रील और रसूख के चक्कर में उड़ाईं कानून की धज्जियां, रायसेन किले से बस्ती पर दागी तोप

Amresh Kushwaha | Mar 07, 2026, 15:22 IST
raisen fort cannon firing viral video nhrc action
रायसेन किले से रील बनाने के लिए तोप दागने के मामले में NHRC ने कड़ा रुख अपनाया है। जानें 250 साल पुरानी परंपरा और मौजूदा विवाद की पूरी सच्चाई...

Raisen. सोशल मीडिया पर रील बनाने का चस्का और रसूख दिखाने की होड़ कभी-कभी कानूनी सीमाओं को लांघ जाती है। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक ऐसा ही मामला सामने आया है।



यहां ऐतिहासिक किले की प्राचीर से रिहायशी इलाके की ओर तोप दागने का वीडियो वायरल हुआ है। इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अब यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की चौखट तक पहुंच गया है।



तोप चलाने से जनजीवन को है खतरा

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि पुरातत्व विभाग के जरिए संरक्षित किले से इस तरह अवैध तोप चलाना जनजीवन को खतरे में डालने जैसा है।



आयोग ने स्थानीय प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाई है। उन्होंने कहा कि जो अफसर मंदिर में दर्शन रोकने के लिए मुस्तैद रहते हैं, वे इन शोहदों पर कार्रवाई करने में सुस्त क्यों हैं? अब आयोग दोषियों के साथ-साथ लापरवाह अफसरों को भी नोटिस भेजने की तैयारी में है।



250 साल से चली आ रही परंपरा

रायसेन में नवाबों के दौर से करीब 250 साल पहले एक परंपरा शुरू हुई थी। रमजान के महीने में सेहरी और इफ्तार के समय का संकेत देने के लिए तोप दागी जाती है। भोपाल से करीब 40 किलोमीटर दूर बसे इस कस्बे में आज भी मुस्लिम त्योहार कमेटी के युवक तोप को पहाड़ी की चोटी पर ले जाते हैं।



हालांकि, पहले यहां किले पर तैनात बड़ी तोप का इस्तेमाल होता था। वहीं, 1950 के दशक में किले के क्षतिग्रस्त होने के बाद से छोटी तोप का उपयोग किया जा रहा है।



शस्त्रागार से निकलती है तोप

हैरानी की बात यह है कि जिस तोप से धमाका किया जा रहा है, वह साल भर जिला शस्त्रागार में सुरक्षित रखी जाती है। रमजान के दौरान इसे बाहर निकाला जाता है। वर्तमान में इसमें करीब 300 ग्राम बारूद का उपयोग होता है।



आमतौर पर यह प्रक्रिया सिर्फ जानकारी देने के लिए होती है। वहीं, हाल ही में जिस तरह से इसे शक्ति दिखाने और रील बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, उससे सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।



आसपास की आबादी में फैल रही दहशत

परंपरा के मुताबिक, जैसे ही मस्जिद में लाल बत्ती जलती है, तोप दाग दी जाती है। वहीं, प्रियंक कानूनगो का कहना है कि इस प्रक्रिया से ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान हो रहा है। साथ ही, आसपास की आबादी में दहशत फैल रही है।



प्रियंक कानूनगो ने पुलिस को यह साफ-साफ कहा है कि FIR दर्ज करते वक्त ध्यान रखा जाए कि शोहदों ने इंस्टाग्राम पर कुछ पुराने वीडियो भी डाले हैं। इसे भी संज्ञान में लिया जाए, ताकि जांच में कोई चूक न हो।



ये खबर भी पढ़िए...



नकली परमिट कांड में आबकारी विभाग का एक्शन, सोम डिस्टलरीज ग्रुप रायसेन का लाइसेंस सस्पेंड



रायसेन पुल हादसे के बाद एक्शन में एमपी सरकार, MP के 45 खराब पुलों की होगी तत्काल मरम्मत



MP News: रायसेन में अचानक भरभरा कर गिरा 45 साल पुराना पुल, कई फीट नीचे गाड़ियों समेत गिरे लोग



प्रियंक कानूनगो को थाने में निरीक्षण के लिए एएसआई ने रोका, बोला- बिना पूछे नहीं आ सकते



Tags:
  • MP News
  • मध्यप्रदेश
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
  • NHRC
  • रायसेन
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
  • वीडियो वायरल
  • सोशल मीडिया
  • प्रियंक कानूनगो
  • स्थानीय प्रशासन
  • मुस्लिम त्योहार