सहारा घोटाले की जांच CID के हाथ, एमपी के 9.66 लाख निवेशकों के 6 हजार 689 करोड़ फंसे
News in Short
- मध्यप्रदेश में सहारा की 75 पुरानी शिकायतों पर CID ने जांच शुरू की है।
- प्रदेश के 9.66 लाख निवेशकों के 6 हजार 689 करोड़ रुपए सहारा में फंसे हैं।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब तक सिर्फ 355 करोड़ लौटाए जा सके हैं।
- सीआईडी ने 12 टीमें भेजीं, 123 एफआईआर पिछले 6 महीनों में दर्ज हुई है।
- ईडी (ED) 312 एकड़ जमीन सौदों की जांच अलग से कर रहा है।
News In Detail
4 साल बाद CID ने शुरू की जांच
मध्यप्रदेश पुलिस की विशेष शाखा सीआईडी ने सहारा समूह से जुड़ी 75 शिकायतों पर आखिरकार जांच शुरू कर दी है। ये शिकायतें 4 साल से फाइलों में दबी पड़ी थीं। अब सीआईडी ने 12 टीमें प्रदेशभर में भेजी हैं। ये टीमें उन निवेशकों तक पहुंचेंगी जो अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने का इंतजार कर रहे हैं।
9.66 लाख परिवारों का दर्द
प्रदेश के 9.66 लाख निवेशकों ने सहारा की योजनाओं में अपने पैसे लगाए थे। इनमें से ज्यादातर छोटे शहरों और गांवों के लोग हैं। कुल 6 हजार 689 करोड़ रुपए इन निवेशकों के फंसे हैं। अब तक इस पूरी रकम में से सिर्फ 355 करोड़ रुपए ही वापस मिल सके हैं।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि 9.66 लाख निवेशकों में से सिर्फ 1.55 लाख आवेदकों ने ही रिफंड की प्रक्रिया में आवेदन किया है। बाकी लोग या तो जानकारी के अभाव में हैं या प्रक्रिया जटिल होने की वजह से पीछे रह गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और CRCS पोर्टल
सुप्रीम कोर्ट ने 29 मार्च 2023 को आदेश दिया था कि सहारा-सेबी खाते से पांच हजार करोड़ रुपए निवेशकों को लौटाए जाएं। इस पर केंद्र सरकार ने सीआरसीएस (CRCS: Central Registrar of Cooperative Societies) पोर्टल शुरू किया था। साल 2025-26 के पहले चरण में 50 लाख रुपए तक का भुगतान किए जाने की योजना है।
नई व्यवस्था में 10 लाख रुपए तक के केस में केवल ऑनलाइन आवेदन और 30 दिन में जांच के बाद 45 दिन में भुगतान का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, मुश्किल यह है कि अब भी 90 फीसदी से ज्यादा निवेशकों के रुपए नहीं मिल पाए हैं।
6 जिलों में 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी
सीआईडी के आंकड़ों के मुताबिक टीकमगढ़, विदिशा, गुना, अशोकनगर, सागर और मैहर जिलों में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। इनमें से चार जिलों, टीकमगढ़, विदिशा, अशोकनगर और दमोह में 11 केसों में 42 करोड़ रुपए की ठगी की अलग से जांच शुरू हुई है। पिछले छह महीनों में कुल 123 एफआईआर सहारा के खिलाफ दर्ज की जा चुकी हैं।
ED की अलग से जमीन जांच
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (ED: Enforcement Directorate) ने भी इस मामले में अपनी जांच शुरू की है। ईडी 312 एकड़ जमीन के सौदों की जांच कर रही है। पुलिस की विशेष शाखा सीआईडी इन जमीन सौदों में सहारा से जुड़ी कंपनियों की भूमिका देखेगी। इन जमीनों के सौदे ओने-पौने दाम में किए गए और बाद में उन पर निवेशकों का पैसा लगाया गया था।
कौन सी कंपनियां हैं दोषी?
इस पूरे मामले में सहारा की सिर्फ मुख्य कंपनी नहीं बल्कि उससे जुड़ी कई अन्य कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं। कैप्सेज चिटफंड (Capsej Chitfund) लोगों को दोगुना मुनाफे का वादा कर उनके रुपए बटोरती और भाग गई। परिवार डेयरी चिटफंड (Parivar Dairy Chitfund) डेयरी और कृषि क्षेत्र में निवेश के नाम पर गलत रिटर्न का झांसा देती थी। सक्षम चिटफंड (Saksham Chitfund) रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर अवैध मुनाफे का दावा कर रुपए बटोरती थी।
पीड़ितों के लिए दो रास्ते
सीआईडी पीड़ित निवेशकों की मदद के लिए दो तरह से काम कर रही है। पहला, केंद्र सरकार के सीआरसीएस पोर्टल पर रजिस्टर न करने वालों को यह प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। दूसरा, बाकी रकम की वापसी के लिए सीआईडी जांच के बाद आपराधिक कार्रवाई करेगी। जिलेवार रिपोर्ट तैयार होगी और करीब 4 जिलों की जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
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