अंतर्राष्ट्रीय बाघ तस्कर ताशी शेरपा की सजा बरकरार, कोर्ट ने अपील की खारिज
समझें क्या है पूरा मामला
- नर्मदापुरम कोर्ट ने ताशी शेरपा की अपील खारिज कर दी है।
- बाघ हड्डी तस्करी मामले में 5 साल की सजा कायम रही।
- STSF ने जांच में वैज्ञानिक और साइबर सबूत जुटाए।
- जांच में अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ।
- ताशी शेरपा गिरोह कई देशों तक फैला हुआ था।
नर्मदापुरम जिला एवं सत्र न्यायालय ने ताशी शेरपा टाइगर तस्करी केस (Tashi Sherpa Tiger Smuggling Case) में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर की अपील खारिज कर दी है। ताशी शेरपा को मिली 5 साल सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा बरकरार रखी गई है। यह मामला सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघ शिकार और हड्डियों की तस्करी से जुड़ा है।
ताशी शेरपा की सजा कायम
कोर्ट ने ताशी शेरपा की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। न्यायालय ने पहले मिली सजा को बरकरार रखा है। ताशी शेरपा को 5 साल सश्रम कारावास मिला था। इसके साथ 10 हजार रुपए अर्थदंड लगाया गया था।
ताशी शेरपा टाइगर तस्करी केस (Tashi Sherpa Tiger Smuggling Case) में आरोपी था। उस पर बाघ के अवैध शिकार का आरोप था। उसके गिरोह पर बाघ की हड्डियां तस्करी करने के आरोप लगे थे। कोर्ट ने उसे अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की अहम कड़ी माना है।
सतपुड़ा शिकार से जुड़ा मामला
यह मामला सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (Satpura Tiger Reserve) से जुड़ा है। जुलाई 2015 में बाघ शिकार की शिकायत मिली थी। शिकायत में हड्डियों की चीन तक तस्करी का जिक्र था। इसके बाद जांच एमपी स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स को मिली।
जांच एजेंसी ने मामले में कई स्तरों पर जांच की। एमपीएसटीएफ ने इंटरपोल की मदद ली। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (Wildlife Crime Control Bureau) से सहयोग लिया गया। जांच में संगठित तस्करी गिरोह सामने आया।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा
जांच में पता चला कि तस्करी नेटवर्क कई देशों तक फैला था। यह नेटवर्क भारत नेपाल भूटान और चीन तक जुड़ा था। ताशी शेरपा इस नेटवर्क की अहम कड़ी बताया गया।
ताशी शेरपा चीन के तिब्बत क्षेत्र का निवासी है। वह लंबे समय तक जांच एजेंसियों से बचता रहा। एमपीएसटीएफ ने लगातार प्रयासों के बाद उसे पकड़ा।
सिलीगुड़ी से हुई गिरफ्तारी
एमपीएसटीएफ ने ताशी शेरपा को 23 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र में हुई थी। वह अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पकड़ा गया था।
उसके पास से फर्जी भारतीय दस्तावेज मिले थे। जांच टीम को विदेशी मुद्रा भी मिली थी। इसके अलावा नेपाली और भूटानी मुद्रा बरामद हुई थी। उसके पास तीन मोबाइल फोन भी मिले थे।
वैज्ञानिक जांच से मिले सबूत
जांच के दौरान कई वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए। एजेंसी ने साइबर डेटा का भी विश्लेषण किया। इन सबूतों को अदालत में पेश किया गया।
ताशी शेरपा का ब्रेन मैपिंग परीक्षण कराया गया। उसका नार्को एनालिसिस परीक्षण भी हुआ। जांच में बाघ हड्डियों की तस्करी से जुड़े तथ्य मिले।
पैंगोलिन स्केल्स की तस्करी में भी उसकी भूमिका सामने आई। अदालत ने जांच एजेंसी के साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने इन्हीं आधारों पर अपील खारिज की।
30 आरोपियों पर हुई कार्रवाई
इस मामले में जांच एजेंसी ने बड़ा अभियान चलाया था। जांच के दौरान कुल 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 27 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।
दिसंबर 2022 में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने फैसला दिया था। अदालत ने दोषियों को 5-5 साल की सजा सुनाई थी। अब जिला एवं सत्र न्यायालय ने ताशी शेरपा की सजा कायम रखी है।
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