गले की फांस न बन जाए।
वर्मा के केस में क्या हुआ
इंदौर में साइबर सेल में पदस्थ इंस्पेक्टर दिनेश वर्मा और खजराना थाने के पूर्व टीआई को डिमोशन किया गया है। सीपी सिंह ने यह आदेश जारी किया। विभागीय जांच में उन्हें दोषी पाया गया और माना गया कि उन्होंने पॉकेट गवाह पेश किए हैं।
वर्मा अगस्त 2020 से अगस्त 2023 तक खजराना थाने के टीआई रहे हैं। इसी दौरान आरोप लगे कि वर्मा ने 742 केस में इरशाद पुत्र अब्दुल हकीम को गवाह बनाया। नवीन चौहान को 504 केस में गवाह बनाया। इसमें हत्या, धोखाधड़ी, जानलेवा हमला जैसे कई मामले हैं।
सीपी ने जांच के आधार पर पाया कि एक ही गवाह पेश कर आरोपियों को मदद की गई। इसकी जांच तत्कालीन सीएसपी जयंत राठौर ने की थी। इसके बाद डीसीपी ने विभागीय जांच के आदेश दिए थे। अब यह कार्रवाई हुई है।
वहीं, दिनेश वर्मा का कहना है कि ये झूठा आरोप है। मेरे किसी भी मामले मे ये दोनों गवाह कभी नहीं रहे। सारे मामले अधीनस्थ कर्मचारियों के हैं, जिनका स्पष्टीकरण तक नहीं लिया, ना इनकी जांच की। इनकी गलती मुझ पर थोप दी गई है।
सीपी अभी तक टीआई को बना चुके हैं एसआई
उधर सीपी संतोष सिंह जीरो टोलरेंस नीति के तहत इंस्पेक्टर रवींद्र सिंह गुर्जर और अजय वर्मा का भी डिमोशन कर चुके हैं। वह अभी तक 20 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने या कार्यवाहक अधिकार कम करने के आदेश दे चुके हैं।
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