सोम डिस्टिलरी केस बन रहा 'नो बेंच केस'! सुप्रीम कोर्ट पहुंचते ही हाईकोर्ट से वापस ली अपील
News in Short
- सोम डिस्टिलरी ने हाईकोर्ट से अपनी रिट अपील वापस ली।
- कंपनी ने मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा दिया है।
- जस्टिस विनय सराफ के कारण बेंच सुनवाई नहीं कर सकती थी।
- पहले भी तीन जज इस केस की सुनवाई से अलग हुए थे।
- मामला आबकारी विभाग द्वारा लाइसेंस निलंबन से जुड़ा है।
News in Detail
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सोम डिस्टिलरी का मामला सोमवार को एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया। चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच में लिस्ट होते ही अदालत ने साफ कर दिया कि यह बेंच भी इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकती।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की वजह से सोम डिस्टिलरी ने हाईकोर्ट से अपील वापस ले ली गई। अगर अपील वापस नहीं ली जाती तो यह ऐसा दुर्लभ मामला बन सकता था जिसकी सुनवाई कई जजों के साथ ही चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच के सामने भी संभव नहीं रहती।
हाईकोर्ट से वापस ली गई अपील
जबलपुर हाईकोर्ट में सोमवार को सोम डिस्टिलरी की रिट अपील चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच के सामने सूचीबद्ध हुई थी। मामला कोर्ट के सामने आते ही सुनवाई शुरू हुई। बेंच ने शुरुआत में ही स्थिति स्पष्ट कर दी। जस्टिस विनय सराफ इस बेंच का हिस्सा थे। इसी कारण यह बेंच सुनवाई नहीं कर सकती।
सुनवाई के दौरान सोम डिस्टिलरी पक्ष ने जानकारी दी। अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने कोर्ट को स्थिति बताई। मामला सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट से आदेश भी जारी हुआ है। आदेश अभी वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुआ। स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन बताया गया। हाईकोर्ट ने सुनवाई से इंकार किया। कंपनी ने अपनी रिट अपील वापस ले ली।
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इसलिए नहीं हो सकती थी सुनवाई
कानूनी जानकारों के अनुसार जस्टिस विनय सराफ अपने वकालत के दौर में सोम डिस्टिलरी की ओर से अदालत में पेश हो चुके हैं। इसी कारण न्यायिक मर्यादा के तहत वे इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते थे।
इसी वजह से चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच में यह मामला आते ही स्पष्ट हो गया कि इस बेंच में इसकी सुनवाई संभव नहीं है। इसे ऐसी बेंच के सामने सूचीबद्ध करना होगा जिसमें जस्टिस विनय सराफ सदस्य न हों।
पहले ही तीन जज नहीं कर सकते थे सुनवाई
इस मामले की सुनवाई को लेकर पहले भी असामान्य स्थिति बन चुकी थी। याचिका दायर करते समय कंपनी ने अनुरोध किया। मामला जस्टिस रामकुमार चौबे की अदालत में न जाए। सोम डिस्टिलरी की ओर से यह आग्रह किया गया।
इसके बाद जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस संदीप एन. भट्ट भी बिना कारण बताए खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर चुके थे। बाद में जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कंपनी को अंतरिम राहत देने से इनकार किया। इसी आदेश के खिलाफ रिट अपील दायर हुई।
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क्या है पूरा विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद राज्य के आबकारी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़ा है। 4 फरवरी 2026 को विभाग ने सोम डिस्टिलरी के रायसेन जिले स्थित सेहतगंज और रोजराजक यूनिट के लाइसेंस निलंबित कर दिए थे।
विभाग ने वर्ष 2023 के मामले को आधार बनाया। नकली परमिट से अवैध शराब परिवहन हुआ था। मामले में कंपनी के कर्मचारी दोषी पाए गए। सत्र अदालत ने कर्मचारियों को सजा सुनाई। कार्रवाई को चुनौती देकर कंपनी हाईकोर्ट पहुंची। कंपनी ने लाइसेंस निलंबन पर रोक मांगी। कंपनी ने निविदा प्रक्रिया पर भी रोक मांगी।
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
कानूनी हलकों में इस मामले की चर्चा तेज है। कई जज पहले ही सुनवाई से अलग हो चुके थे। चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच भी सुनवाई नहीं कर सकती थी। अपील वापस नहीं होती तो स्थिति दुर्लभ बनती। मामला कई बेंच के सामने नहीं सुना जा सकता था। यह स्थिति हाईकोर्ट में कम ही देखी जाती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार
मामले में सोम पक्ष के अधिवक्ता राहुल दिवाकर से बात हुई। हस्तक्षेपकर्ता अधिवक्ता अनुज लाहोटी से भी जानकारी ली गई। दोनों ने सुप्रीम कोर्ट आदेश की स्थिति बताई। आदेश अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। आदेश सामने आने पर जानकारी दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद मामला वहीं विचाराधीन है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर है। आदेश आते ही पाठकों को जानकारी दी जाएगी।