सोम डिस्टलरीज सील, लाइसेंस निलंबित, फिर भी आबकारी विभाग ने दिया टेंडर ऑफर

Pawan Modiya | Jun 14, 2026, 18:15 IST
सोम डिस्टलरी को टेंडर ऑफर
मध्यप्रदेश में सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के सभी लाइसेंस निलंबित हैं और डिस्टलरी सील है। इसके बावजूद आबकारी आयुक्त की ओर से उसे देशी मदिरा के लिमिटेड टेंडर में शामिल होने का ऑफर दिया गया।

    समझें क्या है पूरा मामला

    • सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के सभी लाइसेंस आबकारी विभाग ने निलंबित किए हैं
    • कंपनी की डिस्टलरी यूनिट को पहले ही सील किया जा चुका है
    • हाईकोर्ट (High Court) ने भी कंपनी की राहत याचिका खारिज कर दी थी
    • बावजूद इसके आबकारी आयुक्त कार्यालय ने टेंडर का न्योता भेजा
    • यह न्योता 55 जिलों में देशी मदिरा सप्लाई के लिमिटेड टेंडर के लिए है

    सील डिस्टलबरी को टेंडर ऑफर

    ग्वालियर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के आबकारी (Excise) विभाग ने एक ऐसी कंपनी को सरकारी टेंडर में हिस्सा लेने का ऑफर दिया है, जिसके सारे लाइसेंस रद्द हैं और जिसकी फैक्ट्री सील पड़ी है। कंपनी का नाम है मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड।





    आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर की ओर से 12 जून 2026 को एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया। इसमें सोम डिस्टलरीज को वर्ष 2026-27 की देशी मदिरा प्रदाय व्यवस्था के लिए ई-टेंडर (E-Tender) प्रक्रिया में पंजीयन कराने को कहा गया। पत्र में लिखा है कि कंपनी को mptenders.gov.in पर पंजीयन कर अपनी यूजर आईडी (User ID) कार्यालय को भेजनी है ताकि उसे लिमिटेड टेंडर में पात्र किया जा सके।



    आबकारी विभाग ने अब तक इस विषय पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी है। यह जरूरी है कि विभाग स्पष्ट करे कि जब लाइसेंस निलंबित हैं और डिस्टलरी सील है तो टेंडर ऑफर किस आधार पर भेजा गया।



    55 जिलों में सप्लाई का टेंडर

    यह टेंडर कोई छोटा मामला नहीं है। मध्य प्रदेश के 55 जिलों में 1 जुलाई 2026 से 31 मार्च 2027 तक देशी मदिरा की फुटकर बिक्री दुकानों को बोतलबंद मसाला देशी शराब की थोक सप्लाई के लिए यह टेंडर निकाला गया है। इस टेंडर की निविदा 12 जून 2026 को जारी हुई थी। अब सवाल यह है कि जिस कंपनी का लाइसेंस निलंबित है, उत्पादन बंद है और फैक्ट्री सील पड़ी है, वह 55 जिलों में शराब की सप्लाई कैसे करेगी?





    हाईकोर्ट भी नहीं दे सका राहत

    सोम डिस्टलरीज ने अपने लाइसेंस निलंबन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत ने वह याचिका खारिज कर दी। यानी न्यायपालिका ने भी निलंबन को सही ठहराया। इसके बाद भी कंपनी को सरकारी टेंडर में बुलाया गया, यह बात हैरान करती है।



    आबकारी विभाग के जानकारों का कहना है कि लाइसेंस निलंबित कंपनी को टेंडर में शामिल करना नियमों के खिलाफ है। जब उत्पादन की अनुमति नहीं है, तो सप्लाई का टेंडर लेने का क्या मतलब?



    स्टॉक और नकली परमिट का संदेह

    यह पूरा मामला एक और बड़े सवाल को जन्म देता है। आबकारी विभाग ने 5 जून 2026 को सोम डिस्टलरीज के शेष स्कंध (Remaining Stock) निपटान का आदेश पहले ही जारी कर दिया था। लेकिन उस आदेश में यह नहीं बताया गया कि बेचने योग्य स्टॉक कितना है।



    अब जब फैक्ट्री सील है और उत्पादन बंद है, तो यह स्टॉक आया कहां से? क्या सील के बाद भी चोरी-छिपे उत्पादन हो रहा है? क्या नकली परमिट से माल बाहर जा रहा है? यही सवाल इस पूरे मामले को और संदिग्ध बनाते हैं।



    पुराने आयुक्त पर भी लटकी तलवार

    यह पहली बार नहीं है जब सोम डिस्टलरीज का नाम किसी विवाद में आया हो। पूर्व आबकारी आयुक्त पर पहले से तीन से अधिक जांच चल रही हैं। इसका सीधा संबंध इसी कंपनी से जोड़कर देखा जा रहा है। यह संकेत देता है कि यह समस्या किसी एक पत्र या एक अधिकारी तक सीमित नहीं है।



    आबकारी विभाग में ऊपर से नीचे तक इस कंपनी को संरक्षण मिलता रहा है, ऐसा सूत्रों का कहना है। जब एक अधिकारी हटता है तो दूसरा वही काम करता है।



    क्या होगा आगे?

    अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार और आबकारी विभाग इस पत्र को लेकर क्या कदम उठाते हैं। क्या इस पत्र को वापस लिया जाएगा? क्या टेंडर प्रक्रिया में सोम की एंट्री रोकी जाएगी? क्या स्टॉक की जांच होगी?



    अगर यह टेंडर ऑफर बरकरार रहा, तो यह साफ संदेश होगा कि नियम तोड़ने पर भी सरकारी फायदे मिल सकते हैं। और यह संदेश पूरी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है।



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