शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना को हाईकोर्ट से झटका, DEO को सस्पेंड करने से पहले ही प्रभार बदलने पर उठे सवाल
शाजापुर जिले में कलेक्टर ऋजु बाफना और जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने कलेक्टर के फैसले पर प्रारंभिक तौर पर सवाल उठाते हुए आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
दरअसल, कलेक्टर (आईएएस ऋजु बाफना) ने जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही को निलंबित करने की अनुशंसा उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को भेजी थी। इसके बाद 16 फरवरी को रंगशाही को निलंबित कर दिया गया था। इससे पहले कलेक्टर की ओर से उन्हें कई नोटिस भी जारी किए गए थे और प्रमुख सचिव आबकारी व आयुक्त आबकारी को भी पत्र लिखे गए थे।
हालांकि, विवाद तब गहराया जब यह सामने आया कि कलेक्टर ने 20 जनवरी को ही रंगशाही से प्रभार लेकर सहायक जिला आबकारी अधिकारी निमिषा परमार को जिला आबकारी अधिकारी का प्रभार सौंप दिया था। इसी निर्णय को लेकर हाईकोर्ट ने कलेक्टर की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
इन अधिकारियों को बनाया गया पक्षकार
याचिकाकर्ता विनय रंगशाही ने अपनी याचिका में मध्यप्रदेश शासन, आबकारी आयुक्त, शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना, सहायक जिला आबकारी अधिकारी निमिषा परमार, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह और उज्जैन जिला आबकारी अधिकारी निधि जैन को पक्षकार बनाया है।
कलेक्टर के आदेश पर कोर्ट की टिप्पणी
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि कलेक्टर लगातार रंगशाही को नोटिस जारी कर रही थीं और निलंबन आदेश में तकनीकी त्रुटियां भी हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कलेक्टर ने जब संभागायुक्त को निलंबन की अनुशंसा भेजी, उससे पहले ही अधीनस्थ अधिकारी को प्रभार दे दिया गया था।
कोर्ट ने कहा कि यदि कलेक्टर संभागायुक्त के निलंबन आदेश के बाद यह कदम उठातीं तो स्थिति अलग होती, लेकिन उससे पहले ऐसा करना निर्णय की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
हाईकोर्ट ने आदेश पर लगाया स्टे
हाईकोर्ट ने फिलहाल 20 जनवरी को जारी उस आदेश पर स्टे लगा दिया है, जिसमें निमिषा परमार को प्रभार सौंपा गया था। हालांकि, संभागायुक्त द्वारा जारी निलंबन आदेश पर भी रोक लगी है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।
लिखित आदेश आने के बाद ही स्थिति साफ होगी। यदि निलंबन आदेश पर भी रोक लगती है तो रंगशाही फिर से जिला आबकारी अधिकारी का पद संभाल सकते हैं।
सितंबर से चल रहा था विवाद
कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी के बीच विवाद सितंबर-अक्टूबर 2025 से चल रहा था। इस दौरान रंगशाही पर मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान हेलीकॉप्टर में फूड बास्केट नहीं रखने और ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगे थे।
इसके बाद कलेक्टर की ओर से उन्हें कई बार नोटिस जारी किए गए, जिनमें टीएल बैठक और जनसुनवाई में अनुपस्थित रहने, फोन नहीं उठाने और ड्यूटी में लापरवाही जैसे आरोप शामिल थे। विवाद बढ़ने के बाद आखिरकार कलेक्टर ने उनका प्रभार बदलते हुए निलंबन की अनुशंसा कर दी, जिसके खिलाफ रंगशाही हाईकोर्ट पहुंच गए।
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