10 हजार के लालच में मजदूर बना 158 करोड़ का मालिक, आयकर नोटिस से उड़े होश
समझें क्या है पूरा मामला...
- थांदला के मजदूर परमेश डामोर के नाम पर फर्जी कंपनी बनी।
- रिश्तेदार ने 10 हजार रुपए महीने का झांसा देकर दस्तावेज लिए।
- मुंबई ले जाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए और सिम भी रखी।
- कंपनी के जरिए 158 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ।
- आयकर विभाग का नोटिस आते ही परमेश के होश उड़ गए।
मध्यप्रदेश झाबुआ के थांदला में एक दिहाड़ी मजदूर के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मजदूर के दस्तावेजों का कथित दुरुपयोग कर उसके नाम से एक कंपनी बना दी गई। इस कंपनी के जरिए करीब 158 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। मामला तब खुला जब मजदूर के पास आयकर विभाग का नोटिस पहुंचा।
कैसे फंसा मजदूर
पीड़ित का नाम परमेश है, जो थांदला के ग्राम बेडावा का रहने वाला है। परमेश सिर्फ चौथी कक्षा तक पढ़ा है और मजदूरी करके अपना घर चलाता है। परमेश ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में पूरी आपबीती बताई है। उसके मुताबिक साल 2024 में यह पूरा मामला शुरू हुआ था।
परमेश ने बताया कि उसका एक रिश्तेदार राजेंद्र डोडियार उसे मुंबई ले गया। राजेंद्र राजस्थान के ग्राम खारचिया का रहने वाला है। परमेश का भरोसा जीतने के लिए उसे हर महीने 10 हजार रुपए देने का लालच दिया गया। एक गरीब मजदूर के लिए यह रकम बड़ी थी, इसलिए उसने भरोसा कर लिया।
मुंबई ले जाकर लिए दस्तावेज
मुंबई पहुंचने के बाद परमेश से कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए है। परमेश को उस समय यह अंदाजा नहीं था कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किस काम के लिए होगा। इसके साथ ही उसके आधार कार्ड से जारी हुई सिम भी अपने पास रख ली गई। यानी परमेश की पहचान से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज दूसरों के हाथ में चले गए।
इन्हीं दस्तावेजों के सहारे परमेश के नाम पर एक कंपनी खड़ी कर दी गई। परमेश को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उसके नाम पर कोई कारोबार चल रहा है। उसे सिर्फ इतना बताया गया था कि उसे हर महीने पैसे मिलते रहेंगे।
158 करोड़ का खेल
जांच में सामने आया कि परमेश के नाम की इस कंपनी से करीब 158 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। इतनी बड़ी रकम एक दिहाड़ी मजदूर के नाम पर चलना हैरान करने वाला है। परमेश खुद मजदूरी करके मुश्किल से अपना घर चलाता है। ऐसे में उसके नाम से करोड़ों का कारोबार होना पूरी तरह हैरानी की बात है।
यह पूरा मामला तब खुला जब आयकर विभाग की तरफ से परमेश के नाम नोटिस भेजा गया। नोटिस में 158 करोड़ रुपए के लेनदेन का जिक्र था। नोटिस मिलते ही परमेश के होश उड़ गए। उसे समझ ही नहीं आया कि आखिर यह मामला क्या है।
सिर्फ 5 हजार मिले
परमेश ने बताया कि रिश्तेदार राजेंद्र ने पहले हर महीने 10 हजार रुपए देने का वादा किया था। वहीं, असल में उसे सिर्फ एक बार पांच हजार रुपए ही दिए गए। इसके बाद कह दिया गया कि स्कीम बंद हो गई है। परमेश को इस बहाने से टाल दिया गया और आगे कोई पैसा नहीं मिला।
परमेश का कहना है कि उसे शुरू से ही अंधेरे में रखा गया। उसे न तो कंपनी की जानकारी दी गई और न ही लेनदेन के बारे में कुछ बताया गया। जब आयकर नोटिस आया, तब जाकर उसे पूरे मामले की गंभीरता समझ आई।
अब क्या कर रहा मजदूर
परमेश ने अब पुलिस अधीक्षक को औपचारिक आवेदन देकर पूरी घटना की जानकारी दी है। उसने साफ कहा है कि उसका इस कंपनी और कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है। उसने पुलिस से पूरे मामले की जांच करने की मांग की है। परमेश का कहना है कि उसे इंसाफ चाहिए और असली दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
परमेश जैसे मामले आम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी हैं। दस्तावेजों और आधार कार्ड की जानकारी किसी को भी आसानी से नहीं देनी चाहिए। खासकर अनजान लोगों या दूर के रिश्तेदारों की बातों में आकर हस्ताक्षर करना खतरनाक हो सकता है। सिम कार्ड और बैंक खाते जैसी चीजें अपने नाम पर किसी और को चलाने देना भी जोखिम भरा है। ऐसे मामलों में पहचान की चोरी कर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया जाता है।
शिकायत के आधार पर मामले की जांच होगी
पुलिस अब परमेश की शिकायत के आधार पर मामले की जांच करेगी। देखना यह होगा कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि 158 करोड़ रुपए का यह पैसा आखिर कहां से आया और कहां गया। इलाके में इस घटना को लेकर लोगों में हैरानी और चर्चा दोनों बनी हुई है।
गांव के कई लोगों का कहना है कि परमेश बहुत सीधा-सादा इंसान है। उन्हें भी यकीन नहीं हो रहा कि उसके नाम पर इतनी बड़ी रकम का लेनदेन हुआ है। परमेश के परिवार वालों का कहना है कि वे शुरू से ही तनाव में हैं। आयकर नोटिस आने के बाद से परिवार की नींद उड़ गई है।
उन्हें डर है कि कहीं इस फर्जीवाड़े का खामियाजा उन्हें ही न भुगतना पड़े। परमेश ने साफ कहा है कि वह हर जांच में सहयोग करने को तैयार है। उसका कहना है कि वह सिर्फ यही चाहता है कि असली गुनहगार पकड़े जाएं।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर आम नागरिकों की पहचान सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता से जुड़ी है। आधार कार्ड, सिम और दस्तावेजों का दुरुपयोग गंभीर अपराध है और कानूनन दंडनीय है। गरीब और अनपढ़ लोग अक्सर ऐसे फर्जीवाड़े का आसान शिकार बनते हैं।
यह खबर लोगों को सतर्क करती है कि अपने दस्तावेज किसी के साथ साझा न करें। पीड़ित को न्याय मिलना और असली दोषियों की पहचान होना जरूरी है। यह मामला वित्तीय अपराध और पहचान की चोरी रोकने के लिए भी सबक है। इसलिए यह खबर हर आम नागरिक के लिए जागरूकता की दृष्टि से जरूरी है।
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