उज्जैन संभागायुक्त, शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना दोनों के आदेश पर स्टे, रंगशाही को फिर DEO का जिम्मा
शाजापुर में जिला आबकारी अधिकारी (डीईओ) विनय रंगशाही मामले में सोमवार को सुनवाई के बाद देर शाम औपचारिक आदेश आ गया है। हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शाजापुर कलेक्टर का 20 जनवरी का आदेश स्टे कर दिया है।
साथ ही संभागायुक्त उज्जैन आशीष सिंह के 16 फरवरी के निलंबन आदेश भी स्टे कर दिया है। विनय रंगशाही को एक बार फिर जिला आबकारी अधिकारी शाजापुर पद पर काम करने की मंजूरी दी है।
यह दोनों आदेश स्टे किए गए
20 जनवरी को शाजापुर कलेक्टर आईएएस ऋजु बाफना ने शासकीय काम में लापरवाही की बात कहते हुए रंगशाही की जगह एडीईओ निमिषा परमार को जिला आबकारी अधिकारी का प्रभार दे दिया।
साथ ही मप्र शासन, आबकारी आयुक्त और संभागायुक्त आशीष सिंह को रंगशाही पर कार्रवाई के लिए पत्र लिख दिया। इस पत्र के आधार पर संभागायुक्त सिहं ने 16 फरवरी को रंगशाही को सस्पेंड करने के आदेश दे दिए। हाईकोर्ट ने इन दोनों ही आदेश को स्टे किया है।
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हाईकोर्ट बेंच ने आदेश में यह लिखा
कलेक्टर बाफना द्वारा रंगशाही को निलंबित करने की अनुशंसा संभागायुक्त को की। साथ ही उनका प्रभार अधीनस्थ अधिकारी को दे दिया। इस पर हाईकोर्ट ने अपने आर्डर में लिखा है कि ऐसा करने से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि कलेक्टर ने आयुक्त द्वारा निलंबन किए जाने से पहले अपने अधिकार क्षेत्र का गलत तरीके से प्रयोग किया है।
इसलिए 20 जनवरी और 16 फरवरी के आदेश का संचालन और प्रभाव अगली सुनवाई की तारीख तक स्थगित रहेगा। साथ ही यह स्पष्ट किया जाता है कि याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई की तारीख तक जिला शाजापुर से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की अनुमति दी जाएगी।
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याचिका में इन सभी को बनाया गया पक्षकार
याचिकाकर्ता रंगशाही ने इस मामले में मप्र शासन, आबकारी आयुक्त, कलेक्टर, निमिषा परमार, संभागायुक्त उज्जैन, उज्जैन जिला आबकारी अधिकारी निधि जैन को पक्षकार बनाया था।
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कलेक्टर के आदेश पर इसलिए उठी शंका
इसमें याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि कलेक्टर पहले ही उन पर कार्रवाई का मन बना चुकी थी। इस पर हाईकोर्ट जस्टिस ने पाया कि कलेक्टर ने संभागायुक्त को जब रंगशाही को सस्पेंड करने की अनुशंसा की।
इसके पहले ही वह अधीनस्थ परमार को जिला आबकारी अधिकारी का प्रभार दे चुकी थी। उनके द्वारा संभागायुक्त द्वारा रंगशाही को निलंबित करने का इंतजार नहीं किया गया। यानी वह मन बना चुकी थी कि ऐसा करना है।
ऐसे में मंशा पर सवाल उठता है। यदि कलेक्टर संभागायुक्त के आदेश के पास ऐसा कदम उठाती तो कोई समस्या नहीं थी लेकिन यह पहले ही कर दिया गया।
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सितंबर माह से चल रहा विवाद
कलेक्टर और रंगशाही के बीच विवाद सितंबर-अक्टूबर 2025 से ही चल रहा है। इस दौरान रंगाशाही पर सीएम दौरे के दौरान हैलीकाप्टर में फूड बास्केट नहीं रखने और ड्यूटी में चूक के आरोप लगे।
इसके बाद कलेक्टर ने आरोप लगाए कि टीएल मीटिंग में नहीं आते हैं, जनसुनवाई में नहीं आते हैं, फोन नहीं उठाते हैं और ड्यूटी का पालन सही नहीं करते हैं। इस पर उनके द्वारा प्रमुख सचिव और आबकारी आय़ुक्त को भी पत्र लिखे गए।
आखिर में विवादों के बाद एडीईओ निमिषा परमार को प्रभार दे दिया और संभागायुक्त को निलंबन की अनुशंसा कर दी। इसके बाद वह 16 फरवरी को कलेक्टर की अनुशंसा पर रंगशाही को निलंबित कर दिया गया। इसके खिलाफ वह हाईकोर्ट गए थे।