सौरभ शर्मा मनी लॉन्ड्रिंग केस: मां और पत्नी समेत 12 पर आरोप तय, कोर्ट ने ईडी से मांगा जवाब

Amresh Kushwaha | Apr 19, 2026, 12:20 IST
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मध्यप्रदेश के चर्चित आरटीओ सिपाही सौरभ शर्मा मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट ने मां और पत्नी समेत 12 पर आरोप तय किए हैं। 550 करोड़ की संपत्ति और 52 किलो सोने की बरामदगी ने हड़कंप मचा दिया है।

मध्यप्रदेश के बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग केस में विशेष न्यायालय ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। कोर्ट ने सौरभ, उसकी पत्नी और मां सहित कुल 12 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।



रिश्तेदारों और कंपनियों का फैला जाल

प्रवर्तन निदेशालय ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में सौरभ शर्मा के साथ-साथ उसके सहयोगी चेतन सिंह गौर, शरद जायसवाल, साले रोहित तिवारी, पत्नी दिव्या तिवारी, मां उमा शर्मा, जीजा विनय हासवानी और ड्राइवर प्यारे लाल केवट को नामजद किया है। जांच एजेंसी ने कोर्ट में जो चालान पेश किया है, उसमें न केवल व्यक्ति बल्कि 4 संदिग्ध कंपनियां भी शामिल हैं, जिनके जरिए काले धन को सफेद करने का खेल खेला जा रहा था।



लावारिस कार और 52 किलो सोने का रहस्य

इस केस की सबसे चौंकाने वाली कड़ी वह लावारिस इनोवा कार थी, जो छापेमारी के दौरान भोपाल में मिली थी। जब जांच एजेंसी ने इस गाड़ी की तलाशी ली, तो कार के अंदर से 11 करोड़ रुपए नकद और 52 किलो सोना बरामद हुआ था। जांच में यह साफ हो गया कि इस कार का सीधा संबंध सौरभ के नेटवर्क से था। साथ ही, इसका रजिस्ट्रेशन उसके करीबी चेतन सिंह गौर के नाम पर था।



7 साल की नौकरी और 550 करोड़ का साम्राज्य

एक मामूली सिपाही की हैसियत से करियर शुरू करने वाले सौरभ शर्मा ने महज सात साल की सेवा में लगभग 550 करोड़ रुपए की अकूत संपत्ति खड़ी कर ली थी। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि सौरभ का दुबई में 150 करोड़ रुपए का एक आलीशान बंगला भी है। भ्रष्टाचार की यह जड़ें इतनी गहरी थीं कि ईडी ने 23 दिसंबर 2024 को मामला दर्ज कर भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर के कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी थी।



लोकायुक्त की सुस्ती और जमानत का लाभ

हैरानी की बात यह है कि जहां ईडी इस मामले में तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं लोकायुक्त पुलिस अब तक चालान पेश नहीं कर पाई है। 29 जनवरी 2025 को गिरफ्तारी के बाद, लोकायुक्त पुलिस 90 दिनों की निर्धारित समय सीमा में चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही। इसका नतीजा यह हुआ कि 02 अप्रैल 2025 को सौरभ शर्मा को जमानत मिल गई थी। एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी लोकायुक्त की जांच ठंडे बस्ते में नजर आ रही है।



कोर्ट का कड़ा रुख: ईडी से मांगा जवाब

हाल ही में बचाव पक्ष ने कोर्ट में एक नया आवेदन लगाकर सवाल उठाया है कि ईडी ने किन दस्तावेजों को चार्जशीट का हिस्सा नहीं बनाया है और क्यों? कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए प्रवर्तन निदेशालय से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 अप्रैल 2026 की तारीख तय की गई है।



सिपाही से बेनामी संपत्ति के बेताज बादशाह तक

सौरभ शर्मा ने साल 2015 में अनुकंपा नियुक्ति के जरिए परिवहन विभाग में कदम रखा था। वहीं, महज आठ साल में वीआरएस (VRS) लेकर उसने सबको चौंका दिया। आयकर विभाग (Income Tax Department) अब उसकी उन संपत्तियों की जांच कर रहा है जो रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई थीं। बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत इन जमीनों और निवेशों को कुर्क करने की तैयारी की जा रही है, ताकि भ्रष्टाचार के इस महल को ढहाया जा सके।



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