जाति सर्टिफिकेट पर सियासत: मंत्री प्रतिमा बागरी बोलीं- कांग्रेस नेता ने लाइमलाईट के लिए उछाला मुद्दा
मध्यप्रदेश की सियासत में इन दिनों जाति प्रमाण पत्र को लेकर बखेड़ा हो गया है। मामला नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी से जुड़ा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य स्तरीय छानबीन समिति को आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने कहा है कि मंत्री की जाति की वैधता पर अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए। इस आदेश के बाद से ही सूबे की राजनीति में जुबानी तीर चलने शुरू हो गए हैं।
लाइमलाईट के लिए उछाला गया मुद्दा: मंत्री बागरी
जब इस पूरे विवाद पर राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे सीधे तौर पर एक पब्लिसिटी स्टंट करार दिया। मंत्री का कहना है कि वे कोई पहली बागरी विधायक नहीं हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि उनसे पहले भी तीन बार बागरी समाज के लोग विधायक रह चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि खुद कांग्रेस के टिकट पर भी बागरी विधायक सदन में पहुंचे हैं। प्रतिमा बागरी ने दोटूक अंदाज में कहा कि यह सब सिर्फ चर्चा में बने रहने और लाइमलाईट बटोरने की कोशिश है।
लाइट आपकी बुझने वाली है: कांग्रेस का तीखा पलटवार
मंत्री के बयान पर कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पलटवार करने में देर नहीं की। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि मंत्री प्रतिमा, मैं लाइमलाईट में आने के लिए यह लड़ाई नहीं लड़ रहा हूं, बल्कि लाइट तो अब आपकी बुझने वाली है।
कांग्रेस नेता अहिरवार ने आरोप लगाया कि वे उस आरक्षण की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसका लाभ गलत तरीके से लिया जा रहा है। उन्होंने चुनौती दी कि जब मंत्री छानबीन समिति के सामने पेश होंगी, तब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
क्या बागरी समाज एससी है या राजपूत?
इस पूरे विवाद की जड़ में वह दावा है, जिसमें कहा गया है कि बागरी जाति संबंधित क्षेत्र की अनुसूचित जाति की सूची में शामिल ही नहीं है। प्रदीप अहिरवार का आरोप है कि मंत्री प्रतिमा बागरी असल में राजपूत समुदाय से आती हैं।
याचिका में 1961-71 की जनगणना, 2003 के समिति के फैसले और 2007 के केंद्र सरकार के राजपत्र का हवाला दिया गया है। कांग्रेस का दावा है कि इन दस्तावेजों के आधार पर बागरी जाति एससी वर्ग का हिस्सा नहीं है।
जानें कौन हैं मंत्री प्रतिमा बागरी
37 वर्षीय प्रतिमा बागरी की राजनीतिक यात्रा काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। ग्रेजुएट शिक्षित प्रतिमा ने 2024 के विधानसभा चुनाव में सतना जिले की रैगांव सीट से 36 हजार 060 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।
उन्होंने कांग्रेस की कल्पना वर्मा को शिकस्त दी थी। हालांकि, इससे पहले 2021 के उपचुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। फिलहाल वे नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं, लेकिन हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश ने उनके राजनीतिक भविष्य पर एक सवालिया निशान जरूर लगा दिया है।
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