90 डिग्री वाले विवाद के बाद अब कर्व सुधार पर बैठकों का खेल, सवालों के घेरे में PWD और सरकार
भोपाल के ऐशबाग आरओबी का 90 डिग्री वाला मोड़ राष्ट्रीय चर्चा में आया था। सरकार और लोक निर्माण विभाग की फजीहत हुई थी। सवाल उठे कि ऐसा डिज़ाइन कैसे पास हुआ। विशेषज्ञ और सोशल मीडिया ने इसे बड़ी इंजीनियरिंग चूक बताया। अब सरकार कर्व सुधार के जरिए डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रही है। लगातार बैठकों और तकनीकी प्रक्रियाओं के बीच सवाल है कि सुधार जमीन पर लागू होगा या सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगा।
...लेकिन समाधान अब भी अधूरा
ऐशबाग ROB के विवादित कर्व को सुधारने के लिए मंत्रालय में बड़ी बैठक हुई। इसमें PWD और रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में संयुक्त GAD मंजूरी, डिजाइन अप्रूवल, पाइलिंग और रेलवे सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन पूरी प्रक्रिया अभी भी “सैद्धांतिक सहमति” के स्तर पर ही दिखाई दे रही है। यानी जमीन पर काम शुरू होने से पहले अभी कई तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरियां बाकी हैं।
क्या कर्व वास्तव में सुधर पाएगा?
विशेषज्ञों की मानें तो जिस स्थान पर ROB बना है, वहां कर्व को दोबारा तकनीकी रूप से संतुलित करना आसान नहीं है। बताया जा रहा है कि रेलवे की जमीन सीमित है और रेलवे विभाग भी पूरी तरह खुलकर सहमत नजर नहीं आ रहा। पिछले 3 महीनों से सिर्फ बैठकें हो रही हैं, लेकिन ठोस समाधान अब तक सामने नहीं आया। यही वजह है कि अब यह मामला तकनीकी सुधार से ज्यादा इमेज बचाने की कवायद जैसा दिखाई देने लगा है।
सरकार की जल्दबाजी में कार्रवाई पर भी उठे सवाल
90 डिग्री मोड़ विवाद सामने आने के बाद विभाग ने तत्काल सस्पेंशन और कार्रवाई का रास्ता अपनाया था। इसे सरकार की सख्ती के तौर पर पेश किया गया। लेकिन अब उसी मामले में तीन अधिकारियों को क्लीन चिट मिलने के बाद पूरा मामला उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है।
अगर अधिकारी दोषी नहीं थे तो उन्हें सस्पेंड क्यों किया गया। क्या सिर्फ तत्काल वाहवाही के लिए कार्रवाई हुई। क्या विभाग ने बिना पूरी जांच के अफसरों को बलि का बकरा बनाया। जिन अधिकारियों को क्लीन चिट मिली, उनके मानसिक और प्रशासनिक नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा।
मंत्री से लेकर शीर्ष अफसरों तक घिरा विभाग
इस पूरे विवाद में PWD मंत्री राकेश सिंह और शीर्ष इंजीनियरिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि यदि विभाग में पारदर्शिता, गुणवत्ता और तकनीकी अनुशासन सही होता तो ऐसा डिजाइन मंजूर ही नहीं होता। अब क्लीन चिट और बाकी अधिकारियों पर जारी जांच ने विभागीय कार्रवाई की निष्पक्षता पर भी संदेह खड़ा कर दिया है।
रेलवे भी पूरी तरह सहज नहीं
बैठक में रेलवे की बाउंड्री वॉल तोड़ने, ड्रेन शिफ्ट करने और संयुक्त GAD मंजूरी जैसे बिंदुओं पर सहमति बनी है। लेकिन तकनीकी स्तर पर अभी भी कई अड़चनें मौजूद हैं। रेलवे ट्रैक के पास निर्माण, सीमित जगह और सुरक्षा मानकों के कारण यह काम बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कागजों पर समाधान निकालना आसान है, लेकिन मौके पर इसे लागू करना बड़ी चुनौती होगी।
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अब सबसे बड़ा सवाल…
सरकार और विभाग दावा कर रहे हैं कि ऐशबाग ROB का विवादित कर्व सुधारा जाएगा। लेकिन तकनीकी चुनौतियां, रेलवे की सीमित सहमति, जमीन की कमी और लगातार बैठकों के बावजूद ठोस प्रगति न दिखने से लोगों के मन में संदेह बढ़ता जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह मामला वास्तव में समाधान तक पहुंचता है या फिर “बैठक-दर-बैठक” फाइलों में ही घूमता रह जाता है।
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