एमपी सरकार ने लिया 3600 करोड़ का लोन, 2056 तक चुकाना होगा कर्ज
Aman Vaishnav | Aug 07, 2026, 08:16 IST
एमपी सरकार ने लिया 3600 करोड़ का लोन
मध्यप्रदेश सरकार ने 3 हजार 600 करोड़ का नया कर्ज लिया है। पहली किश्त ₹1,600 करोड़ की है, जो 18 साल के लिए 7.61% ब्याज दर पर ली गई है। दूसरी किश्त दो हजार करोड़ की है, जो 30 साल के लंबे समय के लिए 7.90% ब्याज दर पर मिली है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- सरकार ने 3600 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया है।
- यह रकम सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी से जुटाई गई है।
- कर्ज को दो अलग-अलग किश्तों में बांटा गया है।
- पहली किश्त 1600 करोड़ और दूसरी 2000 करोड़ रुपए की है।
- दोनों किश्तों की ब्याज दर और अवधि अलग-अलग तय की गई है।
पहली किश्त की जानकारी
इस कर्ज की पूरी अदायगी साल 2044 में होगी। तब तक सरकार को समय-समय पर ब्याज की किश्तें देनी होंगी। यह एक लंबी अवधि का कर्ज है, जो सरकार के बजट पर सालों तक असर डालेगा।
दूसरी किश्त की जानकारी
लंबी अवधि होने की वजह से इस कर्ज पर ब्याज दर भी अधिक रखी गई है। यह राशि साल 2056 में पूरी तरह चुकानी होगी। यानी अगले तीन दशक तक यह कर्ज सरकार के खाते में दर्ज रहेगा।
कहां खर्च होगी यह राशि
हालांकि किन-किन परियोजनाओं पर यह राशि खर्च होगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। आमतौर पर ऐसे कर्ज सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों में लगाए जाते हैं।
सरकारी प्रतिभूतियां क्या होती हैं
राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता
इसमें बताया गया था कि एमपी सरकार नया उधार लेकर पुराना कर्ज चुका रही है। साल 2024-25 में कुल उधार का 29.43 फीसदी हिस्सा पुराने कर्ज में गया था। इससे विकास कार्यों के लिए पैसा कम बचा है।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक, यानी कैग ने यह रिपोर्ट राज्य वित्त पर तैयार की थी। इसमें साल 2024-25 के आंकड़े शामिल हैं।
कैग रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ
लगातार यही रफ्तार बनी हुई है। नए उधार से पुराना कर्ज चुकाया जा रहा है। इससे पूंजीगत यानी विकास कार्यों वाले खर्च के लिए पैसा कम बचता है। सड़क, बिजली और अन्य जरूरी काम इससे प्रभावित हो सकते हैं। MP सरकार पर कर्ज
आर्थिक संतुलन बिगड़ने का पूरा खतरा
10 साल में 298 फीसदी तक बढ़ा राज्य का ऋण
वर्ष 2024-25 में केवल ब्याज के भुगतान पर 21 हजार 466 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। राज्य की कुल बकाया देयता में लगातार तेज बढ़ोतरी देखी गई है।
वर्ष 2023-24 में यह 12.28 फीसदी थी जो अब 14.60 फीसदी हो गई। सकल राज्य घरेलू उत्पाद की तुलना में कर्ज का बोझ काफी अधिक बढ़ा है।
पिछले 5 वर्षों में कर्ज चुकाने का ब्योरा
2021-22: 4 हजार 684 करोड़ रुपए (32.76% उधारी)
2022-23: 58 हजार 867 करोड़ रुपए (37.38% उधारी)
2023-24: 65 हजार 180 करोड़ रुपए (33.19% उधारी)
2024-25: 89 हजार 797 करोड़ रुपए (29.43% उधारी)
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