आज दोपहर में होगी बाबा महाकाल की भस्मारती, साल में एक बार आता है यह दिन

Amresh Kushwaha | Feb 16, 2026, 08:27 IST
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उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती शिव भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहती है। वहीं, आज की यह आरती दोपहर में की जाएगी। इस भस्म आरती में शामिल होने के लिए देशभर के शिव भक्त उज्जैन पहुंचते हैं।

Ujjain. धर्म की नगरी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि के अगले दिन यानी आज का माहौल कुछ खास होता है। बता दें कि भक्तों को इस पल का पूरे साल इंतजार रहता है। हर दिन की तरह आज भी भस्मारती का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन आज एक खास बात है। आमतौर पर ये भस्मारती सूर्योदय से पहले होती है, लेकिन आज यह दोपहर 12 बजे होगी। साल में बस एक ही दिन ऐसा होता है जब दोपहर में भस्मारती होती है।



महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा

महाशिवरात्रि के खास मौके पर रविवार रात से ही मंदिर में अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया था। रात के 10:30 बजे से भगवान महाकाल का चार प्रहर का पूजन शुरू हुआ। इस दौरान 11 ब्राह्मणों ने रुद्रपाठ और खास मंत्रों के साथ भगवान का अभिषेक किया।



पंचामृत और सप्तधान्य से महाकाल का दिव्य अभिषेक

पूजा के अगले चरण में बाबा का पंचामृत पूजन किया गया था। इसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के साथ-साथ गंगाजल, गुलाब जल और केसर मिश्रित दूध का भी इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाए गए और सप्तधान्य का मुखारविंद भी धारण कराया गया था। इन सात धान्यों में चावल, खड़ा मूंग, तिल, गेहूं, जौ, साल और खड़ा उड़द शामिल थे।



3 क्विंटल फूलों से सजा बाबा का भव्य सेहरा

सोमवार सुबह बाबा महाकाल को फूलों का मुकुट, यानी सेहरा बांधा गया। पुजारी आशीष शर्मा के मुताबिक, करीब 3 क्विंटल फूलों से ये सेहरा तैयार किया गया था। इसे भगवान के सिर पर चंद्र मुकुट, छत्र और त्रिपुंड जैसे आभूषणों के साथ सजाया गया। सेहरा आरती के बाद बाबा को अलग-अलग तरह के मिष्ठान्न और पंचमेवा का भोग अर्पित किया गया।



दोपहर 12 बजे भस्मारती और दिनभर का कार्यक्रम

आज सुबह 11 बजे बाबा का सेहरा उतारा जाएगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक वो ऐतिहासिक समय आएगा जब साल में एक बार होने वाली दोपहर की भस्मारती होगी। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे भोग आरती होगी। साथ ही, शिवनवरात्रि का पारणा (व्रत तोड़ना) किया जाएगा। शाम को पूजन और शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे।



पंचमुखारविंद दर्शन के साथ पर्व का समापन

महाशिवरात्रि का ये महापर्व 18 फरवरी, बुधवार को विधिवत समाप्त होगा। इस दिन भक्तों को साल में एक बार होने वाले पंचमुखारविंद (भगवान शिव के पांच चेहरे) के दर्शन का मौका मिलेगा। प्रशासन ने दर्शनार्थियों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए पूरी तैयारी की है।



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