संजीवनी क्लीनिक बना घोटाले का अड्डा! CMHO सस्पेंड, अब पूरी चेन बेनकाब
News in short
- संजीवनी क्लीनिकों में कंप्यूटर-प्रिंटर खरीदी में बड़ा फर्जीवाड़ा।
- CMHO संजय मिश्रा पहले ही निलंबित।
- स्टोर कीपर नीरज कौरव निलंबित, DPM व फार्मासिस्ट हटाए गए।
- 93 लाख का भुगतान बिना सामग्री के किया गया।
- जांच रिपोर्ट भोपाल भेजी गई, एफआईआर की तैयारी।
News in detail
फर्जी खरीदी से करोड़ों का खेल
मामला CMHO कार्यालय में फर्जी देयकों के जरिए निजी फर्म को भुगतान से शुरू हुआ। शिकायत मिलने पर कलेक्टर ने जांच कराई। जांच में सामने आया कि भोपाल की निजी कंपनी को 12 फर्जी बिलों के जरिए 93 लाख 4 हजार 998 रुपये का भुगतान किया गया। यह भुगतान बिना किसी सामग्री की आपूर्ति के किया गया था। अब आगे की जांच में संजीवनी क्लीनिक के नाम पर की गई फर्जी खरीदी भी सामने आ रही है।
पहले कागजों में खरीदे कंप्यूटर और अब प्रिंटर
प्रारंभिक जांच में 20 संजीवनी क्लीनिकों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। दस्तावेजों में कंप्यूटर खरीदे गए, लेकिन अधिकारी मौके पर पहुंचे तो कंप्यूटर नहीं मिले। हैरानी की बात यह है कि इन कंप्यूटरों के लिए हाल ही में प्रिंटर भी खरीदे गए। इस खुलासे ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भौतिक सत्यापन में चौंके अधिकारी
जांच टीम जब जमीनी स्तर पर पहुंची तो हालात देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। कागजों में दर्शाई गई सुविधाएं और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर पाया गया। जांच की बारीकी से यह संकेत मिल रहे हैं कि प्रशासन पूरे मामले की तह तक जाएगा। दोषियों को बख्शने की कोई तैयारी नहीं है।
स्टोरकीपर तक गिर चुकी है गाज
इस मामले में सबसे पहले CMHO डॉ. संजय मिश्रा को निलंबित किया गया। फिर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने फार्मासिस्ट नीरज कौरव को निलंबित किया। साथ ही, जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्य तिवारी और फार्मासिस्ट जवाहर लोधी को CMHO कार्यालय से हटाकर अन्यत्र पदस्थ किया गया।
जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज
जिला प्रशासन अब पुख्ता साक्ष्य जुटाकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होते ही इस मामले में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर बड़ी चोट साबित हो सकती है।
स्वास्थ्य बजट को लूटने पर उतारू अधिकारी
संजीवनी क्लीनिक (Sanjeevani Clinic ) जैसी योजनाएं जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए शुरू की गई थीं। लेकिन इन योजनाओं में गड़बड़ियां सामने आने से यह साफ हो रहा है कि अधिकारियों का उद्देश्य विभाग के बजट को लूटना था। यह घोटाला पूरे सिस्टम की नीयत पर सवाल उठाता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद कितने दोषियों पर कार्रवाई होती है और क्या जनता को उसका हक मिलता है या नहीं।
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