उज्जैन में 7 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, जानें कब और क्या है ये शुभ संयोग
समझें क्या है पूरा मामला...
- 7 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, उज्जैन में उमड़ेगी भीड़।
- एक ही दिन सवारी और नागपंचमी, खुलेंगे खास पट।
- साल में सिर्फ एक दिन दर्शन, वो भी खास मौके पर।
- 8 से 10 लाख श्रद्धालु आएंगे, प्रशासन अलर्ट मोड में।
- 2019 के बाद फिर बना यह दुर्लभ शुभ संयोग।
उज्जैन में 17 अगस्त को सावन की तीसरी सवारी और नागपंचमी एक साथ पड़ रही है। इसी दिन नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट भी खुलेंगे। यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन खुलता है। ऐसा संयोग सात साल बाद बना है। प्रशासन का अनुमान है कि 8 से 10 लाख श्रद्धालु उज्जैन पहुंच सकते हैं।
दो बड़े आयोजन एक साथ
भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में इस बार सावन खास होने जा रहा है। 17 अगस्त को सावन की तीसरी सवारी और नागपंचमी एक ही दिन पड़ रही है।
इसी दिन साल में केवल एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट भी श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। दोनों बड़े आयोजन एक साथ होने से महाकाल मंदिर में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए मंदिर प्रशासन विशेष तैयारियों में जुट गया है।
2019 के बाद फिर बना यह संयोग
करीब सात साल बाद ऐसा संयोग दोबारा बन रहा है। इससे पहले 2019 में भी सावन की तीसरी सवारी और नागपंचमी एक साथ पड़ी थी। उस समय भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाकाल की सवारी और नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे थे। इस बार भी वैसी ही भीड़ की उम्मीद जताई जा रही है।
साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं पट
महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है। इसके पट साल में केवल एक बार नागपंचमी पर खोले जाते हैं। पट खुलने की अवधि 24 घंटे की होती है।
इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी दिन सावन के तीसरे सोमवार की महाकाल की शाही सवारी भी निकलेगी। इससे श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
भीड़ प्रबंधन के लिए होगी बैठक
महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने इस बारे में जानकारी दी। उनके मुताबिक तीसरी सवारी और नागपंचमी एक साथ होने के कारण विशेष बैठक बुलाई जाएगी।
इस बैठक में पुलिस, प्रशासन और मंदिर समिति के अधिकारी शामिल होंगे। श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन और सुरक्षा व्यवस्था पर खास योजना बनाई जाएगी।
दुर्लभ है नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा
सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इसी दिन नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन का मौका मिलता है। मंदिर में स्थापित प्रतिमा 11वीं शताब्दी की मानी जाती है। इसमें फन फैलाए नाग पर भगवान शिव और माता पार्वती विराजमान हैं। यह प्रतिमा अपनी तरह की दुर्लभ मानी जाती है। साल भर में यह सिर्फ एक दिन ही दर्शन के लिए खुलती है।
पिछले संयोगों पर एक नजर
2019 में 5 अगस्त को सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी का दुर्लभ संयोग बना था। 2023 में अधिकमास के कारण सावन के सातवें सोमवार और नागपंचमी एक साथ पड़े थे।
अब 2026 में 17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार, नागपंचमी और महाकाल की भव्य सवारी एक ही दिन होगी। यह संयोग श्रद्धालुओं के लिए खास माना जा रहा है।
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