वसुंधरा राजे फेक लेटर केस: कांग्रेस कार्यकर्ता किए गए हाईकोर्ट में पेश, पुलिस के दावों को बताया झूठा, हाईकोर्ट सख्त

Neel Tiwari | Apr 29, 2026, 17:28 IST
vasundhara raje
वसुंधरा राजे के फेक लेटर केस में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस के दावों को झूठा बताया। 12 मई को मामले की अगली सुनवाई होगी।

News in short

  • तीनों आरोपी बिलाल खान, इनाम अहमद, निखिल प्रजापति कोर्ट में पेश।
  • राजस्थान पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी कोर्ट में उपस्थित।
  • 22 अप्रैल को दोपहर 1:10, 1:20, 1:30 बजे हुई गिरफ्तारी - राजस्थान पुलिस का दावा।
  • एमपी सरकार ने सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में पेश किए।
  • हाईकोर्ट ने CJM से बयान दर्ज कराने और अधिकारियों से हलफनामा मांगा।

News in detail

जबलपुर हाईकोर्ट में कांग्रेस आईटी सेल कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी मामले की ताजा सुनवाई में कई खुलासे हुए। राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने गिरफ्तारी के समय और प्रक्रिया को लेकर नए दावे किए। हाईकोर्ट ने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बयान दर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही, विस्तृत हलफनामे दाखिल करने का आदेश भी दिया गया है ताकि सच्चाई सामने आ सके।



हाईकोर्ट में पेश किए गए तीनों कांग्रेसी कार्यकर्ता

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जुड़े कथित फर्जी लेटर वायरल करने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में 29 अप्रैल 2026 को सुनवाई हुई। इस सुनवाई में कांग्रेस से जुड़े तीन कार्यकर्ता बिलाल खान, इनाम अहमद और निखिल प्रजापति कोर्ट में पेश हुए। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच के सामने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पुलिस के दावों को झूठा बताते हुए उनका खंडन किया, जिससे मामला नया मोड़ ले गया।



पुलिस का दावा

राजस्थान पुलिस की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने कोर्ट को बताया कि बंदियों को पहले हिरासत में नहीं लिया गया था। 22 अप्रैल 2026 को क्रमशः दोपहर 1:10, 1:20 और 1:30 बजे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उन्हें संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। पहले पुलिस रिमांड पर भेजा गया। फिर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। तीनों को जमानत मिल चुकी है। जमानत बांड जमा न होने के कारण वे हिरासत में हैं। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी की कहानी को गलत बताया।



आदेश के बाद दिखाई गिरफ्तारी

जयपुर पुलिस ने गिरफ्तारी की जो तारीख बताई, वह 22 अप्रैल है। वही तारीख थी जब बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की पहली सुनवाई हुई थी। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं टॉप ऑफ द लिस्ट होती हैं। 22 अप्रैल को सुबह ही कोर्ट का आदेश आया था कि आरोपियों को जबलपुर हाईकोर्ट में पेश किया जाए। जयपुर पुलिस ने गिरफ्तारी का समय हाईकोर्ट के आदेश के बाद का दिखाया है। इस दावे से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।



हिरासत नहीं थी के दावे पर सवाल

सुनवाई के दौरान कहा गया कि आरोपियों को पहले गिरफ्तार नहीं किया गया। वे खुद मध्यप्रदेश पुलिस के साथ जयपुर गए थे। हालांकि, तीनों बंदियों ने इस दावे को गलत बताया। उनका कहना था कि पुलिस का बताया घटनाक्रम असलियत से विपरीत था। आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें 18 अप्रैल से गिरफ्तार करके रखा गया था। इस दावे के बाद कोर्ट ने मामले की विस्तृत जांच का निर्णय लिया।



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एमपी सरकार ने सीसीटीवी फुटेज किए पेश

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.डी. सिंह ने 28 अप्रैल 2026 का एक पत्र और कुछ सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश किए। उन्होंने कहा कि यही उपलब्ध और मामले से जुड़े फुटेज हैं। इसके अलावा साइबर क्राइम ब्रांच भोपाल के एसआई प्रमोद कुमार शर्मा और तेजराम सेन भी अदालत में मौजूद रहे।



आरोपियों के बयान दर्ज करने के आदेश

हाईकोर्ट ने सच्चाई सामने लाने के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) को निर्देश दिए हैं। तीनों आरोपियों के अलग-अलग बयान दर्ज किए जाएंगे, जिसमें घटनाओं का क्रम दर्ज होगा। कोर्ट ने कहा कि इन बयानों में मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा पूछताछ से लेकर जयपुर में गिरफ्तारी तक की पूरी जानकारी होगी। कोर्ट ने जयपुर के डीआईजी क्राइम और भोपाल के डीसीपी क्राइम को भी निर्देश दिए हैं। उन्हें आरोपियों से बात करने से लेकर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने तक का विस्तृत हलफनामा एक सप्ताह में दाखिल करना होगा।



अगली सुनवाई 12 मई को

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 मई 2026 के लिए तय की है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी संबंधित अधिकारी उस दिन अदालत में उपस्थित रहें। बंदियों के बयान दर्ज करने के बाद उन्हें जयपुर भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे जमानत की शर्तों का पालन कर सकें। यह मामला अब केवल गिरफ्तारी का नहीं रहा, बल्कि दोनों राज्यों की पुलिस के दावों, कानूनी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों के संरक्षण से जुड़ा बड़ा मामला बन चुका है। आने वाली सुनवाई में इस मामले से जुड़े अहम खुलासे हो सकते हैं।



पुलिस के सभी अधिकारी रहे कोर्ट में मौजूद

इस मामले की पिछली सुनवाई में राजस्थान पुलिस के संबंधित अधिकारी अदालत में पेश नहीं हुए थे। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान राजस्थान पुलिस की ओर से कई अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए। इनमें अतिरिक्त एसपी रामस्वरूप शर्मा, एसीपी बलराम चौधरी, सीआई संतरा मीणा, एसआई शेर सिंह, हेड कांस्टेबल अब्दुल रऊफ, कांस्टेबल सियाराम, प्रियंका, बुधुराम, मनोज, विजय सिंह, विनोद, दयानंद, सुनील और जगदेव शामिल थे। कोर्ट के पिछले निर्देश के अनुसार, सभी संबंधित अधिकारी हाईकोर्ट में उपस्थित रहे।



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