तीन साल से नहीं मिला न्याय, कलेक्टर कार्यालय में किसान ने खुद पर डाला पेट्रोल
ऐसे समझें पूरा मामला...
- जनसुनवाई में किसान ने खुद पर पेट्रोल डाला।
- दवाई से चार दिन में पूरी फसल बर्बाद हुई।
- तीन साल से अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे।
- सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टला।
- उपभोक्ता फोरम से निराकरण की उम्मीद जताई।
आमिन हुसैन@RATLAM. मध्यप्रदेश के रतलाम कलेक्ट्रेट (Ratlam Collectorate) में मंगलवार को जनसुनवाई (Jan Sunwai) के दौरान उस समय हड़कंप मच गया, जब एक पीड़ित किसान ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्महत्या का प्रयास (Suicide Attempt) किया।
मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। यह घटना किसान की फसल बर्बादी (Crop Destruction) और तीन साल की प्रशासनिक अनदेखी का दर्दनाक नतीजा है।
रतलाम जनसुनवाई में हड़कंप
मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में मंगलवार का दिन दर्दनाक घटना का गवाह बना। कलेक्ट्रेट परिसर में जनसुनवाई (Jan Sunwai) चल रही थी। इसी बीच एक परेशान किसान अचानक पेट्रोल की बोतल लेकर आ गया। उसने खुद पर पेट्रोल उड़ेल दिया और आत्मदाह का प्रयास किया।
मौके पर तैनात गार्ड और सुरक्षाकर्मी तुरंत हरकत में आए। उन्होंने किसान को दबोचकर बड़ी त्रासदी से बचा लिया। इस घटना से पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में अफरा-तफरी फैल गई।
किसान प्यार सिंह की पीड़ा
पीड़ित किसान का नाम प्यार सिंह है। उन्होंने बताया कि करीब तीन साल पहले उन्होंने खेती की थी। तीन बीघा जमीन पर लहसुन और दो बीघा पर प्याज बोया था। उन्होंने डाक के जरिए एक कंपनी से फसल रक्षक दवाई (Pesticide) मंगवाई थी।
दवाई के उपयोग के महज चार दिन बाद पूरी फसल नष्ट हो गई। इस फसल बर्बादी (Crop Destruction) से उन्हें भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। एक मेहनतकश किसान रातोंरात कर्ज में डूब गया।
तीन साल से कर रहे अनदेखी
फसल नष्ट होने के बाद किसान प्यार सिंह ने कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। प्रशासन ने जांच टीम भी गठित की। लेकिन जांच पूरी होने के बाद भी दवाई कंपनी (Pesticide Company) पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
तीन वर्षों तक किसान अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटता रहा। हर बार आश्वासन मिला, लेकिन न्याय नहीं मिला। लगातार अनदेखी और आर्थिक तंगी ने उन्हें टूटने पर मजबूर कर दिया। अंततः उन्होंने यह खतरनाक कदम उठाने की कोशिश की।
जानिए प्रशासन का पक्ष
एडीएम डॉ. शालिनी श्रीवास्तव ने बताया कि किसान जनसुनवाई का निर्धारित समय समाप्त होने के बाद कार्यालय पहुंचे थे। शोर-शराबे की आवाज सुनकर अधिकारियों को घटना की जानकारी हुई।
एडीएम ने स्वीकार किया कि उस समय ऐसे मामलों में मुआवजे (Compensation) का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। उन्होंने बताया कि किसान की शिकायत दर्ज कर ली गई है। अधिकारियों ने उन्हें उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) का रास्ता सुझाया है।
उपभोक्ता फोरम में उम्मीद की किरण
प्रशासन के अनुसार इस मामले का समाधान उपभोक्ता फोरम से संभव है। किसान ने वहाँ पहले ही शिकायत दर्ज करा रखी है। अधिकारियों का कहना है कि फोरम से राहत मिल सकती है। लेकिन सवाल यह है कि तीन साल तक यह रास्ता क्यों नहीं बताया गया। किसान आंदोलन (Farmer Protest) और किसानों की बदहाली का यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासनिक संवेदनशीलता की यह परीक्षा की घड़ी है।
किसानों की बदहाली का सवाल
यह घटना अकेले प्यार सिंह की कहानी नहीं है। यह उन लाखों किसानों की पीड़ा है जो हर साल फसल नुकसान (Crop Loss) झेलते हैं। नकली या घटिया कीटनाशक दवाइयां किसानों की जिंदगी बर्बाद कर रही हैं।
प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती उनके जख्मों पर नमक छिड़कती है। किसान सुरक्षा (Farmer Protection) के लिए ठोस कानूनी प्रावधान और त्वरित न्याय की जरूरत है। यह घटना सरकार और समाज दोनों के लिए चेतावनी है।
FAQ
- रतलाम प्रशासन ने किसान की शिकायत पर क्या कार्रवाई की?
किसान की शिकायत पर कलेक्टर कार्यालय ने जांच टीम तो गठित की, लेकिन जांच के बाद भी दवाई कंपनी के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। एडीएम डॉ. शालिनी श्रीवास्तव ने बताया कि उस समय ऐसे मामलों में मुआवजे (Compensation) का स्पष्ट प्रावधान नहीं था। घटना के बाद प्रशासन ने किसान को उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में जाने की सलाह दी है, जहां किसान पहले ही शिकायत दर्ज करा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि फोरम के माध्यम से न्याय मिलने की संभावना है। - किसानों को फसल बर्बाद होने पर कहां शिकायत करनी चाहिए?
यदि किसी घटिया या नकली कीटनाशक दवाई (Pesticide) के कारण किसान की फसल बर्बाद हो जाए, तो वे सबसे पहले जिला कृषि विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराएँ। इसके साथ ही उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में भी मामला दायर किया जा सकता है, जहां दवाई कंपनी से मुआवजे की मांग की जा सकती है। किसान सुरक्षा (Farmer Protection) के लिए राज्य सरकार की हेल्पलाइन और जनसुनवाई (Jan Sunwai) का भी उपयोग किया जा सकता है। समय रहते शिकायत दर्ज कराना और सभी दस्तावेज सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
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