PWD में प्रमोशन फाइल में खेल, अफसरों के दाग छिपाने वाले SO नपे
समझें क्या है पूरा मामला...
- लोक निर्माण विभाग की डीपीसी में प्रमोशन फोल्डरों में गड़बड़ी मिली है।
- प्रमुख सचिव ने विभाग के अनुभाग अधिकारी को कार्यमुक्त कर दिया है।
- उनकी सेवाएं सामान्य प्रशासन विभाग को सौंप दी गई हैं।
- एई से ईई और एसई से सीई की डीपीसी अटकी हुई है।
- मुख्य सचिव ने फोल्डर वापस भेजकर दस्तावेज जांचने के निर्देश दिए।
लोक निर्माण विभाग यानी PWD (Public Works Department) में इंजीनियरों की पदोन्नति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने अनुभाग अधिकारी यानी SO (Section Officer) दयानंद उपाध्याय को एकतरफा कार्यमुक्त कर दिया है।
उनकी सेवाएं सामान्य प्रशासन विभाग यानी GAD (General Administration Department) को सौंप दी गई हैं। यह कार्रवाई प्रमोशन के लिए हुई डीपीसी यानी DPC (Departmental Promotion Committee) में गड़बड़ी सामने आने के बाद की गई है।
कहां मिली पहली गड़बड़ी
पीडब्ल्यूडी में इंजीनियरों के प्रमोशन के लिए कई फोल्डर डीपीसी के पास भेजे गए थे। इनकी जांच में विभागीय स्तर पर गड़बड़ी पाई गई। सबसे ज्यादा गड़बड़ी असिस्टेंट इंजीनियर यानी AE (Assistant Engineer) से एग्जीक्यूटिव इंजीनियर यानी EE (Executive Engineer) के प्रमोशन में मिली।
इन मामलों में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच की जानकारी फोल्डर में नहीं थी। इस वजह से डीपीसी के दौरान जांच से जुड़ी कोई जानकारी सामने नहीं आ पाई। यह चूक नियमों के खिलाफ मानी गई है।
सबसे बड़ा मामला कहां सामने आया
सबसे बड़ी गड़बड़ी सुपरिटेंडिंग इंजीनियर यानी SE (Superintending Engineer) से चीफ इंजीनियर यानी CE (Chief Engineer) की डीपीसी में मिली। इसमें मामला अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली यानी CR (Confidential Report) से जुड़ा था।
मूल दस्तावेजों और तारीख के हिसाब से फोल्डर में जो सीआर होना चाहिए था, वह अलग था। लेकिन मुख्य सचिव अनुराग जैन को जो फोल्डर भेजा गया, उसमें अधिकारी को 'क प्लस' ग्रेडिंग दी गई जानकारी सामने आई। यह अंतर डीपीसी बैठक के दौरान ही पकड़ में आ गया।
मुख्य सचिव ने क्या कार्रवाई की
तकनीकी शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने डीपीसी की बैठक के दौरान ही यह फोल्डर वापस भेज दिया। उन्होंने दस्तावेजों के दोबारा परीक्षण के सख्त निर्देश दिए। इसके बाद से अभी तक एई से सीई तक के पदों की डीपीसी नहीं हो पाई है। यह मामला विभाग में गंभीरता से लिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक दस्तावेजों की पूरी जांच नहीं होती, तब तक डीपीसी आगे नहीं बढ़ेगी।
कितने पद थे खाली
इस डीपीसी में एसई से सीई के 23 पदों के लिए प्रमोशन का समय तय किया गया था। लेकिन मूल्यांकन के दायरे में सिर्फ 21 एसई ही आ रहे थे। इन्हीं 21 अधिकारियों की पदोन्नति की सूची में शामिल होने की उम्मीद थी। पदों और पात्र अधिकारियों की संख्या में यह अंतर भी सवालों के घेरे में है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस अंतर पर भी अलग से जांच हो सकती है।
क्या है असली विवाद
विभागीय नियमों के मुताबिक डीपीसी से जुड़े नियम बहुत साफ हैं। जिन अधिकारियों की प्रमोशन पर विचार होना है, उनके खिलाफ चल रही किसी भी विभागीय जांच की जानकारी बैठक में रखनी जरूरी होती है। इसके अलावा अधिकारियों के मूल सीआर फोल्डर से कम से कम पांच साल की प्रविष्टियों का मिलान करना भी अनिवार्य है। इन्हीं दो नियमों में गड़बड़ी मिलने के बाद डीपीसी रद्द करनी पड़ी थी। यह पूरा मामला पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है।
एसओ पर ही क्यों गिरी गाज
सूत्रों के मुताबिक फोल्डर तैयार करने और डीपीसी के लिए भेजने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर अनुभाग अधिकारी की थी। दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी के आधार पर प्रमुख सचिव ने संबंधित एसओ को कार्यमुक्त करने का फैसला लिया। उनकी सेवाएं तुरंत प्रभाव से जीएडी को सौंप दी गईं। विभाग में अब यह देखा जाएगा कि गड़बड़ी में और कौन-कौन जिम्मेदार था।
आगे क्या हो सकता है
विभाग अब सभी लंबित डीपीसी फाइलों की दोबारा जांच कर सकता है। एई से सीई तक के सभी स्तर के दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल होने की संभावना है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक प्रमोशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। इससे कई इंजीनियरों की पदोन्नति फिलहाल अटकी रह सकती है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता के लिए यह कदम जरूरी था।
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