नए साल में आएगा आरएसएस का नया रूप, एमपी-राजस्थान में ये होगा बदलाव
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष में संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव कर रहा है। नए साल यानी 2027 में यह बदलाव नज़र आने लगेगा। हरियाणा के समलखा में हुई संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में हुआ यह फैसला अब लागू होने जा रहा है। इसके तहत पुराने प्रांत आधारित ढांचे की जगह छोटे संभागों को अधिक जिम्मेदारी देने की योजना है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश और राजस्थान में भी संगठनात्मक पुनर्गठन किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश में तीन प्रांतों की जगह सात संभाग:
मध्यप्रदेश में RSS की मौजूदा व्यवस्था में मध्य भारत, मालवा और महाकौशल तीन प्रांत हैं। नई व्यवस्था में यह तीन-प्रांत वाला ढांचा समाप्त कर पूरे राज्य के लिए एक प्रदेश स्तरीय व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके नीचे भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, सागर, जबलपुर और रीवा संभाग होंगे। प्रत्येक संभाग की अपनी कार्यसमिति होगी और संगठनात्मक कामकाज में उसे महत्वपूर्ण भूमिका मिलेगी।
संभाग के नीचे अन्य इकाइयां:
नई व्यवस्था में विभाग, जिला और तहसील स्तर की मौजूदा इकाइयां बनी रहेंगी। इनके ऊपर संभाग की नई इकाई काम करेगी। प्रदेश स्तर पर प्रदेश कार्यसमिति समन्वय की भूमिका निभाएगी। संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक इसका उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया को जमीनी स्तर के करीब लाना और संगठनात्मक काम को अधिक प्रभावी बनाना है।
मालवा भी दो हिस्सों में:
मालवा क्षेत्र में भी पुनर्गठन किया जा रहा है। संघ की जानकारी के मुताबिक मौजूदा मालवा प्रांत को इंदौर और उज्जैन संभाग में बांटा जाएगा। इससे बड़े भौगोलिक क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों को संभाग स्तर पर संचालित करने का रास्ता खुलेगा। मध्यप्रदेश में यह बदलाव संघ के कामकाज को छोटे भौगोलिक क्षेत्रों में बांटने की व्यापक राष्ट्रीय योजना का हिस्सा है। देशभर में मौजूदा 46 प्रांतों की जगह 85 से अधिक संभाग बनाने की योजना सामने आई है।
राजस्थान में तीन से बढ़कर पांच संभाग:
राजस्थान में भी संघ ने संगठनात्मक विस्तार किया है। यहां पहले जयपुर, जोधपुर और चित्तौड़गढ़ तीन संभाग थे। अब कोटा और बीकानेर को नए संभाग के रूप में जोड़ा गया है। इस तरह राजस्थान में RSS के संभागों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
नए संभागों के गठन का उद्देश्य राज्य में संघ के संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत और विस्तृत करना है। उनके मुताबिक राजस्थान में संघ की गतिविधियां करीब 7,910 स्थानों तक पहुंच चुकी हैं।
फैसले के पीछे विकेंद्रीकरण पर जोर:
समालखा की बैठक के बाद सामने आए बदलावों से स्पष्ट है कि संघ अब बड़े प्रांतों के बजाय छोटे संभागों के जरिए संगठनात्मक काम को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। मध्यप्रदेश में जहां तीन प्रांतों को सात संभागों की व्यवस्था में बदला जा रहा है, वहीं राजस्थान में मौजूदा तीन संभागों में दो नए संभाग जोड़े गए हैं।संघ की ओर से इस पुनर्गठन के पीछे विकेंद्रीकरण, बेहतर समन्वय, तेज निर्णय प्रक्रिया और संगठन के जमीनी विस्तार जैसे उद्देश्य बताए गए हैं। यह बदलाव संघ के शताब्दी वर्ष में चल रहे संगठन विस्तार अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
FAQ
- मध्यप्रदेश में RSS के कितने संभाग बनाए जाएंगे?
नई व्यवस्था में मध्यप्रदेश को 7 संभागों में बांटने की योजना है—भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, सागर, जबलपुर और रीवा। - राजस्थान में RSS के कितने संभाग होंगे?
राजस्थान में RSS के संभागों की संख्या तीन से बढ़कर पांच करने की जानकारी सामने आई है। कोटा और बीकानेर को नए संभाग के रूप में जोड़ा गया है। - RSS देशभर में कितने संभाग बनाने की योजना पर काम कर रहा है?
रिपोर्टों के अनुसार RSS देशभर में मौजूदा करीब 46 प्रांतों की जगह 85 से अधिक संभाग बनाने की दिशा में संगठनात्मक पुनर्गठन कर रहा है।
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