सिवनी हवाला कांड में SDOP के ड्राइवर रितेश वर्मा को जमानत, जांच पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

सिवनी के बहुचर्चित हवाला लूट कांड में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। करोड़ों रुपए की लूट के आरोप में जेल में बंद SDOP पूजा पांडे के सरकारी ड्राइवर रितेश वर्मा को जमानत मिल गई है।

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Neel Tiwari
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News in short

  • 14 अक्टूबर को सिवनी के लखनवाड़ा थाने में 2.96 करोड़ रुपए की हवाला लूट का मामला दर्ज।
  • केस में  एसडीओपी पूजा पांडे और उनके ड्राइवर रितेश वर्मा और जीजा सहित 11 लोग आरोपी।
  • रितेश वर्मा 15 अक्टूबर 2025 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था।
  • जस्टिस अचल कुमार पालीवाल ने कहा, आरोपी की भूमिका मुख्य नहीं दिखती।
  • पुलिस को Lalita Kumari vs Government of Uttar Pradesh के दिशा-निर्देशों के तहत निष्पक्ष जांच का निर्देश।

News in detail

सिवनी जिले हवाला व्यापारी के साथ पुलिस द्वारा की गई लूट ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। इस मामले में सिवनी के लखनवाड़ा थाने में FIR क्रमांक 473/2025 दर्ज की गई है। शिकायत के अनुसार, एक हवाला कारोबारी से लगभग 2 करोड़ 96 लाख रुपये की लूट की गई। मामला तब और गंभीर हो गया जब इसमें पुलिस विभाग की अधिकारी SDOP पूजा पाण्डे और उनके स्टाफ के नाम सामने आए। जांच के दौरान सरकारी वाहन चालक रितेश वर्मा को भी साजिश का हिस्सा मानते हुए गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने ही दावा किया कि पूरी वारदात सुनियोजित थी और इसमें विभागीय मिलीभगत की आशंका है।

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जमानत पर सुनवाई में क्या हुआ?

रितेश वर्मा की दूसरी नियमित जमानत अर्जी MCRC 9179/2026 पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने दलील दी कि रितेश केवल एक सरकारी ड्राइवर है और उसने अपने वरिष्ठ अधिकारी के निर्देशों का पालन किया। उसका इस कथित लूट में कोई स्वतंत्र या मुख्य रोल नहीं था। वकीलों ने यह भी कहा कि आरोपी लंबे समय से जेल में है और ट्रायल में समय लगेगा। ऐसे में निरंतर हिरासत उचित नहीं है।

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जस्टिस अचल कुमार पालीवाल की टिप्पणी

मामले की सुनवाई जस्टिस अचल कुमार पालीवाल की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका मुख्य प्रतीत नहीं होती। जब तक किसी आरोपी की केंद्रीय भूमिका स्पष्ट न हो, तब तक उसे अनावश्यक रूप से लंबी न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश को केस की मेरिट पर अंतिम टिप्पणी नहीं माना जाए। ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर अंतिम निर्णय होगा।

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पुलिस को क्या निर्देश दिए गए?

हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि यदि कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है तो कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय Lalita Kumari vs Government of Uttar Pradesh के अनुसार की जाए। आवेदक को भी निर्देशित किया गया है कि वह संबंधित पुलिस थाने में सहयोग करे और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए।

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पहले खारिज हो चुकी थी अर्जी

गौरतलब है कि इससे पहले रितेश वर्मा ने MCRC 53163/2025 के तहत जमानत आवेदन दिया था, जिसे 2 दिसंबर 2025 को वापस लेने की अनुमति के साथ निरस्त कर दिया गया था। अब दूसरी अर्जी पर सुनवाई के बाद जमानत मिलने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सिवनी का यह हवाला कांड अब सिर्फ लूट का मामला नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन चुका है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और ट्रायल की प्रक्रिया पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी रहेंगी।

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