नवनियुक्त पुजारी पर जानलेवा हमला, पुरानी समिति ने बूढ़े बालाजी मंदिर में जड़ा ताला

Jitendra Shrivastava | May 26, 2026, 16:31 IST
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budhe balaji mandir
Photograph: (THESOOTR)

GUNA. गुना के बूढ़े बालाजी मंदिर में नवनियुक्त पुजारी के गले में फंदा डालकर घसीटने का मामला सामने आया है। पुरानी समिति पर करोड़ों के घोटाले और तानाशाही के आरोप लगाए गए हैं।

समझें पूरा मामला...

  • पुजारी के गले में डाला गमछे का फंदा।
  • गर्भगृह से घसीटकर मंदिर से बाहर फेंका।
  • 10 साल का आय-व्यय ब्यौरा नहीं दिया।
  • 18 दुकानें रिश्तेदारों में मनमाने तरीके से बांटी।
  • एफआईआर न हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी।
मध्यप्रदेश के गुना शहर में बूढ़े बालाजी मंदिर (Budhe Balaji Temple Guna) से एक भयावह वीडियो सामने आया है। नवनियुक्त पुजारी सुरेश शर्मा को पुरानी समिति के पूर्व पदाधिकारियों ने गर्भगृह में पूजा के दौरान गले में फंदा डालकर बाहर घसीटा। इस मंदिर विवाद (Temple Dispute) के पीछे करोड़ों रुपए का वित्तीय घोटाला (Financial Scam) और सालों की तानाशाही छुपी है।

बालाजी मंदिर में पुजारी पर हमला

मध्यप्रदेश के गुना में धार्मिक आस्था का केंद्र बूढ़े बालाजी मंदिर (Budhe Balaji Temple) विवादों में घिर गया है। नवनियुक्त पुजारी सुरेश शर्मा रविवार को पूजा के लिए पहुंचे थे। गर्भगृह में पूजा के दौरान उन पर पुरानी समिति के लोगों ने हमला किया।

वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि दबंगों ने पुजारी के गले में गमछा डाला। उन्हें बेरहमी से घसीटकर मंदिर से बाहर फेंका गया। पीड़ित पुजारी हाथ जोड़कर रहम की भीख मांगते रहे। यह दृश्य पूरे गुना की जनता को झकझोर गया।

BUDHE BALAJI
BUDHE BALAJI


नई समिति का गठन अस्वीकार

मंदिर प्रबंधकारिणी समिति (Temple Management Committee) का चुनाव 28 अप्रैल 2026 को हुआ था। नई समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश बंसल और सचिव रामकृष्ण श्रीवास्तव चुने गए। समिति ने 24 मई को सुरेश शर्मा को मुख्य पुजारी नियुक्त किया।

यह नियुक्ति पूरी तरह आधिकारिक और वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई, लेकिन पुरानी समिति ने इस नियुक्ति को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। पूर्व अध्यक्ष गजानंद अवस्थी, उनके बेटों और पोतों ने हमले को अंजाम दिया। यह हमला धर्म की आड़ में सत्ता की लड़ाई बन गया है।

मंदिर के कपाट पर लगा ताला

हमले के बाद आरोपी मंदिर के कपाट बंद कर चाबियां घर ले गए। रविवार की रात सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन से वंचित रह गए। इससे धर्मप्राण जनता में भारी रोष उत्पन्न हुआ।

यह कृत्य न केवल अमानवीय है बल्कि धार्मिक अपराध (Religious Crime) भी है। नई समिति ने कलेक्ट्रेट और एसपी दफ्तर में इसकी शिकायत दर्ज कराई। प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।

नई समिति के सचिव रामकृष्ण श्रीवास्तव ने बताया कि पूर्व अध्यक्ष ने मंदिर की चाबियां अपने कब्जे में ले लीं। विवाद खत्म होते ही वे मंदिर के कपाट लगाकर चाबियां लेकर घर चले गए। इस मनमानी कार्रवाई का सीधा असर श्रद्धालुओं पर पड़ा।

लाखों भक्तों की आस्था का यह पवित्र केंद्र समय से पहले बंद करना पड़ा। सामान्यतः देर रात तक खुले रहने वाला यह मंदिर रात 8 बजे ही बंद हो गया। भक्त दरवाजे पर आकर लौटने को मजबूर हुए।

