सिवनी हवाला लूटकांड में DSP को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने कहा - सिर्फ कॉल रिकॉर्ड से नहीं बनता अपराध

Neel Tiwari | Apr 30, 2026, 11:21 IST
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जबलपुर हाईकोर्ट ने सिवनी के चर्चित डेढ़ करोड़ हवाला लूट मामले में DSP पंकज मिश्रा को बड़ी राहत दे दी है। इसके साथ ही, उनके खिलाफ दर्ज FIR और चार्जशीट रद्द कर दी गई है। जानें कोर्ट ने क्या कहा...

News In Short

  • सिवनी के हवाला लूट कांड में DSP पंकज मिश्रा को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है।
  • FIR और चार्जशीट को कोर्ट ने कानून का दुरुपयोग बताया है।
  • 81 कॉल्स का हवाला दिया गया, लेकिन बातचीत का कोई सबूत नहीं मिला है।
  • मिश्रा के पास से कोई रकम बरामद नहीं हुई है।
  • कोर्ट ने कहा शक, सबूत की जगह नहीं ले सकता है।

News In Detail

पुलिस के द्वारा हवाला की रकम लूटने के आरोपों से चर्चा में आए तत्कालीन हॉक फोर्स डीएसपी पंकज मिश्रा को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। इस बहुचर्चित मामले को सिवनी जिले के लखनवाड़ा थाना क्षेत्र में 09 अक्टूबर 2025 को दर्ज किया गया था।



इसमें आरोप था कि महाराष्ट्र के जालना से आ रही एक क्रेटा कार को पुलिस ने रोका था। शिकायतकर्ता के मुताबिक करीब 2.96 करोड़ रुपए में से 1.45 करोड़ रुपए पुलिस अधिकारियों ने अपने पास रख लिए थे। इस कथित लूट में तत्कालीन एसडीओपी पूजा पांडे को मुख्य आरोपी बनाया गया था।



DSP पर थे साजिश में शामिल होने के आरोप

मामले में DSP पंकज मिश्रा पर आरोप था कि उन्होंने जबलपुर क्राइम ब्रांच से मिली सूचना को SDOP पूजा पांडे तक पहुंचाया। पूरी कार्रवाई में भूमिका बताई गई थी। अभियोजन ने इसे एक साजिश बताते हुए दावा किया कि मिश्रा इस पूरे घटनाक्रम के लिंक थे।





81 फोन कॉल और व्हाट्सएप चैट थे आधार

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि घटना के दौरान मिश्रा और पूजा पांडे के बीच 81 बार फोन पर बातचीत हुई थी। साथ ही आरोप लगाया गया कि मिश्रा ने अपने मोबाइल से कुछ अहम व्हाट्सएप चैट और वीडियो हटाए (डिलीट किए), जिससे उनकी भूमिका संदिग्ध बनती है।





हाईकोर्ट ने खारिज कर दी FIR?

जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने केस डायरी का विश्लेषण करते हुए पाया कि केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) किसी अपराध को साबित करने के लिए काफी नहीं है। कोर्ट ने साफ कहा कि बातचीत का कोई रिकॉर्ड या ट्रांसक्रिप्ट पेश नहीं किया गया, जिससे साजिश साबित हो सके।



पंकज मिश्रा को न पैसा मिला, न नाम आया

कोर्ट ने यह भी माना कि मिश्रा के पास से कोई भी रकम बरामद नहीं हुई और न ही किसी गवाह या शिकायतकर्ता ने उनका नाम लिया। साथ ही यह भी कहा गया कि सूचना साझा करना एक पुलिस अधिकारी की ड्यूटी का हिस्सा हो सकता है।



SC केस का हवाला देकर FIR और चार्जशीट की रद्द

जबलपुर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित भजन लाल केस का हवाला देते हुए कहा कि जब FIR में प्रथमदृष्टया (पहली नजर में) अपराध नहीं बनता, तो ऐसी कार्यवाही जारी रखना न्याय के खिलाफ है।



कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संदेह कितना भी गहरा हो, वह सबूत की जगह नहीं ले सकता। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने DSP पंकज मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज FIR और चार्जशीट को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, उन्हें पूरी तरह आरोपों से मुक्त कर दिया है।



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