नाम का है PWD का लोकपथ ऐप, अफसर गड्ढे नहीं भर पाए तो शिकायत बंद कर दी
बेहतर और आधुनिक सुविधाओं को सरकारी सिस्टम कैसे बर्बाद करता है, कैसे शिकायतों को निपटाया जाता है और आम लोगों की परेशानी को कैसे कागजों में खत्म कर दिया जाता है... यही बात इस खबर का मर्म है।
यह मामला सड़क बनाने वाले पीडब्ल्यूडी का है। इस विभाग ने खराब सड़कों की शिकायतों के लिए 'लोकपथ ऐप' बनाया है। दावा है कि ऐप के जरिए सड़क से जुड़ी शिकायतें दर्ज कर उनका निराकरण किया जाता है, लेकिन यह सच नहीं है।
यह सड़क हमारे अंडर नहीं आती
व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए जब एक खराब सड़क की शिकायत लोकपथ ऐप पर की गई तो सिस्टम का दूसरा ही चेहरा सामने आया। हां, शिकायत के बाद बाकायदा संबंधित अधिकारी का फोन जरूर आया। उन्होंने कहा कि जिस सड़क की शिकायत की गई है, वह उनके अंडर में नहीं आती।
अब सवाल यह है कि जब सड़क उनके अंडर में नहीं आती थी तो फोन क्यों लगाया। इससे भी बड़ी बात यह है कि शिकायत होने के थोड़ी देर बाद उसे बंद (क्लोज) किस आधार पर कर दिया गया?
सूत्र की पड़ताल में आया सामने
यह वाक्या 'द सूत्र' के रिपोर्टर के साथ ही हुआ। 'द सूत्र' जनहित की पत्रकारिता का पक्षधर है। इसी मकसद से हमारी टीम ने राजधानी भोपाल में सरकारी सुविधा की पड़ताल की।
इसके लिए पीडब्ल्यूडी के लोकपथ ऐप को चुना गया और यह जानने की कोशिश की गई कि आम आदमी जब खराब सड़क की शिकायत करता है तो सिस्टम उसके साथ किस तरह पेश आता है।
पड़ताल में सामने आया कि शिकायत के समाधान से पहले ही उसे बंद कर दिया गया। यानी जिस सड़क की शिकायत की गई, उसकी समस्या अपनी जगह रही और सिस्टम ने शिकायत को ही खत्म कर दिया।
क्या है मामला?
भोपाल की खस्ताहाल सड़कों की पड़ताल करने के लिए 'द सूत्र' की टीम ने पीडब्ल्यूडी के लोकपथ एप को डाउनलोड किया। इसके बाद ऐप पर दर्ज सड़कों की पड़ताल की गई। सबसे पहले टीम पहुंची पुरानी जेल रोड से शब्बन चौराहे तक जाने वाली सड़क पर। यहां की सड़क पर बड़े गड्ढे हैं।
सड़क के बारे में जानकारी जुटाने पर पता चला कि 6-7 महीने से सड़क की हालत ऐसी ही है। लोकपथ ऐप लोकेशन के हिसाब से चलता है। हमारी लोकेशन के मुताबिक हम उसी सड़क पर खड़े थे, जो पीडब्ल्यूडी के अंडर आती है। इसके बाद हमने सड़क पर मौजूद गड्ढे की फोटो एप पर अपलोड की, और शिकायत का विवरण भी दर्ज कर दिया।
आधे घंटे में आया फोन
द सूत्र की शिकायत के आधे घंटे के अंदर संजय द्विवेदी नाम के अफसर का फोन आया। उन्होंने बताया कि ये सड़क उनके अंडर में नहीं आती है। 'द सूत्र' ने उन्हें बताया कि शिकायत लोकपथ ऐप पर की गई है। ये सड़क किसके अंडर में है, ये पता करना विभाग का काम है।
सड़क पीडब्ल्यूडी विभाग के ऐप पर दर्ज है। इसके बाद द्विवेदी ने कहा कि ऐप लोंगिट्यूड और लैटीट्यूड के हिसाब से चलता है। कभी कभी गलत सड़क को सिलेक्ट कर लेता है। शब्बन चौराहे तक जाने वाली सड़क सिटी 3 अफसर के अंडर में आती है, इसलिए हमारी शिकायत को सिटी 3 अफसर संतोष कुमार विश्वकर्मा को फॉरवर्ड कर दी गई है।
द्विवेदी की मानें तो सड़क का टेंडर हो चुका है। अक्टूबर से काम शुरू हो जाएगा। हालांकि, जब 'द सूत्र' ने ऐप को चेक किया, तो पता चला कि सड़क पर मौजूद गड्ढे वाली इमेज को दोबारा अपलोड कर शिकायत बंद कर दी गई है, जबकि अभी सड़क का काम शुरु नहीं हुआ है।
सड़क का जिम्मा किससे पास?
भोपाल की सड़कें मुख्य रूप से दो एजेंसियों के हवाले हैं। एक है नगर निगम और दूसरा है लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी। इसके अलावा मप्र सड़क विकास निगम भी सड़कों का निर्माण करता है।
पीडब्ल्यूडी के पास भोपाल में 268 सड़कें हैं। जिनकी कुल लंबाई 573 किलोमीटर है, लेकिन बारिश के बाद सड़कों की हालत चलने लायक नहीं है। ऊपर से मेट्रो और ओवरब्रिज के निर्माण ने बची कुची सड़कों की हालत भी बिगाड़ कर रखी है।
सड़कों की हालत को लेकर नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के बीच कई बार खींचतान हुई है। पीडब्ल्यूडी आरोप लगाता है कि निगम उसकी सड़कों को खराब करता है। ज्यादातर सड़कें डामर की हैं, पानी नहीं निकलता जिसकी वजह से सड़कें खराब होती हैं।
द सूत्र पहले भी उठा चुका है मामला... देखें लिंक
नगर निगम के पास कितनी सड़कें?
भोपाल नगर निगम के पास 4 हजार किलोमीटर से ज्यादा सड़कें होने का दावा है। एमपी नगर के साथ कई मुख्य सड़कें निगम के ही हवाले हैं। लेकिन निगम की सड़कों की हालत और ज्यादा खराब है।
डीबी मॉल से जिंसी चौराहे की तरफ जाने वाली सड़क पर काफी बड़े गड्ढे हैं। बारिश के बाद कीचड़ और पानी की वजह से यहां हादसे होने का डर लगा ही रहता है। भोपाल में अब बारिश बंद है। ऐसे में अब कितने दिनों में सड़कों की हालत सुधरती है, ये भी बड़ा सवाल है।
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