ब्रिटिश सरकार सीहोर के सेठ को लौटाएगी कर्ज, नोटिस के बाद मांगे डॉक्यूमेंट

Jitendra Shrivastava | Aug 06, 2026, 19:07 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. सीहोर के नगर सेठ जुम्मालाल परिवार को ब्रिटिश सरकार से जवाब मिला है। प्रथम विश्वयुद्ध में दिए 35 हजार के कर्ज पर अब आगे की कार्रवाई शुरू होगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • सीहोर के सेठ का कर्ज सौ साल बाद लौटाएगी ब्रिटिश सरकार।
  • जुम्मालाल परिवार को यूके सरकार से आया बड़ा जवाब।
  • प्रथम विश्वयुद्ध का 35 हजार का कर्ज, अब मिलेगा हिसाब।
  • पुराने दस्तावेज खुले तो सामने आई सौ साल पुरानी कहानी।
  • ब्रिटिश हुकूमत का कर्ज चुकाने का रास्ता हुआ साफ।

सीहोर के नगर सेठ जुम्मालाल परिवार का मामला अब चर्चा में है। परिवार ने ब्रिटिश सरकार को कानूनी नोटिस भेजा था। प्रथम विश्वयुद्ध में परिवार ने सरकार को 35 हजार का कर्ज दिया था। अब ब्रिटिश सरकार के डेप्ट मैनेजमेंट ऑफिस से जवाब आया है। सरकार ने इस मामले में और दस्तावेज मांगे हैं।



सौ साल पुरानी कहानी सामने आई

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में एक पुराना मामला फिर सुर्खियों में है। यह मामला जुड़ा है नगर सेठ जुम्मालाल परिवार से। परिवार के मुखिया विनय रुठिया और उनके भाई विवेक रुठिया ने यह जानकारी दी है।



उनके अनुसार प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान यानी 1917 में यह कर्ज दिया गया था। उस समय ब्रिटिश सरकार भारत पर शासन कर रही थी। युद्ध के दौरान भारतीय सैनिक बड़ी संख्या में ब्रिटिश सेना में भर्ती हुए थे। इन सैनिकों के राशन, पानी और अन्य खर्चों के लिए सरकार को पैसों की जरूरत थी।



इसी वजह से ब्रिटिश हुकूमत ने भारत से करोड़ों रुपए जुटाए। यह राशि वार लोन के रूप में ली गई थी। उसी समय सीहोर के नगर सेठ जुम्मालाल परिवार ने भी 35 हजार रुपए दिए थे।



पुराने दस्तावेज मिलने से खुला राज

यह पूरा मामला तब सामने आया जब विवेक रुठिया पुराने दस्तावेजों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें 1917 के ऐतिहासिक कागजात मिले। इन दस्तावेजों में कर्ज देने का पूरा ब्योरा दर्ज था।



दस्तावेज मिलने के बाद परिवार ने इस मामले को आगे बढ़ाने का फैसला लिया। उन्होंने अपने अधिवक्ता श्रीयांश रानीवाल से संपर्क किया।



ब्रिटिश सरकार को भेजा गया नोटिस

परिवार के वकील ने यूके सरकार के डेप्ट मैनेजमेंट ऑफिस को कानूनी नोटिस भेजा। यह नोटिस ईमेल और हार्ड कॉपी दोनों माध्यमों से भेजा गया था। नोटिस में कर्ज की पूरी जानकारी दी गई थी।



परिवार ने इसमें 1917 के दस्तावेजों का हवाला भी दिया। नोटिस भेजने के बाद परिवार जवाब का इंतजार कर रहा था। कुछ दिन पहले उन्हें यूके सरकार से जवाब मिला है।



ब्रिटिश सरकार ने दिया सकारात्मक जवाब

यूके सरकार के डेप्ट मैनेजमेंट ऑफिस ने इस मामले में सकारात्मक रुख दिखाया है। जवाब में सरकार ने कहा है कि उन्हें कर्ज के बारे में और जानकारी चाहिए। साथ ही कुछ अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे गए हैं।



यह दस्तावेज गिल्ट रजिस्ट्रार को भेजे जाने हैं। गिल्ट रजिस्ट्रार वह विभाग है जो सरकारी ऋण से जुड़े रिकॉर्ड संभालता है। परिवार का कहना है कि वे जल्द सभी दस्तावेज तैयार कर भेजेंगे।



आगे क्या होगा

दस्तावेज भेजे जाने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। परिवार फिलहाल जरूरी कागजात इकट्ठा कर रहा है। इस मामले पर आने वाले दिनों में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।



यह मामला सीहोर के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह दिखाता है कि सौ साल पुराने दस्तावेज भी आज कितने काम आ सकते हैं। परिवार की यह पहल स्थानीय इतिहास को भी सामने लाती है।



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