ट्विशा केस: CBI ने सास गिरिबाला सिंह को किया गिरफ्तार, अब कोर्ट में पेशी

Pawan Modiya | May 28, 2026, 17:43 IST
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ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI ने गुरुवार को पूर्व जिला जज व सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया। मेडिकल जांच के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक दिन पहले उनकी अग्रिम जमानत रद्द की थी।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के ससुराल में फांसी लगी हालत में मिलीं।
  • CBI ने गुरुवार को पूर्व जज गिरिबाला सिंह को उनके घर से गिरफ्तार किया।
  • मेडिकल जांच के बाद CBI गिरिबाला को कोर्ट में पेश करेगी।
  • पति समर्थ सिंह पहले से CBI हिरासत में है, 29 मई तक रिमांड पर।
  • मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गिरिबाला की अग्रिम जमानत बुधवार को रद्द की थी।

गिरिबाला सिंह को CBI ने किया गिरफ्तार

ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI (Central Bureau of Investigation) ने गुरुवार को पूर्व जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया। भोपाल के बाग मुगालिया एक्सटेंशन इलाके में स्थित उनके घर पर CBI की टीम पहुंची। घंटों की पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। सूत्रों के अनुसार एजेंसी ने घर में हाई-इंटेंसिटी 3D कैमरा लगाकर फर्स्ट फ्लोर समेत पूरे मकान की 360 डिग्री रिकॉर्डिंग की और दीवारों की ऊंचाई व घटनास्थल की संरचना का तकनीकी परीक्षण भी किया।



गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी से पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द की थी। CBI ने हाईकोर्ट को बताया था कि जांच के लिए गिरिबाला सिंह की हिरासत में पूछताछ यानी कस्टोडियल इंटेरोगेशन (Custodial Interrogation) जरूरी है। अब गिरफ्तारी के बाद मेडिकल जांच की प्रक्रिया होगी, उसके बाद CBI उन्हें कोर्ट में पेश करेगी।



हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की जमानत

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार देर रात 17 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपी पक्ष को राहत देना उचित नहीं था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित परीक्षण नहीं किया।



हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मृतका ट्विशा शर्मा के शरीर पर फांसी के अलावा कई अन्य चोटों के निशान मिले थे, जिनका आरोपी पक्ष संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह चोटें केवल शव उतारने के दौरान नहीं आई थीं, इसलिए अदालत ने गहन जांच को जरूरी माना।



सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) तुषार मेहता ने CBI की ओर से दलील दी कि अग्रिम जमानत बहुत जल्दबाजी में दी गई थी और मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रायल कोर्ट ने सभी पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया।



पति समर्थ पहले से CBI की हिरासत में

ट्विशा के पति समर्थ सिंह को अदालत में पेश करने के बाद CBI ने अपनी हिरासत में ले लिया था। कोर्ट ने उसे 29 मई तक CBI रिमांड पर भेजा है, जहां उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। समर्थ पेशे से वकील हैं। मामले में उन पर और उनकी मां गिरिबाला पर दहेज हत्या और क्रूरता के आरोप हैं।



12 मई की रात क्या हुआ था

ट्विशा शर्मा की 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या, दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।



उस रात ट्विशा ने अपनी मां को व्हाट्सऐप (WhatsApp) पर मैसेज किया था कि पति जोर से चिल्ला रहा है, फिर कॉल कट गई। रात 10 बजकर 37 मिनट पर गिरिबाला ने ट्विशा के माता-पिता का फोन उठाया। कुछ देर बाद त्विशा को फांसी लगी हालत में पाया गया और उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।



ट्विशा ने MBA किया था। दिल्ली में मार्केटिंग और कम्युनिकेशन सेक्टर में काम किया था। मॉडलिंग से भी जुड़ी रहीं और मिस पुणे का खिताब जीत चुकी थीं। एक तेलुगु फिल्म में भी काम किया था। दिसंबर 2025 में उनकी शादी भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी।



गर्भावस्था के बाद बढ़ा था उत्पीड़न

CBI के वकीलों ने हाईकोर्ट को बताया कि 17 अप्रैल को जब परिवार को ट्विशा की गर्भावस्था का पता चला तो झगड़ा शुरू हो गया। ट्विशा उस दिन ससुराल छोड़कर नोएडा अपने परिवार के पास चली गईं। पति और सास ने उनके चरित्र पर शक किया और गर्भपात के लिए दबाव बनाया। 5 मई को त्विशा ने अपनी मां से विनती की कि उन्हें वहां से ले जाएं।



व्हाट्सऐप चैट्स और पारिवारिक बातचीत का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड और साक्ष्यों की गहराई से जांच करने पर मामले की तस्वीर ट्रायल कोर्ट की टिप्पणी से अलग दिखाई देती है।



CCTV फुटेज विवाद भी अहम

पुलिस ने 13 मई को ट्विशा के घर से CCTV (Closed Circuit Television) फुटेज जब्त की थी। लेकिन CBI ने हाईकोर्ट में दलील दी कि गिरिबाला के पास घटना की फुटेज थी और उन्होंने उसका एक छोटा हिस्सा सोशल मीडिया पर जारी किया, जो साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ था। हाईकोर्ट ने इस पहलू को भी जमानत रद्द करने की एक बड़ी वजह माना।



CBI जांच की दिशा और आगे की राह

CBI अब डिजिटल सबूत, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सऐप चैट्स, CCTV फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट का मिलान कर रही है। आने वाले दिनों में डॉक्टरों, पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ हो सकती है। अब जब मां-बेटे दोनों CBI की पकड़ में हैं, मामले में बड़े खुलासे की उम्मीद है।



इससे पहले ट्विशा के माता-पिता ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर CBI जांच की मांग की थी। राज्य सरकार ने इसके लिए अधिसूचना जारी की। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी CBI को जांच सौंपने का निर्देश दिया। मामले की गंभीरता और हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद अब यह जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है।



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