इस घटना के बाद पीड़ित पुजारी और नई समिति के पदाधिकारी न्याय की मांग लेकर उठ खड़े हुए। उन्होंने स्थानीय कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

इसके साथ ही कलेक्टर कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी औपचारिक प्रार्थना-पत्र सौंपा गया। शिकायत में आरोपी पूर्व पदाधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई है। नई समिति का स्पष्ट कहना है कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

करोड़ों के घोटाले का खुलासा

मंदिर ट्रस्ट पर सालों से काबिज पुरानी समिति पर गंभीर आर्थिक अनियमितताओं (Financial Irregularities) के आरोप हैं। नई समिति के मुताबिक, 2015-16 से 2025-26 तक का कोई आय-व्यय लेखा-जोखा नहीं दिया गया।

मंदिर की 18 दुकानों में से कीमती दुकानें मनमाने तरीके से रिश्तेदारों को बांट दी गईं। इसमें पूर्व अध्यक्ष के बेटों और पोतों को सीधे फायदा पहुंचाया गया। इसे मंदिर संपत्ति का दुरुपयोग (Misuse of Temple Property) कहा जा रहा है।

भवन और पेड़ों के अवैध सौदे

पूर्व समिति पर मानस भवन की लाखों रुपए की आमदनी हड़पने का आरोप है। परिसर के हरे-भरे पेड़ों को अवैध रूप से काटकर बेचा गया। यह मामला एसडीएम कार्यालय में जांच के लिए लंबित है। पर्यावरण और धार्मिक संपत्ति दोनों को नुकसान पहुंचाने का यह मामला गंभीर है। इन सभी मुद्दों पर नई समिति ने प्रशासन से जांच की मांग की है।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

नई समिति और गुना के सकल समाज ने प्रशासन को चेतावनी दी है। यदि आरोपियों पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

धार्मिक स्थल पर हुई इस हिंसा (Violence in Temple) को लेकर समाज में भारी आक्रोश है। गुना की जनता न्याय की मांग को लेकर एकजुट हो रही है। यह मामला अब केवल मंदिर विवाद नहीं रहा, यह कानून-व्यवस्था का प्रश्न बन गया है।

FAQ

  1. बूढ़े बालाजी मंदिर गुना में पुजारी पर हमला क्यों हुआ?
    गुना के बूढ़े बालाजी मंदिर में नई प्रबंधकारिणी समिति ने 24 मई 2026 को सुरेश शर्मा को मुख्य पुजारी नियुक्त किया था। जब वे रविवार को पूजा करने पहुंचे, तो पुरानी समिति के पूर्व अध्यक्ष गजानंद अवस्थी और उनके परिजनों ने उनके गले में गमछे का फंदा डालकर उन्हें गर्भगृह से बाहर घसीट दिया। इस हमले के पीछे मंदिर ट्रस्ट पर वर्षों से बनी हुई पुरानी समिति की सत्ता और करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) को बचाने की मंशा बताई जा रही है।
  2. बूढ़े बालाजी मंदिर ट्रस्ट पर कौन-से वित्तीय घोटाले के आरोप हैं?
    नई समिति के अनुसार, पुरानी समिति ने वर्ष 2015-16 से 2025-26 तक पिछले दस वर्षों का कोई भी आय-व्यय का हिसाब नहीं दिया है। मंदिर की 18 दुकानों को मनमाने तरीके से पूर्व पदाधिकारियों के रिश्तेदारों और पोतों को सौंप दिया गया। इसके अलावा मानस भवन की लाखों रुपये की आमदनी हड़पने और परिसर के पेड़ों को अवैध रूप से काटकर बेचने के आरोप भी पूर्व अध्यक्ष पर हैं। यह मामला एसडीएम कार्यालय में जांच के लिए लंबित है।
  3. गुना मंदिर विवाद में आगे क्या होगा?
    नई प्रबंधकारिणी समिति ने कलेक्ट्रेट और एसपी दफ्तर में हमले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। समिति ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि आरोपी पूर्व पदाधिकारियों पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई तो गुना का सकल समाज उग्र आंदोलन करेगा। श्रद्धालुओं को दर्शन से वंचित करना और पुजारी पर हुई हिंसा (Temple Violence) ने पूरे जिले में भारी रोष पैदा किया है। प्रशासन का तत्काल हस्तक्षेप ही इस विवाद को सुलझा सकता है।
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