सिवनी में लोकायुक्त छापा: बाबू के पास सवा 6 करोड़ की संपत्ति, सभी पत्नी के नाम

Jitendra Shrivastava | Aug 08, 2026, 16:32 IST
Photograph: (THESOOTR)
SEONI. जबलपुर लोकायुक्त ने सिवनी के बाबू सुभाष शर्मा के 5 ठिकानों पर छापा मारा। आय से 543 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति मिली, सवा 6 करोड़ की जमीन-मकान पत्नी के नाम मिले।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • बाबू के घर मिली आय से 543% ज्यादा संपत्ति, हड़कंप।
  • पत्नी के नाम खरीदी सवा 6 करोड़ की जायदाद, राज खुला।
  • सुबह 5:30 बजे लोकायुक्त छापा, 5 ठिकाने खंगाले।
  • सरकारी बाबू निकला करोड़पति, फार्महाउस भी मिला।
  • जबलपुर-सिवनी में एक साथ छापा, दस्तावेज जब्त।

जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने बाबू सुभाष शर्मा के 5 ठिकानों पर छापा मारा। शर्मा सिवनी के प्रशिक्षण केंद्र में सहायक ग्रेड-2 हैं। जांच में आय से 543 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति मिली है। सारी संपत्ति पत्नी शीला शर्मा के नाम खरीदी गई। दो टीमें अलग-अलग ठिकानों पर जांच कर रही हैं।



जबलपुर में शनिवार तड़के लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। टीम ने बाबू सुभाष शर्मा के पांच ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। शर्मा क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज प्रशिक्षण केंद्र सिवनी में सहायक ग्रेड-2 के पद पर तैनात हैं। जांच में उनकी आय से कहीं ज्यादा संपत्ति मिली है। अधिकारियों के मुताबिक यह अनुपात 543.19 प्रतिशत तक पहुंच गया है।



छापे की कार्रवाई सुबह करीब 5:30 बजे शुरू हुई। लोकायुक्त की टीमें बिना किसी सूचना के शर्मा के जबलपुर और सिवनी स्थित ठिकानों पर पहुंचीं।



इस दौरान परिवार के लोग हैरान रह गए। टीम ने घर के हर कमरे की तलाशी ली और दस्तावेज खंगालने शुरू कर दिए। घर के बाहर पुलिस बल भी तैनात किया गया था, ताकि कार्रवाई के दौरान कोई बाधा न आए।



पत्नी के नाम मिली करोड़ों की संपत्ति

जांच में सामने आया कि सुभाष शर्मा ने अपनी सारी संपत्ति पत्नी शीला शर्मा के नाम खरीदी है। इसमें 5 करोड़ रुपए की जमीन और प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा एक करोड़ 20 लाख रुपए का फार्म हाउस भी मिला है। दो अन्य मकानों के दस्तावेज भी टीम को मिले हैं। कुल मिलाकर संपत्ति की कीमत सवा 6 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी जा रही है।



एक सरकारी बाबू के पास इतनी बड़ी संपत्ति मिलने से इलाके में हलचल मच गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शर्मा का रहन-सहन हमेशा से आलीशान रहा है। पड़ोसियों ने बताया कि परिवार अक्सर महंगी गाड़ियों में सफर करता था। बच्चों की पढ़ाई भी नामी निजी स्कूलों में हो रही थी, जिसकी चर्चा मोहल्ले में पहले से होती रही है।



दो टीमों ने अलग-अलग जगह मारा छापा

लोकायुक्त ने इस कार्रवाई के लिए दो अलग टीमें बनाई थीं। पहली टीम का नेतृत्व डीएसपी रेखा प्रजापति ने किया। इस टीम में निरीक्षक जितेंद्र यादव, राहुल गजभिए और शशि मस्कुले शामिल थे। यह टीम सुभाष शर्मा के जबलपुर स्थित निवास पर पहुंची और वहां जांच शुरू की।



दूसरी टीम की अगुवाई डीएसपी नीतू त्रिपाठी ने की। यह टीम पाटन तहसील क्षेत्र के एक गांव में स्थित फार्म हाउस पर पहुंची। यहां भी दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।



दोनों जगह अधिकारी संपत्ति से जुड़े कागजात, बैंक रिकॉर्ड और निवेश से जुड़े कागजातों की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने फिलहाल मीडिया से कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है।



आय से 543 प्रतिशत ज्यादा मिली संपत्ति

अधिकारियों के मुताबिक शर्मा की सरकारी आय और उनकी वास्तविक संपत्ति में भारी अंतर पाया गया है। जांच अनुसार यह अंतर 543.19 प्रतिशत तक है। यानी उनकी संपत्ति सरकारी वेतन से मिलने वाली आय से कई गुना ज्यादा है। लोकायुक्त की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी संपत्ति के पीछे आय के स्रोत क्या रहे हैं।



आमतौर पर ऐसे मामलों में जांच एजेंसी सबसे पहले वेतन पर्ची, बैंक खातों और आयकर रिटर्न का मिलान करती है। इसके बाद संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल हुई रकम का स्रोत खोजा जाता है। अगर आय और खर्च का अंतर तय सीमा से ज्यादा पाया जाता है, तो आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया जाता है।



अभी जांच की शुरुआत ही हुई है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी संपत्ति के दस्तावेज खंगालने और उनके मूल्यांकन में समय लगेगा। जांच पूरी होने के बाद ही सटीक आंकड़े सामने आ पाएंगे। संभावना है कि आगे चलकर और भी संपत्तियों का खुलासा हो सकता है।



जांच जारी, आगे क्या होगा

फिलहाल दोनों टीमें अपने-अपने ठिकानों पर मौजूद हैं। दस्तावेजों की गिनती और उनका मिलान किया जा रहा है। इसके बाद लोकायुक्त कार्यालय में विस्तृत रिपोर्ट तैयार होगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।



सरकारी विभागों में तैनात कर्मचारियों की संपत्ति की जांच लोकायुक्त नियमित रूप से करता है। ऐसे मामलों में शिकायत मिलने पर पहले गोपनीय जांच होती है। इसके बाद पर्याप्त सबूत मिलने पर ही छापे की कार्रवाई की जाती है। सुभाष शर्मा के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई है।



मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की टीमें बीते कुछ महीनों में कई सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के ठिकानों पर छापे मार चुकी हैं। छोटे पदों पर बैठे कर्मचारियों के पास भी करोड़ों की संपत्ति मिलने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इससे प्रदेश में सरकारी महकमों में फैले भ्रष्टाचार की गहराई का अंदाजा लगता है।



इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार की परतें उधेड़ने का काम किया है। आम जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर एक छोटे पद पर बैठा कर्मचारी इतनी बड़ी संपत्ति कैसे जुटा सका। लोकायुक्त की आगे की जांच में इसका जवाब मिलने की उम्मीद है।



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