एमपी में नर्सिंग घोटाला 2.0! सांसद पुत्र के कॉलेज पर सवाल, अधूरे भवन पर मान्यता?

Atul Dwivedi | Sept 08, 2026, 16:26 IST
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सीधी के आयुष्मान नर्सिंग कॉलेज पर अधूरी बिल्डिंग में मान्यता देने का आरोप है। NSUI ने सीबीआई जांच की मांग की। कॉलेज सांसद के बेटे का बताया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में एक बार फिर नर्सिंग कॉलेजों की चर्चा होने लगी है। नए एडमिशन शुरु होते ही, आरोप लगने लगे कि एक बार फिर से नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने के नाम पर खेल चल रहा है। सीधी के भदौरा में मौजूद आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग विवादों में है। बताया जा रहा है कि ये कॉलेज सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनूप मिश्रा और उनकी बहू बीना मिश्रा का है। विवाद की असली वजह बिल्डिंग का अधूरा होना, फैकल्टी के अनुभव प्रमाण पत्र और एडमिशन को लेकर खड़ा हुआ है।



ताजा विवाद क्या है ?

विवाद की जड़ है सीधी के भदौरा में मौजूद आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल की बिल्डिंग का अधूरा होना। NSUI का आरोप है कि 24 जुलाई को निरीक्षण के दौरान कॉलेज की बिल्डिंग पूरी तैयार नहीं थी। इसके बावजूद संस्थान को B.Sc. नर्सिंग की 60 और GNM की 60, यानी कुल 120 सीटों की मान्यता मिल गई।



NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार का आरोप है कि जिस बिल्डिंग में नर्सिंग कॉलेज खोला गया है, वो पहले शॉपिंग कॉम्पलेक्स के तौर पर बनाया गया था। इसमें करीब 20 दुकानें थीं। संगठन का दावा है कि निरीक्षण से पहले दुकानों पर नर्सिंग कॉलेज के पोस्टर बैनर लगाए गए। कुछ ही घंटों में पूरी बिल्डिंग को कॉलेज की तरह तैयार कर दिया गया।





लैब, उपकरण भी नहीं ?

NSUI का ये भी आरोप है कि निरीक्षण के दौरान दूसरे संस्थान से उपकरण और दूसरे सामान लाकर कॉलेज में रखे गए। साथ ही साथ कॉलेज में पढ़ाने वाली फैकल्टी के अनुभव प्रमाण पत्रों पर पर भी सवाल उठ रहे हैं। NSUI अब इस मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रही है।



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द सूत्र के हाथ लगे दस्तावेज

द सूत्र को जो दस्तावेज मिले हैं उनमें कॉलेज से जुड़ी सारी जानकारी है। कागजों में लिखा है कि कॉलेज का संचालन एक समिति कर रही है। लेकन प्रेसिडेंट के नाम के आगे अनूप मिश्रा लिखा है। इसके साथ ही वाइस प्रेसिडेंट के नाम के आगे वैष्णवी मिश्रा लिखा है। सेक्रेटरी के नाम के आगे बीना मिश्रा का नाम दर्ज है।



कॉलेज पूरा नहीं 22 छात्रों को अलॉट कैसे हुआ ?

अब यहां सवाल कॉलेज को मान्यता मिलने का नहीं है। सवाल ये है कि जब कॉलेज की बिल्डिंग पूरी तैयार ही नहीं है, तो 22 छात्रों को कॉलेज अलॉट कैसे हुआ ? आरोप लग रहे हैं कि GNM के 15 और B.Sc नर्सिंग कोर्स के लिए 7 छात्रों को कॉलेज अलॉट किया गया है।



अब NSUI ये आरोप लगा रही है कि सीट आवंटित करने से पहले कॉलेज का भौतिक सत्यापन किस अधिकारी या निरीक्षण दल ने किया ? आरोप लग रहे हैं कि जब सीट आवंटित की गई तब क्या लैब, लाइब्रेरी, फैकल्टी और दूसरी सुविधाओं की जांच की गई थी ?



नर्सिंग काउंसिल की भूमिका पर भी संदेह

इस पूरे विवाद में अब नर्सिंग काउंसिल की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने द सूत्र से बातचीत में कहा कि मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल और भारतीय नर्सिंग परिषद का नियम है कि 23 हजार स्क्वायर फीट बिल्डिंग होना चाहिए। लेकिन सीधी के इस कॉलेज की बिल्डिंग मानकों को पूरा नहीं करती। इसके बाद भी जिला कलेक्टर की टीम ने निरीक्षण करके उसे मान्यता दे दी।



कॉलेज के प्रिंसिपल पहले प्रतापगढ़ में काम करते थे। फिर ग्वालियर में काम किया, इसके बाद वो सतना गए, और अब सीधी आ गए। वो प्रिंसिपल है ही नहीं राजस्थान में कहीं काम करते हैं। इन सभी पर एफआईआर होनी चाहिए।



कॉलेज प्रबंधन क्या बोला ?

इस मामले की पड़ताल के लिए, हमने आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल के प्रबंधन से बात की। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि जो फोटो बिल्डिंग की वायरल हो रही है, वो चार महीने पुरानी है। हमारे पास जो फैकल्टी है उसकी पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। फॉर्म भरते वक्त भी अनुभव मांगा जाता है। बिना अनुभव के कोई फॉर्म नहीं भर सकता।



हालांकि जब द सूत्र ने कॉलेज प्रबंधन ने ये सवाल किया कि क्या कॉलेज सांसद राजेश मिश्रा के बेटे अनूप मिश्रा का है ? तो इसका कोई सीधा जवाब कॉलेज प्रबंधन ने हमें नहीं दिया। हमने बिल्डिंग की नई तस्वीर भी मांगी लेकिन हमें वो भी नहीं दी गई।



अनूप मिश्रा क्या बोले ?

इस मामले पर बातचीत के लिए द सूत्र ने सांसद पुत्र अनूप मिश्रा को फोन किया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। हमने उन्हें मैसेज भी किया है। उनका जवाब आने पर जानकारी दी जाएगी।



साल 2020 में हो चुका है बड़ा नर्सिंग घोटाला

बता दें कि मध्यप्रदेश में साल 2020 में बड़ा नर्सिंग कॉलेज घोटाला सामने आया। आरोप लगे कि मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने ऐसे कॉलेजों को मान्यता दी, जो सिर्फ कागजों पर थे। कुछ ऐसे भी थे जो किराए के एक कमरे में चल रहे थे। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। फिलहाल इस मामले में पीड़ित छात्र अपनी परीक्षाएं होने का इंतजार कर रहे हैं।



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