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INDORE. इंदौर के चर्चित चंदनगर टीआई इंद्रमणि पटेल को हटाने के आदेश के बाद, 3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर फिर चर्चा हुई।
इस दौरान सरकार ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर टीआई को थाने से हटा दिया गया है। उन्हें लाइन अटैच कर दिया गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्हें अगले आदेश तक लाइन अटैच ही रखा जाए। समय कम होने की वजह से ज्यादा सुनवाई नहीं हो पाई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी।
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पॉकेट गवाह पर मांगे सभी से सुझाव
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से इस संबंध में सुझाव मांगे हैं कि पूरे देश भर में पॉकेट गवाह को कैसे रोका जाए। अगली तारीख में इन सुझावों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट एक गाइडलाइन जारी कर सकता है।
वहीं आगे की सुनवाई में टीआई पटेल पर क्या कार्रवाई होना है इस पर भी आदेश संभावित है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट पुलिस के जरिए दिए गए शपथपत्र पर भी बहस करेगी।
यह है पूरा मामला
आरोपी अनवर हुसैन पर चार की बजाय आठ केस बनाए गए हैं। साथ ही, 176 केस में चिन्हित गवाहों को पेश करना है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 जनवरी को आदेश दिया था कि टीआई को तुरंत लाइन अटैच किया जाए।
साथ ही, उन्हें अगले आदेश तक किसी भी जांच, पर्यवेक्षण या पुलिस स्टेशन में तैनाती का दायित्व नहीं सौंपा जाए। आदेश में लिखा कि यदि टीआई पटेल किसी भी मामले में हस्तक्षेप करने की कोशिश करते हैं, तो पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह इसके लिए जिम्मेदार होंगे।
हाईकोर्ट के आदेश का भी दिया था उदाहरण
सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर में आकाश तिवारी केस में हाईकोर्ट के आदेश की भी बात कही थी। इस मामले में चंदनगर के एक आरोपी के नहीं मिलने पर उसके पुत्र को ही गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही, उसे हथकड़ी लगाकर थाने में 30 घंटे बैठाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब हम टीआई के आचरण की जांच कर रहे हैं, तब हाईकोर्ट इंदौर में भी एक अलग याचिका में 4 दिसंबर 2012 की यह टिप्पणी भी सामने आई थी। इसमें सीपी को इन पर कार्रवाई के लिए निर्देश दिया गया थे। वहीं, बाद में याचिका वापस हो गई थी।
सीपी का शपथपत्र और एडिशनल डीसीपी भूमिका देखेंगे
सुप्रीम कोर्ट में पुलिस के जरिए इस मामले में शपथपत्र पेश किया गया है। इस केस में सीपी, एडिशनल डीसीपी दिक्षेष अग्रवाल और टीआई पटेल तीनों को ही पक्षकार बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में लिखा कि सीपी के जरिए पेश शपथपत्र और एडिशनल डीसीपी की भूमिका पर अगली सुनवाई 3 फरवरी को की जाएगी। अब इस पर सुनवाई 10 मार्च को संभावित है।
उल्लेखनीय है कि आरोपी अनवर हुसैन के अधिवक्ता रितम खरे ने इस शपथपत्र पर आपत्ति ली है। साथ ही, इसे सुप्रीम कोर्ट की आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी चूक में यह सब खानापूर्ति की गई है।
सुप्रीम कोर्ट क्यों हुआ पॉकेट गवाह पर सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार केसों में एक ही गवाह को पेश करने पर आपत्ति ली है। आदेश में कहा है कि टीआई ने कथित अपराधों में उन्हीं गवाहों का बार-बार उपयोग किया है/अनुमति दी है।
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पॉकेट गवाह क्या होता है
पॉकेट या स्टॉक विटनेस इन दिनों तेजी से चलन में आ गया है। इसमें थाने पर कुछ तय परिचितों को कई मामलों में गवाह बना दिया जाता है।
इस तरह से प्राकृतिक न्याय ही खत्म हो जाता है। चंदनगर केस में ही 176 गवाहों में से 35 गवाह बार-बार सामने आए थे। खासकर सलमान और आमिर नाम के दो गवाह कई मामलों में पेश हुए थे।
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