नर्सिंग घोटाला: 30 हजार छात्रों का रिजल्ट रुका, हाईकोर्ट बोला- पहले दिखाओ पूरा सच

Neel Tiwari | Apr 09, 2026, 16:20 IST
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nursing scam
Photograph: (THESOOTR)

JABALPUR. हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के नर्सिंग घोटाले में 30 हजार छात्रों के रिजल्ट पर रोक लगाई। कोर्ट ने 400 कॉलेजों का पूरा डेटा मांगा और फर्जी कॉलेजों पर सवाल उठाए।

News in short

  • 30 हजार GNM छात्रों के रिजल्ट जारी करने की हाईकोर्ट ने नहीं दी अनुमति।
  • एमपी नर्सिंग काउंसिल ने मांगी थी परिणाम जारी करने की अनुमति।
  • कोर्ट ने 400 कॉलेजों के छात्रों का पूरा डेटा मांगा।
  • फर्जी मान्यता वाले कॉलेजों पर उठे गंभीर सवाल।
  • अगली सुनवाई 24 अप्रैल को तय।

News in detail

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग घोटाले (nursing scam) में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। करीब 30 हजार छात्रों के परीक्षा परिणाम पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना पूरी जानकारी के रिजल्ट जारी नहीं होगा।

जबलपुर हाईकोर्ट में 9 अप्रैल को नर्सिंग घोटाले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के समक्ष यह मामला रखा गया, जिसमें लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की जनहित याचिका भी शामिल रही।

सुनवाई के दौरान एमपी नर्सिंग काउंसिल ने सत्र 2022-23 के जीएनएम प्रथम वर्ष के लगभग 30 हजार छात्रों के परीक्षा परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी।

फर्जी कॉलेजों का मुद्दा बना बड़ा सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में सैकड़ों ऐसे नर्सिंग कॉलेज हैं, जिन्हें बिना बुनियादी सुविधाओं के ही मान्यता दे दी गई। इन कॉलेजों में न तो भवन हैं, न लैब, न लाइब्रेरी और न ही योग्य फैकल्टी। जांच में कई संस्थान अपात्र पाए जाने के बावजूद उनके छात्रों को मान्यता प्राप्त कॉलेजों में ट्रांसफर नहीं किया गया, जिससे पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है।

हाईकोर्ट ने मांगा 400 कॉलेजों का पूरा रिकॉर्ड

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने काउंसिल से कड़े सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि जिन छात्रों के रिजल्ट जारी करने की बात की जा रही है, वे आखिर किन कॉलेजों में पढ़े हैं और क्या उन संस्थानों के पास जरूरी संसाधन मौजूद थे।

इसके साथ ही कोर्ट ने सभी 400 कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों की विस्तृत जानकारी पेश करने के निर्देश दिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसने वास्तविक पढ़ाई की है और किसका एडमिशन केवल फर्जीवाड़े के तहत हुआ।

रिजल्ट पर रोक जारी, पहले होगा सत्यापन

हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक एमपी नर्सिंग काउंसिल सभी आवश्यक जानकारी और रिकॉर्ड पेश नहीं करता, तब तक किसी भी छात्र का परीक्षा परिणाम जारी नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जो कॉलेज मापदंडों पर खरे नहीं उतरते, उनके छात्रों को पहले योग्य संस्थानों में स्थानांतरित किया जाए।

क्या था नर्सिंग घोटाला

मध्य प्रदेश का नर्सिंग घोटाला मुख्य रूप से प्रदेश के सैकड़ों नर्सिंग कॉलेजों में बुनियादी ढांचे की कमी और फर्जी नियुक्तियों से जुड़ी एक बड़ी धोखाधड़ी थी, जिसमें चिकित्सा शिक्षा विभाग और नर्सिंग काउंसिल की मिलीभगत से कागजों पर चल रहे कॉलेजों को भी मान्यता दे दी गई।

इस मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब उच्च न्यायालय के आदेश पर जांच कर रही सीबीआई (CBI) के अपने ही अधिकारी भ्रष्टाचार के जाल में उलझ गए।

सीबीआई के निरीक्षक स्तर के अधिकारियों ने अयोग्य कॉलेजों को क्लीन चिट देने के बदले कॉलेज संचालकों से लाखों रुपए की रिश्वत ली, जिसके बाद एजेंसी को अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करना पड़ा।

इस घोटाले में कई कॉलेजों के पास न तो अपनी इमारत थी और न ही अस्पताल, यहां तक कि एक ही शिक्षक को कई जिलों के कॉलेजों में कार्यरत दिखाया गया था।

सीबीआई अधिकारियों की संलिप्तता ने इस पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा दिए, जिसके कारण हजारों छात्रों का भविष्य सालों तक अधर में लटका रहा और आखिरकार न्यायालय के सख्त हस्तक्षेप के बाद कई दागी कॉलेजों को बंद करने की कार्रवाई की गई।

अगली सुनवाई 24 अप्रैल को

इस महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 24 अप्रैल निर्धारित की है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि काउंसिल कोर्ट के सामने क्या रिकॉर्ड पेश करती है और इस बड़े घोटाले में आगे क्या खुलासे होते हैं।

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