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News in Short
- जबलपुर के एथेनॉल प्लांट पर पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन और स्वास्थ्य संकट के आरोप।
- याचिका में आरोप है कि प्लांट का अपशिष्ट जल प्रदूषित कर रहा है।
- रासायनिक पदार्थ खेतों और जलस्रोतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
- प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई।
- उच्च न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
- प्लांट पर कार्रवाई की मांग करते हुए 23 मार्च को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें।
News in Detail
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में संचालित एक एथेनॉल प्लांट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रभाव को देखते हुए, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया।
कोर्ट ने राज्य सरकार, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को नोटिस जारी किया है। सभी संबंधित प्रतिवादियों से जवाब तलब किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
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बालाजी बायो सॉल्यूशन फ्यूल्स फैला रहा प्रदूषण
यह मामला जबलपुर के अधिवक्ता अमर गुप्ता द्वारा दायर जनहित याचिका (W.P. No. 44754/2025) से हाईकोर्ट के सामने आया। याचिका में शाहपुरा के ग्राम नटवारा में स्थित मेसर्स श्री बालाजी बायो सॉल्यूशन फ्यूल्स एलएलपी के प्लांट पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि प्लांट पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण अधिनियम 1974 का उल्लंघन कर रहा है।
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खेती, पानी और सेहत पर संकट
याचिका में बताया गया है कि फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला अपशिष्ट और बिना उपचारित गंदा पानी सीधे खेतों और जलस्रोतों में छोड़ा जा रहा है। इससे गांवों का भूजल दूषित हो रहा है और पीने का पानी जहरीला हो रहा है।
रासायनिक अपशिष्ट से खेतों की मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो रही है और फसलें बर्बाद हो रही हैं। प्लांट से निकलने वाला धुआं और मशीनों का शोर वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। इससे ग्रामीणों और पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर हो रहा है।
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प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल
याचिकाकर्ता ने अदालत में दस्तावेजों के आधार पर बताया। 24 जनवरी 2025 और 3 मार्च 2025 को शिकायतें दी गईं। शिकायतें संभागायुक्त, कलेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी गईं। इसके बावजूद न तो जांच हुई और न कार्रवाई की गई। याचिका में इसे संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताया गया है।
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कोर्ट से की गई यह प्रमुख मांगें
इस मामले की सुनवाई के जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में हुई। अधिवक्ता रवि शंकर यादव ने याचिका प्रस्तुत की है।
याचिका में अदालत से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एथेनॉल प्लांट का तत्काल निरीक्षण और पर्यावरण ऑडिट कराने की मांग की गई है। जब तक सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन न हो, तब तक प्लांट के संचालन पर रोक लगाई जाए।
याचिका में प्रदूषित मिट्टी और भूजल की बहाली के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है। साथ ही, प्रदूषण स्तर की नियमित निगरानी और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश देने की भी मांग की गई है।
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अब 23 मार्च पर टिकी निगाहें
चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब सभी की नजरें 23 मार्च को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह स्पष्ट करना होगा। उन्हें बताना होगा कि गंभीर आरोपों के बावजूद एथेनॉल प्लांट पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
पहले भी विवादों में रहा प्लांट
गौरतलब है कि यही एथेनॉल प्लांट पहले भी विवादों में रहा है। हाल ही में बीजेपी विधायक नीरज सिंह ने फैक्ट्री पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 400 क्विंटल चावल की हेराफेरी का आरोप लगाया। सरकारी बोरियों से बोरी बदलकर ट्रकों से चावल की ढुलाई की गई।
जांच के दौरान नायब तहसीलदार को प्रवेश नहीं दिया गया। उस मामले में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे थे। अब इस जनहित याचिका के बाद यह फिर चर्चा में है।
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