संस्कारधानी जबलपुर में भी हैं "रामलला" का सिद्ध मंदिर, बाल रूप में विराजे हैं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम
Vikram Jain | Jan 21, 2024, 21:12 IST
संस्कारधानी जबलपुर में भी हैं "रामलला" का सिद्ध मंदिर, बाल रूप में विराजे हैं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम
जबलपुर में नर्मदा के गौरी घाट पर स्थित मंदिर में श्रीराम बाल रूप में विराजमान हैं।
वेंकटेश कोरी, JABALPUR. अयोध्या में रामलला की भव्य प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरा देश भगवान राम की भक्ति में डूबा हुआ है। अयोध्या धाम के भव्य समारोह और रामलला के आगमन की खुशियां मनाने के लिए संस्कारधानी जबलपुर में भी व्यापक तैयारियां की गई है। गली मोहल्लों से लेकर बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर सोमवार को कई धार्मिक कार्यक्रम किए जाएंगे। अयोध्या में रामलला की स्थापना की तैयारी पूरी हो चुकी है तो जबलपुर में भी रामलला के नाम पर एक सिद्ध मंदिर है। नर्मदा तट ग्वारी घाट पर बने इस रामलला मंदिर को लेकर भक्तों में गहरी आस्था है और वे अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस मंदिर में पहुंचते हैं और अर्जी लगाकर भगवान से अपनी कामना के पूरा होने की प्रार्थना करते हैं।
बाल रूप में भगवान श्रीराम
पुण्य सलिला मां नर्मदा के गौरी घाट पर स्थित सिद्ध पीठ श्री रामलला मंदिरमें यूं तो साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन अयोध्या में रामलला के भव्य प्राण प्रतिष्ठा को लेकर यहां खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सिद्ध पीठ रामलला मंदिर में भी सोमवार को कई अनुष्ठान किए जाएंगे।
मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य इंद्रभान महाराज और आचार्य प्रमोद तिवारी के मुताबिक साल 1969 की बात है जब स्वामी रामनिरंजनाचार्य नर्मदा किनारे ग्वारी घाट पहुंचे तब पूरा क्षेत्र वीरान जंगलों से घिरा हुआ था तब ध्यान करने के दौरान उन्हें रामलला ने नर्मदा के इसी तट पर तप करने का आदेश दिया था। मंदिर के भीतर आकर्षक राम दरबार सजाया गया है जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की बाल रूप की प्रतिमा स्थापित है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के इस बाल स्वरूप को देखने दूर दराज इलाकों से भी भक्तजन पहुंचते हैं।
बाल रूप में भगवान श्रीराम
पुण्य सलिला मां नर्मदा के गौरी घाट पर स्थित सिद्ध पीठ श्री रामलला मंदिरमें यूं तो साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन अयोध्या में रामलला के भव्य प्राण प्रतिष्ठा को लेकर यहां खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सिद्ध पीठ रामलला मंदिर में भी सोमवार को कई अनुष्ठान किए जाएंगे।
मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य इंद्रभान महाराज और आचार्य प्रमोद तिवारी के मुताबिक साल 1969 की बात है जब स्वामी रामनिरंजनाचार्य नर्मदा किनारे ग्वारी घाट पहुंचे तब पूरा क्षेत्र वीरान जंगलों से घिरा हुआ था तब ध्यान करने के दौरान उन्हें रामलला ने नर्मदा के इसी तट पर तप करने का आदेश दिया था। मंदिर के भीतर आकर्षक राम दरबार सजाया गया है जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की बाल रूप की प्रतिमा स्थापित है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के इस बाल स्वरूप को देखने दूर दराज इलाकों से भी भक्तजन पहुंचते हैं।
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