EWS अभ्यर्थियों को आयु सीमा में राहत, अब MPPSC में 40 पार भी कर सकेंगे आवेदन, इंदौर हाईकोर्ट ने दी राहत

मध्यप्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के युवाओं के लिए इंदौर हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी। अब EWS वर्ग के 40 वर्ष से अधिक आयु वाले युवा राज्य सेवा परीक्षा में आवेदन कर सकेंगे।

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Neel Tiwari
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Now even those over 40 can apply in MPPSC Indore High Court gives relief

Photograph: (the sootr)

News in short

  • MPPSC राज्य सेवा परीक्षा–2026 में EWS को आयु छूट न मिलने पर हाईकोर्ट का हस्तक्षेप।
  • इंदौर निवासी अभिषेक तिवारी सहित तीन याचिकाकर्ताओं ने विज्ञापन को दी चुनौती।
  • जस्टिस जयकुमार पिल्लई की सिंगल बेंच ने दी अंतरिम राहत।
  • EWS अभ्यर्थियों को 40 वर्ष के बाद भी आवेदन की अनुमति।
  • कोर्ट ने असमानता को बताया संविधान के समानता सिद्धांत के खिलाफ। 

News in Detail

मध्यप्रदेश में राज्य सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के युवाओं के लिए हाईकोर्ट से बड़ी राहत सामने आई है। इंदौर हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी की राज्य सेवा परीक्षा–2026 में EWS अभ्यर्थियों को आयु सीमा के कारण बाहर करने की प्रक्रिया पर हस्तक्षेप किया है।

कोर्ट ने अंतरिम आदेश देकर 40 वर्ष से अधिक आयु वाले EWS याचिकाकर्ताओं को प्रोविजनल रूप से आवेदन और चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दे दी है। हालांकि, उनका सिलेक्शन कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

विवादित विज्ञापन से खड़ा हुआ सवाल

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा 31 दिसंबर 2025 को जारी विज्ञापन क्रमांक 29/2025 के तहत राज्य सेवा परीक्षा–2026 के लिए गैर-वर्दीधारी पदों की अधिकतम आयु सीमा 1 जनवरी 2026 को 40 वर्ष तय की गई थी। इस विज्ञापन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाएं, दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के लाभार्थियों को आयु में छूट दी गई, लेकिन केवल EWS वर्ग को पूरी तरह बाहर रखा गया।

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तीन याचिकाकर्ताओं ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

इस असमानता को चुनौती देते हुए इंदौर निवासी अभिषेक तिवारी सहित तीन याचिकाकर्ताओं ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विकास मिश्रा और अधिवक्ता धीरज तिवारी ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि योग्य होने के बावजूद EWS अभ्यर्थियों को केवल 1 से 3 वर्ष अधिक आयु होने के कारण ऑनलाइन पोर्टल पर ही अयोग्य घोषित कर दिया जा रहा है।

बिना सुनवाई के बाहर किया जा रहा EWS वर्ग

अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि शासन के परिशिष्ट नियमों के अनुसार लगभग हर वर्ग को किसी न किसी रूप में आयु सीमा में छूट दी जाती रही है। लेकिन EWS वर्ग को जानबूझकर इस सुविधा से वंचित रखा गया, जिससे यह आरक्षण केवल कागजी बनकर रह गया और वास्तविक लाभ से हजारों युवा वंचित हो गए।

संविधान के समानता सिद्धांत का उल्लंघन

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि केवल EWS वर्ग को आयु छूट से बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता के सिद्धांत का खुला उल्लंघन है। जब सामाजिक और अन्य आरक्षित वर्गों को छूट दी जा सकती है, तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को इससे अलग रखना न्यायसंगत नहीं है।

राजस्थान बना मजबूत उदाहरण

मामले को मजबूती तब मिली जब अदालत के समक्ष राजस्थान का उदाहरण रखा गया। बताया गया कि राजस्थान में भर्ती एजेंसियां, पुरुष EWS अभ्यर्थियों को 5 वर्ष, महिला EWS अभ्यर्थियों को 10 वर्ष की आयु छूट दे रही हैं। राजस्थान लोक सेवा आयोग और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने इस आधार पर नए आवेदन भी आमंत्रित किए हैं।

लास्ट डेट से पहले राहत जरूरी थी

कोर्ट को यह भी बताया गया कि यदि आज आवेदन की अंतिम तिथि तक राहत नहीं दी जाती, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया समाप्त हो जाती और याचिका निष्फल हो जाती। ऐसी स्थिति में EWS अभ्यर्थियों को नुकसान होता और वे हमेशा के लिए प्रतियोगी प्रक्रिया से बाहर हो जाते।

जस्टिस पिल्लई की सिंगल बेंच का आदेश

इंदौर हाईकोर्ट में जस्टिस जयकुमार पिल्लई की सिंगल बेंच ने सभी तथ्यों और तर्कों पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता EWS अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता EWS उम्मीदवारों को प्रोविजनल रूप से आवेदन करने और चयन प्रक्रिया में भाग लेने दिया जाए।

हजारों युवाओं के भविष्य को मिलेगी नई दिशा

कानूनी जानकारों के अनुसार यह आदेश केवल एक भर्ती से जुड़ी राहत नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा न्यायिक हस्तक्षेप है। आज फॉर्म भरने की लास्ट डेट होने के कारण इस आदेश का फायदा याचिकाकर्ताओं के अलावा अन्य ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को नहीं मिल सकेगा। लेकिन इस मामले में होने वाले अंतिम फैसले से उन हजारों युवाओं को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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कागजी आरक्षण नहीं, वास्तविक समान अवसर का संदेश

हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि आरक्षण तभी सार्थक है, जब उसके साथ समान अवसर भी सुनिश्चित किया जाए। फिलहाल तो यह राहत केवल तीन याचिकाकर्ताओं तक सीमित है लेकिन इस पर आने वाला अंतिम फैसला EWS आरक्षण को केवल कागजी अधिकार बनने से बचाते हुए उसे वास्तविक अर्थ और प्रभाव देगा।

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