शिवराज सिंह चौहान और विवेक तन्खा के बीच समझौता, SC ने बंद किया मानहानि केस
Neel Tiwari | Feb 03, 2026, 14:29 IST
Amresh Orignal (8)
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विवेक तन्खा के बीच मानहानि विवाद खत्म हो गया है। तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस मुद्दे पर उनका शिवराज सिंह चौहान से समझौता हो गया है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा के बीच कानूनी लड़ाई अब खत्म हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 03 फरवरी को इस मामले पर अंतिम फैसला सुनाया है। यह मामला मानहानि से जुड़ा था, जो पिछले कुछ वर्षों से सुर्खियों में था। अब कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल केस को बंद कर दिया है। दोनों नेताओं के बीच यह कानूनी संघर्ष राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ था।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने मामले को खत्म कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने समझौते की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संसद में मुलाकात के बाद विवाद सुलझ गया। विवेक तन्खा ने सिविल और आपराधिक, दोनों मानहानि मामले वापस लिए है। यह समझौता आपसी सहमति से हुआ है, जिसे कोर्ट को बताया गया है।
मामले पर जस्टिस सुंदरेश की पीठ ने अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि नेताओं में सहनशीलता ज्यादा होनी चाहिए। बेंच ने चुटकी लेते हुए मोटी चमड़ी रखने की सलाह दी। कोर्ट के अनुसार राजनीति में भाषा अलग होती है, इसलिए ज्यादा संवेदनशील नहीं होना चाहिए।
यह विवाद 2021 के मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों से शुरू हुआ था। उस समय ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान और अन्य भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ भ्रामक बयान दिए था।
तन्खा का कहना था कि भाजपा ने यह झूठ फैलाया कि वे ओबीसी आरक्षण के खिलाफ हैं। इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। इसके बाद उन्होंने 10 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति का सिविल सूट और मानहानि का आपराधिक मुकदमा दायर किया था।
राजनीतिक गलियारों में इस सुलह को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि राजनीति में कड़वाहट चाहे जितनी गहरी हो, बातचीत से समाधान निकल सकता है। सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बड़ी राहत मिली है।
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कोर्ट रूम से बाहर खत्म हुआ विवाद
मामले पर जस्टिस सुंदरेश की पीठ ने अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि नेताओं में सहनशीलता ज्यादा होनी चाहिए। बेंच ने चुटकी लेते हुए मोटी चमड़ी रखने की सलाह दी। कोर्ट के अनुसार राजनीति में भाषा अलग होती है, इसलिए ज्यादा संवेदनशील नहीं होना चाहिए।
जानें क्या था पूरा मामला?
तन्खा का कहना था कि भाजपा ने यह झूठ फैलाया कि वे ओबीसी आरक्षण के खिलाफ हैं। इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। इसके बाद उन्होंने 10 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति का सिविल सूट और मानहानि का आपराधिक मुकदमा दायर किया था।
सियासत के लिए बना बड़ा संदेश
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