भाद्रपद माह की त्रयोदशी तिथि को चांदी के त्रिशूल और बिल्व पत्र से हुआ बाबा महाकाल का नयनाभिराम श्रृंगार
Kaushiki | Sept 05, 2025, 09:27 IST
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विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार की सुबह भस्म आरती के दौरान एक अद्भुत और दिव्य नजारा देखने को मिला। मंदिर के कपाट तड़के ही खोल दिए गए और पूरा वातावरण हर हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
बाबा महाकालभस्म आरती: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज शुक्रवार (5 सितंबर) की सुबह भस्म आरती के दौरान एक अद्भुत और दिव्य नजारा देखने को मिला। मंदिर के कपाट तड़के ही खोल दिए गए और पूरा वातावरण "हर हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठा।
इस पवित्र अवसर पर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर खुद को धन्य महसूस किया। भस्म आरती की शुरुआत से पहले, पुजारियों ने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान की आज्ञा ली।
सबसे पहले, सभा मंडप में वीरभद्र जी के कान में मंत्रों का वाचन किया गया और घंटी बजाकर भगवान से अनुमति मांगी गई। इसके बाद, सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए और गर्भगृह का दरवाजा खोला गया। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसका अपना एक विशेष महत्व है।
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कपाट खुलने के बाद, पुजारियों ने सबसे पहले भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारा। इसके बाद, पंचामृत (दूध, दही, घी, शकर और शहद) से भगवान का पूजन किया गया।
पंचामृत अभिषेक के बाद, कर्पूर आरती की गई, जिससे गर्भगृह में एक पवित्र और सुगंधित वातावरण बन गया। इसके बाद, भगवान को जल से स्नान कराया गया।
बाबा महाकाल का श्रृंगार विशेष रूप से किया गया। उन्हें रजत (चांदी) चंद्र, त्रिशूल, मुकुट और अन्य आभूषण अर्पित किए गए। भांग, चंदन और ड्रायफ्रूट्स से उनका मनमोहक श्रृंगार किया गया।
यह श्रृंगार इतना अद्भुत था कि हर कोई मंत्रमुग्ध होकर देखता रहा। बाबा महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ सुगंधित फूलों से बनी माला भी धारण की।
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श्रृंगार के बाद, भगवान महाकाल को फल और मिठाई का भोग लगाया गया। भोग अर्पित करने के बाद, महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई।
भस्म आरती के बाद, मंदिर का वातावरण और भी दिव्य हो गया। इस पवित्र भस्म आरती में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।
सभी ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना की। यह भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की एक अनूठी पहचान है और दुनिया भर से लोग इसे देखने के लिए आते हैं।
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इस पवित्र अवसर पर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर खुद को धन्य महसूस किया। भस्म आरती की शुरुआत से पहले, पुजारियों ने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान की आज्ञा ली।
सबसे पहले, सभा मंडप में वीरभद्र जी के कान में मंत्रों का वाचन किया गया और घंटी बजाकर भगवान से अनुमति मांगी गई। इसके बाद, सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए और गर्भगृह का दरवाजा खोला गया। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसका अपना एक विशेष महत्व है।
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पंचामृत अभिषेक और दिव्य श्रृंगार
पंचामृत अभिषेक के बाद, कर्पूर आरती की गई, जिससे गर्भगृह में एक पवित्र और सुगंधित वातावरण बन गया। इसके बाद, भगवान को जल से स्नान कराया गया।
बाबा महाकाल का श्रृंगार विशेष रूप से किया गया। उन्हें रजत (चांदी) चंद्र, त्रिशूल, मुकुट और अन्य आभूषण अर्पित किए गए। भांग, चंदन और ड्रायफ्रूट्स से उनका मनमोहक श्रृंगार किया गया।
यह श्रृंगार इतना अद्भुत था कि हर कोई मंत्रमुग्ध होकर देखता रहा। बाबा महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ सुगंधित फूलों से बनी माला भी धारण की।
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भस्म आरती और भोग प्रसाद
भस्म आरती के बाद, मंदिर का वातावरण और भी दिव्य हो गया। इस पवित्र भस्म आरती में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।
सभी ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना की। यह भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की एक अनूठी पहचान है और दुनिया भर से लोग इसे देखने के लिए आते हैं।
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