रिटायर IPS रघुवीर मीणा पर फर्जी जाति प्रमाण-पत्र का केस, जानें कैसे OBC से ST हुए
Sourabh Bhatnagar | Sept 19, 2026, 08:59 IST
raghuveer singh meena fake caste certificate case
भोपाल में रिटायर IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के मामले में FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि सरकारी शिक्षक रहते उनके रिकॉर्ड में OBC वर्ग दर्ज था। बाद में MPPSC में उन्होंने खुद को ST वर्ग का बताया और...
भोपाल में रिटायर्ड IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के मामले में केस दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ST वर्ग का प्रमाण-पत्र लगाकर MPPSC के जरिए DSP पद हासिल किया। इसके बाद उन्होंने सेवा से जुड़े दूसरे लाभ भी लिए।
पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने इस मामले में धोखाधड़ी, साजिश और लोक सेवक द्वारा गलत दस्तावेज तैयार करने जैसी धाराओं में FIR दर्ज की है। इसके साथ ही SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।
DSP बनने से पहले
जांच में रघुवीर सिंह मीणा की सरकारी सेवा से जुड़े पुराने रिकॉर्ड सामने आए हैं। पुलिस सेवा में आने से पहले वे मध्यप्रदेश में सरकारी शिक्षक के पद पर थे।
उस समय उनके दस्तावेजों में उनका वर्ग OBC दर्ज था। बाद में MPPSC में आवेदन के दौरान उन्होंने खुद को ST वर्ग का बताया।
इसी ST प्रमाण-पत्र के आधार पर उनका DSP पद पर चयन हुआ। अब जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि OBC से ST वर्ग में बदलाव कैसे हुआ और इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए।
जांच में सामने आया कि रघुवीर सिंह मीणा का ST जाति प्रमाण-पत्र वर्ष 1984 में विदिशा के आदिम जाति कल्याण विभाग से जारी हुआ था।
इस प्रमाण-पत्र और उससे जुड़े रिकॉर्ड की उच्च स्तरीय जांच कराई गई। जांच समिति ने प्रमाण-पत्र को अमान्य घोषित कर दिया।
जांच के दौरान मीणा के मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने से जुड़े दस्तावेजों पर भी सवाल उठे हैं। प्रमाण-पत्र जारी करने वाले कर्मचारियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
यह पूरा मामला गुना के राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी की शिकायत के बाद सामने आया है।
शिकायत मिलने के बाद शासन की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने रघुवीर सिंह मीणा के जाति प्रमाण-पत्र और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच की।
समिति की जांच में ST प्रमाण-पत्र अमान्य पाए जाने के बाद मामला पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा तक पहुंचा। अब सतर्कता शाखा ने इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस मामले में जांच का मुख्य बिंदु यह है कि सरकारी शिक्षक रहते हुए रिकॉर्ड में OBC दर्ज होने के बाद मीणा ने MPPSC में खुद को ST वर्ग का बताया।
जांच एजेंसी अब इस बदलाव से जुड़े सभी दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि ST प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका थी।
MP पुलिस में ट्रांसफर, 10 IPS समेत 137 पुलिस अधिकारी इधर से उधर, देखें लिस्ट
NSA जैसे गंभीर आदेश पर भी बिना जांच के साइन कर रहे IAS, IPS? HC ने खड़े किए सवाल
कौन बनेगा एमपी का अगला DGP? 1991 से 1994 बैच तक के 12 IPS अफसर रेस में
मध्य प्रदेश पुलिस सेवा के 7 अफसरों को मिला 2016 का आईपीएस बैच, आदेश जारी
रघुवीर मीणा | पुलिस मुख्यालय भोपाल | जाति प्रमाण पत्र | जाति प्रमाण पत्र केस | फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामला
पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने इस मामले में धोखाधड़ी, साजिश और लोक सेवक द्वारा गलत दस्तावेज तैयार करने जैसी धाराओं में FIR दर्ज की है। इसके साथ ही SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।
DSP बनने से पहले सरकारी शिक्षक थे, तब OBC वर्ग दर्ज था
उस समय उनके दस्तावेजों में उनका वर्ग OBC दर्ज था। बाद में MPPSC में आवेदन के दौरान उन्होंने खुद को ST वर्ग का बताया।
इसी ST प्रमाण-पत्र के आधार पर उनका DSP पद पर चयन हुआ। अब जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि OBC से ST वर्ग में बदलाव कैसे हुआ और इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए।
1984 में विदिशा से जारी हुआ था ST प्रमाण-पत्र
इस प्रमाण-पत्र और उससे जुड़े रिकॉर्ड की उच्च स्तरीय जांच कराई गई। जांच समिति ने प्रमाण-पत्र को अमान्य घोषित कर दिया।
जांच के दौरान मीणा के मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने से जुड़े दस्तावेजों पर भी सवाल उठे हैं। प्रमाण-पत्र जारी करने वाले कर्मचारियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच
शिकायत मिलने के बाद शासन की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने रघुवीर सिंह मीणा के जाति प्रमाण-पत्र और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच की।
समिति की जांच में ST प्रमाण-पत्र अमान्य पाए जाने के बाद मामला पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा तक पहुंचा। अब सतर्कता शाखा ने इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
OBC से ST वर्ग में बदलाव की भी जांच
जांच एजेंसी अब इस बदलाव से जुड़े सभी दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि ST प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका थी।
ये खबरें भी पढ़ें...
NSA जैसे गंभीर आदेश पर भी बिना जांच के साइन कर रहे IAS, IPS? HC ने खड़े किए सवाल
कौन बनेगा एमपी का अगला DGP? 1991 से 1994 बैच तक के 12 IPS अफसर रेस में
मध्य प्रदेश पुलिस सेवा के 7 अफसरों को मिला 2016 का आईपीएस बैच, आदेश जारी
रघुवीर मीणा | पुलिस मुख्यालय भोपाल | जाति प्रमाण पत्र | जाति प्रमाण पत्र केस | फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामला
पहले पास, फिर फेल! रिजल्ट की उलझन में फंसे छात्र, देर रात तक चलता रहा RDVV में प्रदर्शन
By Neel Tiwari
27% OBC आरक्षण पर दायर SLP में स्टे या अंतरिम राहत की मांग नहीं होने का दावा, OBC वर्ग के अधिवक्ताओं ने ही उठाए सवाल
By Neel Tiwari
27% आरक्षण पर सरकार को घेरने की तैयारी, जबलपुर के भेड़ाघाट में दो दिन जुटेंगे OBC संगठन
By Neel Tiwari
MP में 237 पर्यावरण मंजूरियों पर सवाल, SEIAA अध्यक्ष ने मुख्य सचिव से की अफसरों के निलंबन और CBI जांच की मांग
By Sumit Kumar
सरकारी डॉक्टर कर रहा था MD ड्रग्स की सप्लाई, 4 किलो कच्ची एमडी बरामद, लाखों का कैश और कार जब्त
By Jageshwar prasad
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें...27 फीसदी OBC आरक्षण मामले में SC पहुंची सरकार, विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन पर सवाल!
By Sandeep Kumar
27 फीसदी OBC आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची मध्य प्रदेश सरकार, स्पेशल लीव पिटिशन दायर
By Sumit Kumar